लेखक परिचय

लक्ष्मी जायसवाल

लक्ष्मी जायसवाल

दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा तथा एम.ए. हिंदी करने के बाद महामेधा तथा आज समाज जैसे समाचार पत्रों में कुछ समय कार्य किया। वर्तमान में डायमंड मैगज़ीन्स की पत्रिका साधना पथ में सहायक संपादक के रूप में कार्यरत। सामाजिक मुद्दों विशेषकर स्त्री लेखन में विशेष रुचि।

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दिल में उठी अजीब सी हलचल है
क्या इस बेचैनी का कोई हल है
नादाँ इस दिल में तूफ़ान उठते हैं
पलकों के नीचे अब सपने सजते हैं।

सपनों और पलकों के बीच न जाने

कितना ज्यादा फासला है जो अब भी
सपने हमारी पलकों से दूर रहते हैं।
दिल में बातें बहुत हैं पर सुनने वाला
कोई भी नहीं, इसलिए अब हम अपनी
दास्तां खुद ही खुद से कहते हैं।
खुद ही खुद से करते हैं बातें और अब
खुद ही हम अपना दर्द बांट लेते हैं।
ख़ामोशी, ख़ामोशी और ख़ामोशी ही है
पर अब हम इन खामोशियों में भी

न जाने कैसे इतना शोर सुन लेते हैं।

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