जानिए 2018 में मौनी अमावस्या व्रत का महत्व और स्नान- दान के शुभ मुहूर्त—

मौनी अमावस्या का हिन्दू धर्म में बेहद खास महत्व है। माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को ही मौनी अमावस्या कहते है। इस दिन मौन व्रत करना चाहिए। बता दें, मुनि शब्द से ही ‘मौनी’ शब्द की उत्पत्ति हुई है। इसीलिए इस व्रत को मौन धारण करके समापन करने वाले को मुनि पद की प्राप्ति होती है। इस दिन मौन रहकर यमुना या गंगा में स्नान करने का विशेष महत्व है। इस दिन मौन रहना चाहिए। मुनि शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति हुई है। इसलिए इस व्रत को मौन धारण करके समापन करने वाले को मुनि पद की प्राप्ति होती है। इस दिन मौन रहकर प्रयाग संगम अथवा पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। मौन रहकर  वाणी  को शक्ति  मिलती  है
म।नसिक समस्या हो वहम  की समस्या  हो तो इस दिन मौन रहकर इस समस्या क निदान होत। है ।
ग्रहों की शांति के लिये और उसके निवारण के लिये मौन रहें ।
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माघ माह के स्नान का सबसे अधिक महत्वपूर्ण पर्व अमावस्या ही है। इस माह की अमावस्या और पूर्णिमा दोनों ही तिथियां बहुत पर्व है। इन दिनों में पृथ्वी के किसी न किसी भाग में सूर्य या चंद्र ग्रहण हो सकता है। इसलिए इस दिन स्नानादि करके पुण्य कर्म किया जाता है।

चंद्रमा को मन का स्वामी माना जाता है और अमावस्या को चंद्र के दर्शन नहीं होते, जिसके कारण मन की स्थिति कमजोर होती है। इसीलिए इस दिन मौन व्रत रखकर मन को संयम में रखने का विधान बनाया गया है।

शास्त्रों में कहा गया है की होंठों से ईश्वर का जाप करने से जितना पुण्य मिलता है उससे कई गुना अधिक पुण्य मन में हरी का नाम लेने से मिलता है। क्योंकि इस व्रत को करने वाले को पुरे दिन मौन व्रत का पालन करना होता है इसीलिए यह योग पर आधारित व्रत भी कहलाता है। मौनी अमावस्या के दिन संतों और महात्माओं की तरह चुप रहना उत्तम माना जाता है। अगर चुप नहीं रह सकते को इस दिन मुख से कोई कटु शब्द नहीं निकालने चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु और भगवान् शिव दोनों की ही पूजा का विधान है।

मौनी अमावस्या के दिन व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान, पुण्य तथा जाप करने चाहिए. यदि किसी व्यक्ति की सामर्थ्य त्रिवेणी के संगम अथवा अन्य किसी तीर्थ स्थान पर जाने की नहीं है तब उसे अपने घर में ही प्रात: काल उठकर दैनिक कर्मों से निवृत होकर स्नान आदि करना चाहिए अथवा घर के समीप किसी भी नदी या नहर में स्नान कर सकते हैं. पुराणों के अनुसार इस दिन सभी नदियों का जल गंगाजल के समान हो जाता है. स्नान करते हुए मौन धारण करें और जाप करने तक मौन व्रत का पालन करें |

 

इस दिन व्यक्ति प्रण करें कि वह झूठ, छल-कपट आदि की बातें नहीं करेगें. इस दिन से व्यक्ति को सभी बेकार की बातों से दूर रहकर अपने मन को सबल बनाने की कोशिश करनी चाहिए. इससे मन शांत रहता है और शांत मन शरीर को सबल बनाता है. इसके बाद व्यक्ति को इस दिन ब्रह्मदेव तथा गायत्री का जाप अथवा पाठ करना चाहिए. मंत्रोच्चारण के साथ अथवा श्रद्धा-भक्ति के साथ दान करना चाहिए. दान में गाय, स्वर्ण, छाता, वस्त्र, बिस्तर तथा अन्य उपयोगी वस्तुएं अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करनी चाहिए |

 

शास्त्रों में वर्णित है कि नदी, सरोवर के जल में स्नान कर सूर्य को गायत्री मंत्र उच्चारण करते हुए अर्घ्य देना चाहिए लेकिन जो लोग घर पर स्नान करके अनुष्ठान करना चाहते हैं, उन्हें पानी में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। सोमवती अमावस्या या मौनी अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी परिक्रमा करें। सोमवती अमावस्या के दिन सूर्य नारायण को जल देने से गरीबी और दरिद्रता दूर होती है। जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर है, वह गाय को दही और चावल खिलाएं तो मानसिक शांति प्राप्त होगी। इसके अलावा मंत्र जाप, सिद्धि साधना और दान कर मौन व्रत को धारण करने से पुण्य प्राप्ति और भगवान का आशीर्वाद मिलता है।

 

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मौनी अमावस्या 2018 :-
वर्ष 2018 में मौनी अमावस्या 16 जनवरी 2018 मंगलवार के दिन होगी।

 

मौनी अमावस्या का समय
अमावस्या तिथि = 16 जनवरी 2017, मंगलवार 05:11 बजे प्रारंभ होगी।
अमावस्या तिथि = 17 जनवरी 2017, बुधवार 07:47 बजे समाप्त होगी।

 

कुम्भ मेले के दौरान इलाहबाद के प्रयाग में मौनी अमावस्या का स्नान सबसे महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि इस दिन हिन्दू धर्मवलंभी न केवल मौन व्रत रखते है बल्कि भगवान् पूजा अर्चना भी करते है।
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जानिए इस मोनी अमावस्या पर विशेष क्या करे  —

 

*सुबह शाम स्नान क संकल्प करे
*जल को सिर पर लगाकर स्नान करे
*साफ कपड़े पहने
*सूर्य को  तिल डालकर जल चढ़ाये
*श्री कृष्णा और शिवजी के कोई भी मंत्र का उचारण  करे
*दान करे
*जल और  फल खाकर  व्रत करे ।
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इस मंत्र का करें जाप —

 

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की  अमावस्या के दिन इस मंत्र के जप से विशेष उपलब्धि प्राप्त होगी। साथ ही स्नान दान का पूरा पुण्य भी मिलेगा।

 

यह हैं मंत्र–

 

अयोध्या, मथुरा, माया, काशी कांचीअवन्तिकापुरी, द्वारवती ज्ञेया: सप्तैता मोक्ष दायिका।।
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदा सिंधु कावेरी जलेस्मिनेसंनिधि कुरू।।
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क्या करें उपाय राहु केतु के लिये —

 

-शिवजी के मंदिर ज़रूर जाये
-शिवलिंग पर जल चढ़ाये
-एक रुद्राक्ष की माला अर्पित करे और धूप दीप जलाकर नीचे दिये मंत्र को 108 बार बोले :
और रुद्राक्ष की माला धारण कर ले । ग्रहों की दोषों का भी निवारण होता है । गले मे पहन ले जीवन की परेशानियों से  मुक्ति मिलेगी |
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जानिए इस वर्ष मोनी अमावस्या पर क्या करे दान —

 

-मुक्ति और मोक्ष के लिये – गौ दान करे
-आर्थिक समस्या के लिये -भूमि दान
-ग्रह नक्षत्र  के दोष निवारण के लिये – काले तिल य तिल के लड्डू दान करे
-कर्ज़ा मुक्ति के लिये – पीले धातु का दान / पीतल /पीले वस्तुओं  क दान
-पारिवारिक  समस्या के निदान – देशी घी का दान
-बाधा  मुक्ति – नमक  का दान
-संतान से जुड़ी कोई समस्या – चाँदी का दान
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जानिए क्या करें इस वर्ष मोनी अमावस्या पर–

 

कम बोले और मौन रहें |
ॐ नम :शिवाय क जाप करे
मृत्युंजय मंत्र का जाप करे
गायत्री मंत्र का जाप करे
पूजा करने से पहले अन्न जल न ग्रहण करे
गाय  कुत्ते और कौवे  को भोजन दे
ब्रह्मण को भोजन कराये
कुष्ठ  रोगियों को भोजन कराये
हो सके घर मे हवन करे इससे पितृ  दोष का निवारण होता है ।
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मोनी अमवस्या के दिन व्रत का है बड़ा महत्व —-

 

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की  इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्त्र गोदान का फल मिलता है। शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गयी है। अश्वत्थ यानि पीपल वृक्ष। इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा और वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेटकर परिक्रमा करने का विधान होता है। धान, पान और खड़ी हल्दी को मिला कर उसे विधानपूर्वक तुलसी के पेड़ को चढ़ाया जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी खास महत्व समझा जाता है। कहा जाता है कि महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ्य और सभी दुखों से मुक्त होगा। ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों कि आत्माओं को शांति मिलती है।
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जानिए मौनी अमावस्या को किए जाने वाले ज्योतिषीय और तांत्रिक उपाय को—

 

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष के अंत में  अमावस्या तिथि आती है। इस प्रकार एक वर्ष में 12 अमावस्या आती है, लेकिन इन सभी में माघ मास में आने वाली अमावस्या बहुत ही विशेष मानी गई है। इसे मौनी व मानी अमावस्या कहा जाता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की  इस अमावस्या पर स्नान, दान, श्राद्ध व व्रत का विशेष महत्व हमारे धर्म ग्रंथों में लिखा है। तंत्र शास्त्र में भी मौनी अमावस्या को विशेष तिथि माना गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए उपाय विशेष ही शुभ फल प्रदान करते हैं। ये उपाय बहुत ही आसान हैं। जानिए मौनी अमावस्या के दिन आप कौन-कौन से उपाय कर सकते हैं-

 

1- हिंदू धर्म में अमावस्या को पितरों की तिथि माना गया है। इसलिए इस दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए गाय के गोबर से बने उपले (कंडे) पर शुद्ध घी व गुड़ मिलाकर धूप (सुलगते हुए कंडे पर रखना) देनी चाहिए। यदि घी व गुड़ उपलब्ध न हो तो खीर से भी धूप दे सकते हैं।

 

यदि यह भी संभव न हो तो घर में जो भी ताजा भोजन बना हो, उससे भी धूप देने से पितर प्रसन्न हो जाते हैं। धूप देने के बाद हथेली में पानी लें व अंगूठे के माध्यम से उसे धरती पर छोड़ दें। ऐसा करने से पितरों को तृप्ति का अनुभव होता है।

 

2- मौनी अमावस्या के दिन भूखे प्राणियों को भोजन कराने का भी विशेष महत्व है। इस दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं। गोलियां बनाते समय भगवान का नाम लेते रहें। इसके बाद समीप स्थित किसी तालाब या नदी में जाकर यह आटे की गोलियां मछलियों को खिला दें। इस उपाय से आपके जीवन की अनेक परेशानियों का अंत हो सकता है।

 

अमावस्या के दिन चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से आपके पाप कर्मों का क्षय होगा और पुण्य कर्म उदय होंगे। यही पुण्य कर्म आपकी मनोकामना पूर्ति में सहायक होंगे।

 

3- मौनी अमावस्या को शाम के समय घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। बत्ती में रुई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें। साथ ही दीएं में थोड़ी सी केसर भी डाल दें। यह मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का उपाय है।

 

4- मौनी अमावस्या व मंगलवार के शुभ योग में किसी भी हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। संभव हो तो हनुमानजी को चमेली के तेल से चोला भी चढ़ा सकते हैं। ये उपाय करने से साधक की समस्त मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

 

5- मौनी अमावस्या की रात को करीब 10 बजे नहाकर साफ पीले रंग के कपड़े पहन लें। इसके उत्तर दिशा की ओर मुख करके ऊन या कुश के आसन पर बैठ जाएं। अब अपने सामने पटिए (बाजोट या चौकी) पर एक थाली में केसर का स्वस्तिक या ऊं बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र स्थापित करें। इसके बाद उसके सामने एक दिव्य शंख थाली में स्थापित करें।

 

अब थोड़े से चावल को केसर में रंगकर दिव्य शंख में डालें। घी का दीपक जलाकर नीचे लिखे मंत्र का कमलगट्टे की माला से ग्यारह माला जाप करें-

 

मंत्र- सिद्धि बुद्धि प्रदे देवि मुक्ति भुक्ति प्रदायिनी।
मंत्र पुते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।।

 

मंत्र जाप के बाद इस पूरी पूजन सामग्री को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। इस प्रयोग से आपको धन लाभ होने की संभावना बन सकती है।
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मौनी अमावस्या पर कालसर्प दोष निवारण हेतु उपाय-

 

1- मौनी अमावस्या पर सुबह स्नान आदि करने के बाद चांदी से निर्मित नाग-नागिन की पूजा करें और सफेद पुष्प के साथ इसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। कालसर्प दोष से राहत पाने का ये अचूक उपाय है।

 

2- कालसर्प दोष निवारण के लिए मौनी अमावस्या के दिन लघु रुद्र का पाठ स्वयं करें या किसी योग्य पंडित से करवाएं। ये पाठ विधि-विधान पूर्वक होना चाहिए।

 

3- मौनी अमावस्या पर गरीबों को अपनी शक्ति के अनुसार दान करें व नवनाग स्तोत्र का पाठ करें।

 

4- मौनी अमावस्या पर सुबह नहाने के बाद समीप स्थित शिव मंदिर जाएं और शिवलिंग पर तांबे का नाग चढ़ाएं। इसके बाद वहां बैठकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और शिवजी से कालसर्प दोष मुक्ति के लिए प्रार्थना करें।

 

5- मौनी अमावस्या पर सफेद फूल, बताशे, कच्चा दूध, सफेद कपड़ा, चावल व सफेद मिठाई बहते हुए जल में प्रवाहित करें और कालसर्प दोष की शांति के लिए शेषनाग से प्रार्थना करें।

 

6- मौनी अमावस्या पर शाम को पीपल के वृक्ष की पूजा करें तथा पीपल के नीचे दीपक जलाएं।

 

7- मौनी अमावस्या पर कालसर्प यंत्र की स्थापना करें, इसकी विधि इस प्रकार है-

 

आज सुबह नित्य कर्मों से निवृत्त होकर भगवान शंकर का ध्यान करें और फिर कालसर्प दोष यंत्र का भी पूजन करें। सबसे पहले दूध से कालसर्प दोष यंत्र को स्नान करवाएं, इसके बाद गंगाजल से स्नान करवाएं। तत्पश्चात गंध, सफेद पुष्प, धूप, दीप से पूजन करें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का रुद्राक्ष की माला से जप करें। कम से कम एक माला जाप अवश्य करें।

 

मंत्र- अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शंखपाल धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात:काले विशेषत:।।
तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्।।

 

इस प्रकार प्रतिदिन कालसर्प यंत्र की पूजा करने तथा मंत्र का जाप करने से शीघ्र ही कालसर्प दोष का प्रभाव होने लगता है और शुभ परिणाम मिलने लगते हैं।

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