दो रोगों की एक दवाई

Posted On by & filed under व्यंग्य

बचपन में स्कूल में हमें गुरुजी ने एक सूत्र रटाया था, ‘‘सौ रोगों की एक दवाई, सफाई सफाई सफाई।’’ कुछ बड़े हुए, तो संसार और कारोबार में फंस गये। इससे परिवार और बैंक बैलेंस के साथ ही थोंद और तनाव भी बढ़ने लगा। फिर शुगर, रक्तचाप और नींद पर असर पड़ा। डॉक्टर के पास गये,… Read more »

पेशेवर कांग्रेस  

Posted On by & filed under व्यंग्य

  पिछले रविवार को शर्मा जी मिले, तो बहुत खुश थे। खुशी ऐसे छलक रही थी, जैसे उबलने के बाद दूध बरतन से बाहर छलकने लगता है। उनके मुखारविन्द से बार-बार एक फिल्मी गीत प्रस्फुटित हो रहा था, ‘‘दुख भरे दिन बीते रे भैया, अब सुख आयो रे..।’’ – शर्मा जी, क्या परिवार में कोई… Read more »

घर का जोगी जोगड़ा

Posted On by & filed under विविधा

– 1967 में लोक नायक राम मनोहर लोहिया के गैर कांग्रेसवाद के नारे के परिणाम स्वरूप कई प्रदेशों में संयुक्त सरकारें बनीं. बाद में कांग्रेस के भी इंडिकेट-सिंडिकेट में दो टुकड़े हो गए. मगर अपने अपूर्व साहस, कल्पनाशीलता और समाजवादी आग्रहों से इन्दिरा गांधी ने कांग्रेस को फिर से नयी जान भरना शुरू कर दिया था. इन्दिरा गांधी ने अपने समय में प्रादेशिक छत्रपों को कभी उभरने नहीं दिया गया था और सत्ता को काफी हद तक केन्द्रीकृत कर रखा था. धीरे-धीरे कांग्रेस नेहरू-गांधी परिवार की विरासत बन गई.नेहरू-गांधी परिवार का नेतृत्व ही वह आंचल साबित हुआ जो कांग्रेसियों को आपस में जोड़कर रखता रहा है

शादी को तमाशा न बनाएं!

Posted On by & filed under विधि-कानून, समाज

कांग्रेस की सांसद श्रीमती रंजीत रंजन एक ऐसा विधेयक पेश कर रही हैं, जो अगर कानून बन गया तो सारे देश का बड़ा लाभ होगा। यह ऐसा कानून बनेगा, जिससे सभी जातियों, सभी मजहबों और सभी प्रांतों के लोगों को लाभ मिलेगा। यह विधेयक शादी में होने वाले अनाप-शनाप खर्चे पर रोक लगाने की मांग… Read more »

यूपी में सभी पार्टियों का अपना-अपना समीकरण

Posted On by & filed under राजनीति

उत्तर प्रदेश का चुनावी समर अपने उफान पर है, 11 फरवरी 2017 को पहले चरण का मतदान होना है। इसलिए उत्तर प्रदेश की सभी प्रमुख पार्टियां अपने-अपने प्रचार को धार देने में लगी हैं और भाजपा और सपा जैसी दिग्गज पार्टियों ने अपने घोषणा पत्र में लोक लुभावने वायदे कर लोगों को लुभाने का दांव… Read more »

‘खादी वस्त्र नहीं विचार है’ तो इस विचार को खत्म करने का श्रेय कांग्रेस को है!

Posted On by & filed under राजनीति

महात्मा गांधी के अनुसार, ‘खादी वस्त्र नहीं, विचार है’। लेकिन हालिया वक्त में गांधी जी के इस विचार को कांग्रेस समेत अधिकांश विपक्षी दलों और कुछ बुद्धिजीवियों ने फोटो फ्रेम तक ही सीमित करने का असफल प्रयास जरुर किया हैं। जबकि वह सुबह- शाम इस डर से गांधी–गांधी ही करते रहते है कि कहीं कोई… Read more »

कितना असर करेगी गांधी परिवार और पीके की रणनीति ?

Posted On by & filed under राजनीति

मृत्युंजय दीक्षित अब कांग्रेस की प्रचार की रणनीति धीरे -धीरे ही सही जनता के सामने आने लग गयी है। जुलाई के अतिंम दिनों में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने रैंप पर चलते हुए अपने सभी विरोधियों पर खुलकर हमला बोला और पीएम मोदी की नीतियों का खुलकर मजाक बनाया। लेकिन बाद में स्वयं भी सोशल… Read more »

अपनों से भी हार रही कांग्रेस में बिखराव और हताशा का दौर

Posted On by & filed under राजनीति

कांग्रेस मुक्त भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे की अनुगूंज और हालिया विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद पस्त पड़ी देश की सबसे पुरानी पार्टी को लेकर तीन बड़ी हस्तियों के विचार इन दिनों अपनी ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। देश ही नहीं, कांग्रेस के भी इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण हस्ती महात्मा गांधी के… Read more »

जब काल मनुज पर छाता है, विवेक पूर्व मर जाता है!

Posted On by & filed under राजनीति

कीर्ति दीक्षित लेखिका/स्वतंत्र पत्रकार ‘जब काल मनुज पर छाता है, विवेक पूर्व मर जाता है’ ,वर्तमान में कांग्रेस पार्टी के क्रियाकलापों को देखकर ऐसा ही प्रतीत होता है, पश्चिम बंगाल में कांग्रेसी विधयाकों से राहुल और सोनिया के प्रति वफादारी का हलफनामा भरवाया जा रहा था, दूसरी तस्वीर में कल कांग्रेस के वरिष्ठ एवं युवा… Read more »

नासमझी में मुस्लिमपरस्ती

Posted On by & filed under राजनीति

हरि शंकर व्यास सोनिया गांधी की कमान से पहले कांग्रेस के जितने भी अध्यक्ष हुए हैं उन्होंने हिंदू अवचेतन का ध्यान रखा। हिंदू की संवेदनाओं से खेला नहीं खेला। कोई माने या न माने तथ्य है कि गांधी की राजनीति में हिंदू बुनियाद थी। तभी जिन्ना और मुस्लिम लीग को गांधी पर भरोसा नहीं था… Read more »