जानिए घर में नई बहू के आने से क्यों आने लगती है पारिवारिक रिश्तों में दरार —

 सही है की कई बार हमें ऐसा देखने और सुनने में आता है, कि किसी परिवार में नई बहू के गृह-प्रवेश के बाद से ही घर में अचानक खूब तरक्की होने लगी या अचानक ही घर के हालात बिगड़ने लगे। ऐसे बदले हालात की स्थिति में उस घर में हो रहे अच्छे या बुरे का भागी नई बहू को माना जाने लगता है। जब किसी घर में लड़के की शादी होने वाली होती है तो नव दम्पत्ति के लिए घर में सुविधा बढ़ाने के लिए और उनकी नीजता को ध्यान में रखते हुए घर में बेडरुम, टाॅयलेट-बाथरुम इत्यादि का निर्माण किया जाता है।

घर में हुए इस नव निर्माण के कारण घर के वास्तु में भी परिवर्तन हो जाता है। कई बार यह नव-निर्माण वास्तुनुकूल हो जाता है तो कई बार यह नव-निर्माण वास्तु विपरीत हो जाता है। वास्तुनुकूल निर्माण होने पर निश्चित ही घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है, जबकि वास्तु विपरीत निर्माण होने पर घर में विभिन्न प्रकार की समस्याएं होने लगती हैं। अज्ञानतावश घर वाले घर में हुए वास्तु परिवर्तन से मिलने वाले अच्छे या बुरे परिणामों का कारण नई बहू को मानने लगते हैं।

पुराणी कहावत है जहां चार बर्तन होंगे वह आपस में टकराएंगे ही लेकिन सुखी संपन्न घर में कई बार बहू आने से गृह क्लेश होने लगते हैं। क्या आप जानते हैं इसका कारण घर में उत्पन्न हुआ वास्तुदोष भी हो सकता है। घर में नई बहू के आने की खुशी में घर में तोड़-फोड़ करके उसे नया रूप दिया जाता है। जिससे वास्तु अनुसार न करके अपनी सहुलियत के अनुसार कर लिया जाता है। आईए जानें कैसे गृह क्लेश को रोक कर परिवार में प्रेम और अपनापन लाया जा सकता है?

परिवार के सदस्यों में प्रेम बढ़ाने के लिए अपनाएं ये वास्तु टिप्स —

कमरों की दिशा —
पश्चिमी या दक्षिण दिशा डॉमिनेटिंग होने के कारण यहां घर के बड़ों को ही रहना चाहिए। सास-ससुर का कमरा इस दिशा में होना चाहिए, तो आपसी प्रेम बना रहेगा।

किचन की दिशा —
रसोई घर उत्तर-पूर्व में होगा तो सास-बहू के आपसी क्लेश, मनमुटाव और हमेशा स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं रहेंगी।

गहरे पेंट न करें —
घर में खासकर रसोई में डार्क कलर न करावएं, जैसे नीला कलर। इससे मनमुटाव बढ़ता है। कमरों में लाल रंग न करवाएं। घर की दीवारों पर मल्टी कलर न करवाएं। खासकर रेड कलर को कम से कम इस्तेमाल में लाएं।

फैमिली फोटो लगाएं —
परिवार के आपसी रिश्तों को अच्छा बनाने के लिए पूरे परिवार की फोटो लाल रंग के फ्रेम में लगाएं।

यदि पति-पत्नी के बीच थोड़ा भी मन-मुटाव हो तो उसे मिटाने का तुरंत प्रयत्न करना चाहिए। यदि ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाववश दाम्पत्य जीवन में आई खटास बाहरी कोशिशों के बाद भी दूर नहीं हो पाती तो उसके लिए यह उपाय करना काफी लाभप्रद रहता है।

पति-पत्नी को इसके लिए शीघ्र पहल करनी चाहिए। शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार को पत्नी अशोक वृक्ष की जड़ के पास घी का दीपक और चंदन का धूप जलाने के बाद श्रद्धापूर्वक प्रसाद चढ़ा कर प्रणाम करें। फिर पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें और उस समय कामना करें कि मेरे दाम्पत्प जीवन में जिस किसी भी वजह से दरार पड़ी है वह समाप्त हो जाए। फिर वृक्ष से सात पत्ते तोड़ कर घर लाएं और श्रद्धा से उनकी पूजा करें व घर के पूजा स्थल पर रख दें। अगले सोमवार को फिर से अशोक वृक्ष की पूजा की वही प्रक्रिया दोहराएं तथा पहले के सूखे पत्तों को बहते जल में प्रवाहित कर दिया करें। जब तक आपसी मन-मुटाव समाप्त न हो तब तक पूजा की प्रक्रिया जारी रखें।

यदि हमेशा पति-पत्नी के आपस में विरोध रहता हो, बेवजह टकराव होती हो तो किसी भी सोमवार के दिन शुभ मुहूत्र्त में अपने सोने वाले पंलग के चारों कोनों पर चांदी की कील गाड़ दें। परेशानियों से छुटकारा मिल जाएगा।

यदि जन्म कुण्डली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, द्वादश स्थान स्थित मंगल होने से जातक को मंगली योग होता है इस योग के होने से जातक के विवाहोपरान्त पति-पत्नी में कलह, पति या पत्नी के स्वास्थ्य में क्षीणता, तलाक एवं क्रूर मंगली होने पर जीवन साथी की मृत्यु तक हो सकती है। अतः जातक मंगल व्रत। मंगल मंत्र का जप, घट विवाह आदि करें। राहु या केतु होने से विवाहोपरान्त कलह होता है।

यदि राहु के सप्तम स्थान में हो, तो राहु मन्त्र “ॐ रां राहवे नमः” का ७२००० जप तथा दूर्वा, घृत, मधु व मिश्री से दशांश हवन करवा दें। केतु स्थित हो, तो केतु मन्त्र “ॐ कें केतवे नमः” का २८००० जप तथा कुश, घृत, मधु व मिश्री से दशांश हवन करवा दें। सप्तम भावगत सूर्य स्थित होने से पति-पत्नी में अलगाव एवं तलाक पैदा करता है। अतः जातक आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ रविवार से प्रारम्भ करके प्रत्येक दिन करे तथा रविवार कप नमक रहित भोजन करें। सूर्य को प्रतिदिन जल में लाल चन्दन, लाल फूल, अक्षत मिलाकर तीन बार अर्ध्य दें।

यदि

मेष लग्न- मेष राशि के जातकों का दाम्पत्य सुख का कारक शुक्र ग्रह होता है। ये लोग दाम्पत्य सुख के लिए गाय व पक्षियों को चावल खिलाएं।
वृष लग्न- वृष लग्न के जातकों का दाम्पत्य सुख का कारक मंगल ग्रह होता है।
वृष लग्न के जातक लाल वस्त्र में सौंफ बांधकर अपने शयनकक्ष में रखें।
मिथुन लग्न- मिथुन लग्न में दाम्पत्य सुख का कारक गुरु ग्रह होता है। दांपत्य सुख के लिए इस राशि के जातक गुरुवार को व्रत रखकर एक समय भोजन करें।
कर्क लग्न- कर्क लग्न में दाम्पत्य सुख का कारक शनि ग्रह होता है। अधिकांश मामलों में इस राशि के जातकों का दाम्पत्य जीवन बहुत सुखी नहीं कहा जा सकता। शनिवार व मंगलवार की संध्या को दंपत्ति हनुमान मंदिर में दर्शन करने जाएं।
सिंह लग्न- सिंह लग्न में दाम्पत्य सुख का कारक शनि ग्रह होता है। शनिपुष्य योग में नाव की कील का छल्ला बनवाकर मध्यमा उंगली में पहनें।
कन्या लग्न- कन्या लग्न के दाम्पत्य सुख का कारक बृहस्पति ग्रह होता है।इस लग्न के जातक भगवान लक्ष्मीनारायण की आराधना करें।
तुला लग्न- तुला लग्न के दाम्पत्य सुख का कारक मंगल ग्रह होता है। इस लग्न के जातक मंगलवार का व्रत रखें और एक वक्त मीठा भोजन करें।
वृश्चिक लग्न- वृश्चिक लग्न के दाम्पत्य सुख का कारक शुक्र ग्रह होता है। दाम्पत्य सुख प्राप्ति के लिए मछलियों को मिश्रीयुक्त उबले चावल खिलाएं।
धनु लग्न- धनु लग्न के जातकों के दाम्पत्य सुख का कारक बुध ग्रह होता है। दाम्पत्य सुख के लिए जातकों को भगवान गणपति की आराधना करनी चाहिए।
मकर लग्न- मकर लग्न के दाम्पत्य सुख का कारक चंद्रमा होता है। इन जातकों को गौरीशंकर रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।चांदी का बना चंद्रमा यंत्र गंगा जल से पवित्र कर पूजा घर में रखें। हर पूर्णिमा पर गंगा जल से यंत्र को स्नान कराएं।
कुंभ लग्न- कुंभ लग्न का दाम्पत्य सुख का कारक सूर्य है। ऐसे जातक को प्रतिदिन सूर्य भगवान को तांबे के पात्र में जल चढ़ाना चाहिए।
मीन लग्न- मीन लग्न के दाम्पत्य सुख का कारक बुध ग्रह होता है। इन जातकों को भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।
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पति पत्नी के रिश्ते में मधुरता लाने का मंत्र, विधेहि देवी कल्याणं विधेहि परमां श्रियम | रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ||

नवमी के दिन स्वेतार्क यानि सफ़ेद मदार का पौधा लाकर घर में लगायें |

सफ़ेद मदार के पौधे की पूजा से आपको जरुर लाभ होगा | पति पत्नी के बीच प्यार बढ़ेगा |

दो जमुनिया रत्न लेकर उन्हें गंगाजल में डूबा दें , हर शनिवार को इस गंगा जल को घर में छिड़काव करें , प्रेम सम्बन्ध मधुर होंगे,|

आपसी प्रेम और हार्मोनी के लिये उपाय करें ,पति पत्नी रात को सोते समय कपूर और लाल सिंदूर तकिये के नीचे रखकर सोयें ,कपूर को सुबह जला दें और सिंदूर को पूरे घर में छिड़क दें , आपसी प्रेम बढ़ेगा |

नए सूती लाल कपड़े में जटावाला नारियल बांधकर बहते जल में प्रवाहित करने से भी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इन प्रयोगों को करने से आपकी सभी मनोकामनाएं शीघ्र ही पूरी हो जाएंगी।

सामान्यत: घर में बांस की हुई बांसुरी ही रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार इस बांसूरी से घर के वातावरण में मौजूद समस्त नेगेटिव एनर्जी समाप्त हो जाती है और सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय हो जाती है। परिवार के सदस्यों के विचार सकारात्मक होते हैं जिससे उन्हें सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

राम स्तोत्र राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्त्र नाम तत्तुन्यं राम नाम वरानने।। जप विधि – सुबह जल्दी उठकर नहाकर साफ वस्त्र पहनकर प्रभु श्रीराम का पूजन करें।
– भगवान राम की मूर्ति के सामने आसन लगाकर रुद्राक्ष की माला लेकर इस स्त्रोत का जप करें। प्रतिदिन पांच माला जप करने से उत्तम फल मिलता है।
– आसन कुश का हो तो अच्छा रहता है।

अखण्ड सौभाग्य और दाम्पत्य प्रेम बढ़ाने का उपाय सरल है | घर की मालकिन तुलसी का पौधा लाकर, अपने हाथ से सवा दो हाँथ ऊंचाई पर लगायें | इस तुलसी के पौधे के नीचे कृष्णपक्ष की अष्टमी से चतुर्दशी तक दीपक जरुर जलायें | तुलसी जी को सिन्दूर चढायें | नित्य जल दें |

सुबह स्नान के बाद घर के आंगन या देवालय में लगे तुलसी के पौधे की गंध, फूल, लाल वस्त्र अर्पित कर पूजा करें। फल का भोग लगाएं। धूप व दीप जलाकर उसके नजदीक बैठकर तुलसी की ही माला से तुलसी गायत्री मंत्र का श्रद्धा से सुख की कामना से कम से कम 108 बार स्मरण अंत में तुलसी की पूजा करें-ॐ श्री तुलस्यै विद्महे। विष्णु प्रियायै धीमहि। तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।।विष्णु का ध्यान कर तुलसी मंत्र बोलें –

नमस्तुलसि कल्याणि नमो विष्णुप्रिये शुभे। नमो मोक्षप्रदे देवि नम: सम्पत्प्रदायिके।।
लक्ष्मी का ध्यान कर यह मंत्र बोलें – श्रीश्चते लक्ष्मीश्चपत्न्यावहोरात्रे पारश्वे नक्षत्राणिरूप मश्विनौव्यात्तम्। इष्णनिषाणामुम्म इषाण सर्वलोकम्म इषाण।

दक्षिण-पश्चिम खंड में हमेशा पृथ्वी या अग्नि से जुड़े रंगों का ही प्रयोग करें। पर्दे, कुशन, खिड़कियों आदि में इनका उपयोग ठीक रहता है। लाल रंग रोमांस को दर्शाता है। अगर इसका प्रयोग ज्यादा गहरा लगे तो गुलाबी रंग करवा लें।प्रेम को बढ़ाने के लिए घर के दक्षिण-पश्चिम भाग में कांच या सिरामिक पॉट में छोटे-छोटे पत्थर या क्रिस्टल्स डालकर लाल रंग की दो मोमबत्तियां जलाएं। इससे सकारात्मक ऊर्जा फैलेगी और आपकी जोड़ी सलामत रहेगी।

– दांपत्य रिश्तों की अधिक प्रगाढ़ता के लिए अपने पलंग के नीचे जिस ओर आप अपने पैर रखते हैं, उसके नीचे पवित्र क्रिस्टल बॉल या तराशा हुआ क्रिस्टल रखें।
– घर के दक्षिण-पश्चिम में अगर क्रिस्टल ग्लास के बने झाडफ़ानूस का इस्तेमाल करना चाहिए। इसमें लाल बल्ब लगाएं।
– प्यार बढ़ाने के लिए सिरामिक की बनी विंड चाइम्स का प्रयोग करें।

बेडरूम सजाकर रखें, यहां कबाड़ न जमा होने दें। ध्यान रखें की यहां साइड टेबल पर कोई भी वस्तु धूल भरी, बेतरतीब और बिखरी हुई न हो।

– लवबर्ड, मैंडरेन डक जैसे पक्षी प्रेम के प्रतीक हैं इनकी छोटी मूर्तियों का जोड़ा अपने बेडरूम में रखें।

बेडरूम में दक्षिण-पश्चिम दिशा में दिल की आकृति का रोज क्वाट्र्ज रखें।पति-पत्नी के प्रतीक के रूप में बेडरूम में दो सुंदर सजावटी गमले रखें। बेडरूम में पलंग का सिरहाना दक्षिण दिशा में रखें और सोते समय सिर दक्षिण दिशा में व पैर उत्तर दिशा में रखें। यदि ऐसा संभव न हो तो पश्चिम दिशा में सिरहाना व सिर कर सकते हैं।

महामृत्युंजय मंत्र द्वारा द्रोणपुष्प और कनेर का हवन करने से उत्तम वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है।

मंगलीक दोष होने पर अनजाने में विवाह होने के पश्चात मंगलीक दोष को कम करने के लिए, शुभ मुहूर्त में नव ग्रह यंत्र को स्थापित कर के, श्री मंगल चंद्रिका स्तोत्र का पाठ करने से मंगल शुभ प्रभाव देता है। इसके अतिरिक्त अंगारक स्तोत्र एवं मंगल कवच का पाठ करने से भी शुभ फल प्राप्त होता है।

हिंदू धर्म ग्रंथों में ऐसे कई उपाय बताए गए हैं जिनहे करने से इंसान सुख प्राप्त कर सकता है। नीचे लिखी श्रीरामचरितमानस की चौपाई का जप करने से मनुष्य को सुख की प्राप्ति हो सकती है। इस चौपाई का जप विधि-विधान से करें। चौपाई सुनहि विमुक्त बिरत अरू विषई। लहहि भगति गति संपत्ति नई।।

जप विधि – प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कामों से निपटकर भगवान श्रीराम की पूजा करें।इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके तुलसी की माला से इस चौपाई का सच्चे मन से जप करें।कुछ ही दिनों में इस चौपाई का प्रभाव दिखने लगेगा और आपके जीवन में सुख-शांति का वास होगा।

प्रात: शिवलिंग या शिव की मूर्ति पर पवित्र जल स्नान कराकर चंदन, अक्षत व बिल्वपत्र अर्पित करें। धूप व दीप लगाकर नीचे लिखें शिव मंत्र का ध्यान करें –

शान्ताकारं शिखरशयनं नीलकण्ठं सुरेशं। विश्वाधारं स्फटिकसदृशं शुभ्रवर्णं शुभाङ्गम्।। गौरीकान्तं त्रितयनयनं योगिभिध्र्यानगम्यं। वन्दे शम्भुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।

गुरुवार के दिन गुरु बृहस्पति की पूजा गंध, पुष्प, अक्षत, धूप दीप से कर यथाशक्ति इन वस्तुओं का या इनमें से किसी भी एक का दान करें – – पीले चावल – चने की दाल – पीला कपडा – पीले फल जैसे आम, केले – कांस्य पात्र – हल्दी – लवण – पुखराज – घी – घोडा – शहद – शक्कर * सायंकाल के वक्त यह मंत्र बोल घर के देवालय या पवित्र स्थान पर अक्षत यानी पूरे चावल पर रख माता लक्ष्मी या देव स्मरण कर दीपक प्रज्वलित करें –

दीपो ज्योति: परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन:। दीपो हरतु मे पापं सांध्यदीप नमोस्तुते।।शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखसम्पदम्। शत्रुबुद्धिविनाशाय च दीपज्योतिर्नमोस्तु ते।।* चौपाई हरन कठिन कलि कलुष कलेसू। महामोह निसि दलन दिनेसू।।

जप विधि – प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कामों से निपटकर भगवान श्रीराम की पूजा करें। – इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके तुलसी की माला से इस चौपाई का सच्चे मन से जप करें।

– प्रतिदिन कम से कम 5 माला जप अवश्य करें। – कुछ ही दिनों में इस चौपाई का प्रभाव दिखने लगेगा और आपके परिवार में सुख-शांति का वास होगा।

– अपने बेडरूम में हनीमून के क्षणों का फोटो लगाने से वैवाहिक संबंधों में आश्चर्यजनक रूप से सुधार आता है। दीवारों पर नीला आसमानी रंग और गुलाबी रंग सजाएं।

– अगर पति-पत्नी का मूड आपस में मेच नहीं होता या प्रेम के बीच विवाद होने लगते हों तो कमरे में नाचते हुए मोर की तस्वीर लगाएं। अगर आप चाहते हैं कि आपके साथ जीवनसाथी का मूड बना रहे तो, कबूतर के जोड़े का चित्र कमरे में लगाएं।

सुख-समृद्धि व मन की प्रसन्नता के लिए बैठक कक्ष में फूलों का गुलदस्ता रखें। शयनकक्ष में खिड़की के पास भी गुलदस्ता रखना चाहिए। घर में कभी भी कंटीली झाडिय़ां या पौधे न रखें। इन्हें लगाने से समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे पुष्प या पौधे को सजावट में न ले जिससे दूध झरता हो। शुभता की दृष्टि से ये अशुभ होते हैं।

शयनकक्ष में झूठे बर्तन नहीं रखना चाहिए। आलस्य के कारण ऐसा करने पर रोग व दरिद्रता आती है। रात में बुरे सपने आते हों तो जल से भरा तांबे का बर्तन सिरहाने रखकर सोएं।

यदि गृहस्थ जीवन में समस्याएं हों तो कमरे में शुद्ध घी का दीपक प्रतिदिन जलाना चाहिए। पवित्र स्थान या पूजा स्थल ईशान कोण(पूर्व-उत्तर) में ही बनवाएं। इससे घर में खुशहाली आएगी।

टी.वी. या अन्य अग्नि संबंधी उपकरण सदैव आग्नेय कोण में रखें। शयन कक्ष में नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करें। ऐसा करने से घर में क्लेश होता है।

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