Home साहित्‍य कविता बिन ताले के अपने आप को बन्द किए हुए है

बिन ताले के अपने आप को बन्द किए हुए है

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घर मे अपने आप को बंद किए हुए है |

बिन ताले के अपने को बंद किए हुए है ||

लगता नहीं दिल अपने घर मे |

मन मे अनेकों द्व्न्द उठे हुए है ||

खालीपन मे कविता बाजी करते करते |

जो रस अलंकार और छ्ंद लिए हुए है ||

नर्स डॉक्टर घर से बनवास हुए है |

फल फूल कन्द से उपवास हुए है ||

जो नेता राजनीति मे सक्रिय हुए है |

कितने घोटालो मे वे बंद हुए है ||

जो नेता करते थे खाली बयानबाजी |

अब उनके मुह क्यो बंद हुए है ||

कब खुलेगा ये लोक डाउन भैया ?

ये सबके मन मे प्रश्न उठे हुये है ||

पड़ रहे रोजी रोटी के लाले |

क्योकि सारे उधोग बंद हुए है ||

भेज रहा है चाइना रद्दी माल |

इससे उसके व्यापार बंद हुए है ||

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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