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    बुन्देलखंड को सिनेमा से जोड़ रहा खजुराहो फिल्म महोत्सव

    शोला और शबनम फिल्म में अभिनेता गोविन्दा जैसे साथी कलाकार राजा बुन्देला के जिगरी दोस्त थे वैसे ही असल जिंदगी में हमेशा उनके साथ हैं। राजा बुन्देला जब बुन्देलखंड में सिनेमा को सशक्त कर रहे हैं तो इस सार्थक प्रयास का साथ देने गोविंदा भी खजुराहो पहुंचे और खजुराहो इंटरनेशल फिल्म फेस्टिवल का अपने ही अंदाज में श्रीगणेश कराया। तरक्की में पिछड़े बुन्देलखंड के लिए ऐसे सिने आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को मजबूती देने वाले बहुत खूबसूरत अवसर हैं।
    निसंदेह वीर छत्रसाल और पन्ना धाय की पावन भूमि बुन्देलखंड में प्रतिभाओं की कमी नहीं हैं। चाइना गेट में अपनी चमक दिखाने वाले जगीरा को कौन भूल जाएगा। गोलियां चली नहीं और करन लगे कांय कांय जैसे डरावने और यादगार डॉयलॉग बोलने वाले मुकेश तिवारी बुन्देलखंड की खास प्रतिभा हैं। आशुतोष राणा भी भला किससे कम बैठते हैं। अभिनय और साहित्य की गहराइयों में उनका कोई सानी नहीं है। बुन्देलखंड से इन नामचीन सितारों की परंपरा के पुराने और नामी अभिनेता हैं राजा बुन्देला। राजा बुन्देला का अपना जमाना रहा है और उनकी फिल्मों को हिन्दी सिनेमा में खूब पसंद भी किया गया है। राजा बुन्देला अपनी अभिनय पारी पूरी करने के बाद काफी समय से फिल्म निर्देशन में हाथ आजमा रहे हैं । उन्होंने कई फिल्में बनाई हैं और सिनेमा के माध्यम की गरिमा बढ़ाने के लिए वे निरंतर काम भी कर रहे हैं। कलाकारों का अपनी माटी के प्रति लगाव होना स्वभाविक है। राजा बुन्देला को भी अपनी जन्मभूमि बुन्देलखंड के प्रति बहुत प्रेम और आदर है। वे अपने सिने अनुभव का अपने क्षेत्र की बेहतरी के लिए भरपूर उपयोग करना चाहते हैं। इसके लिए वे सात साल से खजुराहो में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल का आयोजन कर रहे हैं। इस सिने समारोह के जरिए वे तरक्की में पिछड़े बुन्देलखंड को सिने समाज की नजर में लाते हैं। समारोह में आने वाले कलाकार इस क्षेत्र के प्रतिभावान कलाकारों से लेकर यहां की बोली, यहां की कला संस्कृति, जैव विविधता, प्राकृतिक सौन्दर्य और पर्यटन से दो चार होते हैं। फिल्म समारोह में देश भर से फिल्म निर्देशक विभिनन श्रेणियों में अपनी फिल्में लाते हैं और उनका निशुल्क प्रदर्शन करते हैं। इस बार फिल्म समरोह कैसा रहा आइए ग्वालियर चंबल के प्रतिभावान फिल्मकार विजय तिवारी से जानते हैं। विजय तिवारी चर्चा में बताते हैं कि राजा बुन्देला जी को बुन्देलखंड और सिनेमा के बीच संवाद बनाने का जुनून है। बिना रुके और बिना थके यह काम वे 7 साल से निरंतर कर रहे हैं। इस साल गोविंदा आए तो समारोह गुलजार हो गया। हमने 11 टपरा टॉकीज में देशी, विदेशी, शार्ट, फीचर टेली आदि हर तरह की फिल्में रोज दिखाई जा रही हैं। कलाकार, फिल्म निर्देशक स्थानीय प्रतिभाओं से मिल जुल रहे हैं और नए कथानकों को तैयार कर रहे हैं। यहां से आइडिया लेकर कई फिल्में निकट भविष्य में बनेंगी। इस बार का आयोजन यादगार रहा। हमने मनोज वाजपेयी , शब्बीर कुमार औ भाबीजी घर पर हैं वाले रोहिताश्व गौड़ जी को सुना समझा और उनके साथ क्वालिटी टाइम बिताया। एक मंच पर सिनेमा से जुड़े लोग आते हैं जो आनंद और उत्साह बढ़ जाता है। मैंने ग्वालियर चंबल के महोत्सव संयोजक के रुप में सहभागिता की और साजिश ऑफ फर्स्ट नाइट और आई विश नाम से दो फिल्में भी प्रस्तुत कीं। यह फिल्म महोत्सव हर बार की तरह इस बार भी बहुत कुछ सिखा गया है।
    विवेक कुमार पाठक

    विवेक कुमार पाठक
    स्वतंत्र पत्रकार

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