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    फन फैलाता अलकायदा

    jawahiriअरविंद जयतिलक

    दुनिया के खूंखार आतंकी संगठन अलकायदा के सरगना अल जवाहिरी के ताजा विडियो में भारतीय उपमहाद्वीप में कायदात अल जिहाद बनाने, जिहाद का परचम लहराने और इस्लामिक शरीयत की बदौलत खलीफा राज लागू करने का एलान बेहद चिंताजनक है। अभी तक वैश्विक बिरादरी इराक और सीरिया के इलाकों में कहर मचा रहे इस्लामिक स्टेट यानी आइएस के कत्लेआम से ही चिंतित और विचलित थी किंतु अब अलकायदा भी मानवता को लहूलुहान करने का एलान कर वैश्विक बिरादरी विशेष रुप से दक्षिण एशिया की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल इस वीडियो की सच्चाई को लेकर रहस्य और भ्रम बरकरार है लेकिन अगर वीडियो सही है तो निःसंदेह अलकायदा के इस एलान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इसलिए और भी कि भारत पहले से ही आतंकवाद से त्रस्त है। अच्छी बात है कि अल जवाहिरी के एलान के बाद मोदी सरकार ने कायदात अल जिहाद नाम से खोली गयी शाखा की प्रमाणिकता को जांचने में जुट गयी है। माना जा रहा है कि अलकायदा का भारत को निशाने पर लेने की मुहिम के पीछे आतंकी गिरोहों के बीच वर्चस्व की लड़ाई है। ऐसा माना जाना गलत भी नहीं है। इसलिए कि इस्लामिक स्टेट का सरगना अल बगदादी ने खुद को दुनिया भर के मुसलमानों का खलीफा घोषित कर अन्य आतंकी संगठनों को नेपथ्य में डाल दिया है और अलकायदा को भी अपना संगठन कमजोर पड़ता दिखने लगा है। सो वह इस वीडियो के सहारे जिहाद में विश्वास रखने वाले आतंकियों को अपनी मुहिम में शामिल कर अपनी ताकत को बढ़ाना चाहता है। दरअसल अलकायदा अच्छी तरह समझ रहा है कि पश्चिम एशिया में इस्लामिक स्टेट की मौजूदगी में न तो वह फंड जुटा सकता है और न ही जिहादी मुस्लिम युवाओं को अपनी ओर आकर्शित कर सकता है। लिहाजा उसकी मंशा अब खुद को भारतीय उपमहाद्वीप के इर्द-गिर्द केंद्रित कर इस्लामिक स्टेट को पांव जमाने देना नहीं है। चूंकि पिछले दिनों महाराष्ट्र और तमिलनाडु के कई मुस्लिम युवाओं का इस्लामिक स्टेट आतंकी गिरोह में शामिल होने की खबरें आयी और जम्मू-कश्मीर में भी मुस्लिम युवाओं को इस्लामिक स्टेट का झंडा लहराते देखा गया ऐसे में अलकायदा को लग रहा है कि अगर वह दक्षिण एशिया विशेष रुप से भारत में अपनी ताकत का विस्तार नहीं किया तो जिहादी मुस्लिम युवा इस्लामिक स्टेट आतंकी संगठन का हिस्सा बन सकते हैं। यह भी किसी से छिपा नहीं है कि पाकिस्तान के कबायली इलाकों में अमेरिकी ड्रोन हमलों की मार से अलकायदा लहूलुहान है और पिछले कई वर्षों से उसे न सिर्फ लड़ाकों की कमी से जूझना पड़ रहा है बल्कि बम और गोला-बारुद की किल्लत भी झेल रहा है। यह तथ्य है कि इस्लामिक स्टेट द्वारा फंड जुटाने के लिए अलकायदा के सभी स्रोतों पर कब्जा कर लिया गया है और इराक और सीरिया के कई बड़े क्षेत्रों पर कब्जा कर लेने से उसकी आर्थिक स्थिती मजबूत हुई है। दूसरी ओर अलकायदा की आर्थिक स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अब अलकायदा को सऊदी अरब से मिलने वाला 90 फीसद फंड बंद हो चुका है। अभी तक अलकायदा का प्लान था कि 2014 के अंत तक जब नाटो फौज अफगानिस्तान से विदा हो जाएगी तो वह खुद को प्रासंगिक बना लेगा। लेकिन इस्लामिक स्टेट के बढ़ते दबदबा ने उसके गेम प्लान को खराब कर दिया है। अब उसे डर सताने लगा है कि अफगानिस्तान से नाटो फौज के जाने से पहले वह अपनी ताकत का विस्तार नहीं किया तो यहां भी इस्लामिक स्टेट को अपना परचम लहराते देर नहीं लगेगी। वैसे भी पाकिस्तान के कबायली इलाकों में नाटो फौज ने उसकी कमर तोड़ दी है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के जिहादी युवाओं में अब अलकायदा को लेकर वह आकर्षण नहीं है जैसे ओसामा बिन लादेन को लेकर था। अब इन दोनों मुल्कों के जिहादी युवाओं में इस्लामिक स्टेट को लेकर न सिर्फ आकर्षण बढ़ रहा है बल्कि उन्हें लग भी रहा है कि वह इस्लामिक स्टेट के मार्फत जम्मू-कश्मीर में अपनी हुकुमत स्थापित कर सकते हैं। गौर करना होगा कि जम्मू-कश्मीर में पहले से ही कई आतंकी संगठन सक्रिय हैं जिनकी फंडिग पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ द्वारा किया जाता है। अगर कहीं अलकायदा जम्मू-कश्मीर में पैर पसारने की मुहिम में कामयाब हुआ तो भारत की मुश्किलें बढ़ते देर नहीं लगेगी। वैसे भी साल के अंत में जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का चुनाव होने वाला है। संभव है कि अलकायदा जम्मू-कश्मीर के आतंकी संगठनों को अपने पाले में लाने के लिए जिहाद का एलान किया हो। फिलहाल अलकायदा का भारत में इस्लामिक शरीयद लागू करने का एलान भले ही चाहे इस्लामिक स्टेट से प्रतिद्वंदिता का नतीजा हो लेकिन अलकायदा को हल्के में नहीं लिया जा सकता। 11 सितंबर 2001 को अमेरिका के न्यूयार्क शहर में हुए आतंकी हमले को दुनिया कभी भूल नहीं सकती। इस हमले में तकरीबन 3000 से अधिक लोग मारे गए और तकरीबन 10 बिलियन डाॅलर से अधिक संपत्ति का नुकसान हुआ। इसके अलावा अलकायदा ने छिटपुट ही सही पर कई बार यूरोप की धरती को लहूलुहान किया। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों का यह ताकीद किया जाना कि अलकायदा 9/11 जैसे हमलों को अंजाम देकर खुद को इस्लामिक स्टेट से अधिक ताकतवर साबित करने की कोशिश कर सकता है इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। बेहतर होगा कि भारत सरकार अलकायदा को सबक सिखाने के लिए धारदार रणनीति तैयार करे और पड़ोसी देशों से मदद ले। गौर करना होगा कि अल जवाहिरी ने भारत के अलावा जिन देशों में मोर्चा खोलने की धमकी दी है उसमें बांग्लादेश और म्यांमार का भी नाम है। यह किसी से छिपा नहीं है कि पड़ोसी देश बांग्लादेश में कई ऐसे आतंकी संगठन हैं जो भारत में इस्लामिक शासन के हिमायती हैं। इन आतंकी संगठनों में हूजी, जमातुल मुजाहिदीन बांग्लादेश, द जाग्रत मुस्लिम जनता बांग्लादेश व इस्लामिक छात्र शिविर यानी आइसीएस बेहद खतरनाक हैं। भारत में सक्रिय हूजी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के सहयोग से कई आतंकी घटनाओं को अंजाम देने में कामयाब रहा है। बांग्लादेश के अलावा म्यांमार में भी कई आतंकी संगठन हैं जिनका मकसद भारत में अस्थिरता पैदा करना है। उल्लेखनीय है कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों और बौद्धों के बीच कईयों बार हिंसा हो चुकी है। बहुतायत संख्या में रोहिंग्या मुसलमान भारत में शरण लिए हुए हैं। इनमें हूजी के समर्थक भी हैं। ये बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों में पसरे हुए हैं। याद रखना होगा कि अगस्त 2012 में रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में देश में कई स्थानों पर हिंसक विरोध प्रदर्शन हुआ था जिसमें कई लोगों की जानें गयी थी। असम में हुए दंगों के खिलाफ मुंबई समेत देश के अन्य स्थानों पर हुए प्रदर्षनों में रोहिंग्या मुसलमानों के साथ हो रही ज्यादती के नाम पर खूब अराजकता फैलायी गयी। गौरतलब है कि इन प्रदर्शनों में जेहादी तत्वों की भूमिका स्पष्ट रुप से उजागर हुई। गौर करें तो अल जवाहिरी का भारत में खलीफा शासन लागू करने का एलान का मकसद इन्हीं जेहादी तत्वों को अपनी ओर आकर्षित करना है। अल जवाहिरी का विडियो सामने आने के बाद भारत सरकार को सतर्क रहना होगा। देश में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चैबंद करनी होगी।

    अरविंद जयतिलक
    अरविंद जयतिलकhttps://www.pravakta.com/author/arvindjaiteelak
    लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं और देश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में समसामयिक मुद्दों पर इनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं।

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