लेखक परिचय

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

वैभवपूर्ण जीवन को भारतमाता के श्रीचरणों की सेवा में समर्पित करने वाले ख्‍यातलब्‍ध कैंसर सर्जन तथा विश्‍व हिंदू परिषद के अंतरराष्‍ट्रीय महामंत्री।

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-डॉ. प्रवीण तोगड़िया

गत कुछ वर्षों से भारत पर, भारत के तीर्थस्थानों पर इस्लामी आक्रामणकारियों द्वारा किये विकृत आक्रमणों का इतिहास दोहराने का घिनौना षड्यंत्र चल रहा है। वैसे तो भारत से इस्लामी आक्रमणकारियों की सत्ता भले चली गयी हो, लेकिन उनके पीछे छोड़े गए ‘मिनी बाबर’, ‘मिनी औरंगजेब’, ‘मिनी तुगलक’, ‘मिनी खिलजी’ आज ‘मिनी नहीं; ‘मेक्सी’ (विशाल) हुए हैं। हर गांव के, शहर के, गली-कूचों में मिनी-पाकिस्तान बन गए हैं और इनमें से बहुतांश मतों के राजनीतिक भिखारियों द्वारा बनाए हुए हैं। हर छोटे बड़े गांव के प्रवेश पर और हर मौके की जगह पर इनकी चमकती मस्जिदें, दमकते मदरसे बने हैं (फिर भी कहते हैं कि ये बेचारे गरीब हैं)।

अब तो यह हद हो गई कि हमारी पवित्र अयोध्या में इन आधुनिक बाबरों के लिए सरकार ने गरीब आवास में से 400 घर दिए हैं! कहां दिए हैं ? भगवान राम के जन्मस्थान में, जहां भगवान राम के मंदिर के तराशे हुए पाषाण रखे हैं। जो क्षेत्र अयोध्या परिक्रमा का अमूल्य हिस्सा है। अयोध्या की शास्त्रीय परिसीमा में ये 400 घर फैजाबाद के मुसलमानों को आज दिए गए हैं।

‘इतिहास भूल जाओ और भविष्य की ओर चलो’, कहनेवालों ने बाबर का घिनौना इतिहास दोहराया है। बाबर ने भगवान राम की जन्मस्थली पर बना भव्य मंदिर ही नहीं तोड़ा बल्कि वहां एक विकृत ढांचा बनाया और उसके बाद वह उस ढांचे को मस्जिद कहकर भगवान राम वहां थे ही नहीं, यहां तक कहने लगा। उसी स्थान पर आज उत्तर प्रदेश सरकार ने 400 घर फैजाबाद के मुसलमानों को गरीब आवास योजना में दिए हैं।

भगवान राम पर आज फिर से हुआ आधुनिक बाबर का यह आक्रमण नहीं तो और क्या कहा जायेगा ? मतों के लिए हिन्दुओं को गाली देनेवाले राजनीति वाले, मीडिया वाले, एनजीओ वाले बहुत देखे हैं भारत ने, आज उनसे भी आगे निकलकर स्वयं को आधुनिक बाबर जैसा पेश करने की यह हिन्दूद्रोही कलाकारी अयोध्या में हुई है।

पवित्र अयोध्या के साधु-संतों ने आन्दोलन छेड़ रखा है और भगवान राम की पवित्र नगरी में, पवित्र परिक्रमा मार्ग में मुसलमानों को 400 घर देने का यह विकृत ‘महत् कार्य’ भारत के हिन्दू यूं ही नहीं सहेंगे ना ! शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक ही सही, आन्दोलन तो छेड़ेंगे ना ! थोड़े में ही समझाता हूं कि जिस पवित्र अयोध्या की, भगवान् राम के जन्मस्थान की, अयोध्या की युगों से चली आयी परिक्रमा और अयोध्या का हिन्दुओं में श्रद्धा स्थान के नाते महत्व क्या, और ठीक उसी स्थान पर मुसलमानों को आज 400 घर देने का ‘जिहादी’ अर्थ क्या !

स्कन्द पुराण और गरुड़ पुराण में अयोध्या नगरी का उल्लेख ‘सिद्ध क्षेत्र’ ‘वल्लभ बैठक’ ऐसा आता है। ब्रह्म पुराण में कहा गया है :-

अयोध्या मथुरा माया, काशी कांची ह्यवंतिका।

एता: पुण्यतमा: प्रोक्ता: पुरीणामुतामोत्तमा:॥

कोशल देश की राजधानी ऐसा अयोध्या का महत्व वाल्मीकि रामायण में है। अयोध्या याने ‘अयुध्य याने ‘अजेय’- जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता। आज तक 4 लाख हिन्दुओं ने अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थान के लिए लड़कर अपने प्राण दिए और युगों-युगों तक अयोध्या में पूजा परिक्रमा चलती आयी। ऐसी अजेय अयोध्या में आज 400 घर आधुनिक बाबरों को क्यों ?

अयोध्या कोई 1 मंदिर, 2 मंदिर, अलग-अलग घाट ऐसा स्थान नहीं है, अयोध्या एक ‘संपूर्ण’ पवित्र स्थान है। वाल्मीकि रामायण में पवित्र अयोध्या की व्याप्ति 12 ग 3 योजन कही गयी है। जैन साहित्य में 12 ग 9 योजन है। चीनी प्रवासी ह्यू एन त्संग ने 4 मील से कई अधिक केवल अन्तर्गृही कही है। बगीचें, उपनगर जोड़कर प्राचीन भूगोल में कनिंगहेम ने अयोध्या का 12 कोस ऐसा वर्णन किया है और यह भी केवल अन्तर्नगर का भाग मानकर।

इसी क्षेत्र में मुसलमानों को 400 घर अब क्यों ? अयोध्या की स्थापना पृथ्वी के प्रथम राजा मनु ने की। अयोध्या नगरी में 8 चक्र थे और अयोध्या के 9 विशाल द्वार थे। ब्राह्मण ग्रन्थ में अयोध्या का वर्णन है- अयोध्या परिक्रमा के बाहरी हिस्से पर ऊंची दीवारें थीं जिनके द्वारों पर अयोध्या नगरी की सुरक्षा के लिए अश्म प्रक्षेपक यंत्र और अन्य अस्त्र लगे थे। अयोध्या में गगन को छूनेवाली अनेकों इमारतें थीं जिनमें घरों के ऊंचे सौंध और मंदिरों के सुवर्ण शिखर चमकते थे।

अयोध्या नगरी के सर्वदूर नगरी की अधिक सुरक्षा के लिए जल की चक्राकार खाइयां भी थीं। इक्ष्वाकु वंश के 65 राजाओं ने अयोध्या राजधानी बनाकर परिसर के गांवों से लेकर संपूर्ण कोशल देश पर राज किया, वह भी कैसे ? पराक्रमी चक्रवर्ती सम्राट मान्धाता द्वारा की हुई और अपने वंशजों के लिए रखी हुई प्रतिज्ञा के अनुसार कल्याणकारी राज किया- ‘मन्त्रश्रुत्यम चरामसि’ यानि शास्त्र के अनुसार व्यवहार रखूंगा! आज की अयोध्या में मतों का नया ‘जिहादी’ शास्त्र (शस्त्र) पैदा किया जा रहा है। इसी के अनुसार परिक्रमा मार्ग में मुसलमानों को नए सिरे से 400 घर!

महाभारत में अयोध्या को ‘पुण्यलक्षणा’ कहा गया है। महाभारत के षोडश राजकीय आख्यान में वर्णित 16 श्रेष्ठ राजाओं में अयोध्या सम्राट ही 6 हैं। वे हैं- मान्धाता, सगर, भगीरथ, अम्बरीश, दिलीप, खट्वांग और दशरथी राम! ह्यू एन त्संग ने जिस अयोध्या राज का क्षेत्रफल 1000 मील से अधिक कहा हो, जिस अयोध्या नगरी का उल्लेख समुद्रगुप्त से लेकर पुष्यमित्र शुंग (जिसने अयोध्या में 2 अश्वमेध किये!) अनेक प्राचीन शिलालेखों में हो, धनदेव, विशाखदत्ता इनके सिक्कों पर अयोध्या का उल्लेख हो, ऐसी अयोध्या में आज मुसलमानों को 400 नए घर क्यों ?

स्कन्द पुराण में अयोध्या के 53 तीर्थस्थानों का अति सुंदर और यथावत वर्णन है। स्कन्द पुराण में अयोध्या की 2 दिन की परिक्रमा दी है जो इस प्रकार है:- विष्णुहरी, स्वर्गद्वार, पापमोचनक, ऋणमोचनक, सहस्रधारा, चन्द्रहरी, धर्महरी, चक्रहरी, ब्रह्मकुण्ड, महाविद्या, स्वर्गद्वार, रुक्मिणी तीर्थ। युगों से अयोध्या की वृहद् परिक्रमा है- स्वर्गद्वार, सूर्यकुण्ड, जनौरा, निर्मल कुण्ड, गोप्रतार घाट, स्वर्गद्वार और लघु (अन्तर्वेदी) परिक्रमा है:- रामघाट, सीताकुण्ड, अग्निकुण्ड, विद्या कुण्ड, लक्ष्मण घाट, स्वर्गद्वार, राम घाट। इन्हीं परिक्रमाओं के पवित्र मार्ग पर आज अयोध्या में मुसलमानों को 400 नए घर क्यों ?

अयोध्या में अनेक पवित्र स्थान हैं- राम से जुड़ा कनक भवन, राम जन्मस्थान, चीरोदक (चीर सागर) जहां राजा दशरथ ने पुत्र कामेष्टि हवन किया, सीता रसोई, 24 अवतार, कोप भवन, रतन सिंहासन, आनंद भवन, रंग महल, साक्षी गोपाल, रतन मण्डप, जहां भगवान् राम का दरबार भरता था। स्वर्गद्वार जहां भगवान राम के दाह संस्कार हुए। गो प्रतार तीर्थ (गुप्तार घाट) जो अयोध्या का हिस्सा है और 9 मील पर है। सरयू नदी पर लक्ष्मण कुण्ड, राम राजवाड़ा जो हनुमान गढ़ी में है, सुग्रीव टीला, अंगद टीला, मत गजेन्द्र, तुलसी चौरा- जहाँ तुलसी रामायण का रचना स्थान है, जो कनक भवन के सामने आता है। घोषार्क कुण्ड जो राम घाट से 5 मील है, जिसका उल्लेख स्कन्द पुराण में आता है जो आधुनिक सूर्य कुण्ड है। सुवर्णखनी तीर्थ – जहां राजा रघु ने कौत्स ऋषि को सुवर्ण दान किया, जहां कुबेर ने सुवर्णवर्षा की। जनकौरा- जो जनक राजा का घर था, जो आज फैजाबाद-सुल्तानपुर रास्ते पर आता है (अयोध्या राज की व्याप्ति समझें?), दशरथ तीर्थ है जहां राजा दशरथ के दाह संस्कार हुए…, ऐसी अद्भुत, पवित्र और हिन्दुओं का युगों-युगों से श्रद्धास्थान अयोध्या में आज आधुनिक बाबरों को 400 घर क्यों?

काशी विश्वनाथ के दर्शन करने गए थे? कभी विशाल नंदी के पास खड़े रहकर उनकी नजर से काशी विश्वनाथ के मूल मंदिर को देखने का प्रयास किया? 2 मिनट भी आप उस विशाल नंदी के पास खड़े रहोगे तो वहां की पुलिस आपसे कहेगी – वहां से हटो, ‘मस्जिद’ की ओर ना देखो! हमारा पवित्र शिव मंदिर तोड़कर बांधा हुआ ढांचा है, जो काशी की पवित्र पंचकोशी परिक्रमा मार्ग पर बंधा है और हम हमारे नंदी के पास खड़े रहें तो भी सरकार को हमारी नजरों की दिशा की चिंता! फिर हमारी पवित्र अयोध्या में या अयोध्या की पवित्र परिक्रमा के मार्ग में जहां भगवान राम भव्य मंदिर के सुंदर पाषाण रखे हैं- वहां मुसलमानों को 400 घर क्यों ?

क्योंकि, अयोध्या में भव्य राम मंदिर हो, इसके जो घोर विरोधी हैं- याने जो हिन्दुओं के घोर विरोधी हैं- याने जो बाबर-औरंगजेब-खिलजी-तुगलक के साथ हैं – उन्होंने मतों के लिए ऐसे विकृत आक्रामकों के रास्ते पर चलकर आज फिर से मुसलमानों को जानबूझकर अयोध्या की पवित्र भूमि पर 400 घर दिए हैं।

हिन्दुओं, आगे आओ और मेरे मेरे ई-मेल drtogadiya@gmail.com पर सुझाव दो कि इस आधुनिक बाबरी कृति/विकृति का किस-किस प्रकार से हम सब मिलकर लोकतांत्रिक विरोध करें?

19 Responses to “भगवान राम की अयोध्या पर फिर से आधुनिक बाबरों का आक्रमण?”

  1. satish

    सबसे पहले तो मैं आप सब से ये कहूँगा की कभी किसी शुद्र की आवाज़ भी तो सुनिए……मैं ब्राम्हणों के द्वारा मान्य वर्ण व्यवस्था का एक शुद्र हु और जाती का चमार हु पर ये शुद्र शब्द को नहीं मानता क्युकी ये वैदिक सभ्यता के लोगो द्वारा दिया गया नाम है…आपने लेख लिखा उसके लिए कोटि कोटि धन्यवाद पर अगर आप शुद्रो की आज के स्तिथि के बारे में जानना चाहती है तो आपको इतिहास के पीछे जाना पड़ेगा…..कभी भी वर्ण व्यस्था को बनाने का उद्देश्य कर्म के आधार पे नहीं था ,अगर इस व्यवस्था का प्रयोजन कर्म पे आधारित होता तो आज शुद्रो की ऐसी हालत नहीं होती…..ये सब खेल है आर्य और यहाँ के मूलनिवासियो के बिच का है…….आर्यों ने खुद के भोग और विलास के लिए यहाँ इस देश पे आकरमण किया और यहाँ के मूलनिवासियो को गुलाम बनाया और उनकी आवाज दुबारा न उठे इसलिए उन्हें इश्वर द्वारा निर्मित वर्ण व्यस्था बता कर उसमे सबसे निचले पायदान पे रखा….ये ब्राम्हणों का स्वार्थ ही है जिसकी वजह से यहाँ के मूलनिवासियो की ये हालत है,,,मैं इस देश का मूलनिवासी हु और मुझे गर्व है….

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  2. vinita raga

    श्रीमान लेखक महोदय और टिप्पणीकार गण
    लेख पढ़कर बड़ा आश्चर्य हुआ लेखन में एकपक्षीय तथ्य दिए गए हैं अन्य तथ्यों पर भी विचार हो तो अच्छा है
    + भारत में इतने महापुरुष होते हुए भी दलितों के साथ अशोभनीय व्यवहार होता आया क्यों?
    + आज तक हिन्दू धर्म में ब्राह्मणों के बिना कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं हो सकता क्यों?
    + ब्राह्मण और शुद्र जन्म से होता है कर्म से नहीं क्यों?
    + क्या राम लला का मंदिर बनने से दलितों की दशा में सुधार हो सकेगा?
    इतिहास वो है जो आज आप हम लिख देते हैं भले वो झूठ ही क्यों न हो. राम को भगवान लिखा तो सच है, राज्य के अस्तित्तव का आदर्श रूप ‘रामराज्य’ ko देखिये वो लिखना क्यूँ भूल जाते हैं
    देखिये -”एक दिन श्रीराम अपने दरबार में बैठे थे तभी एक बूढ़ा ब्राह्मण अपने मरे हुये पुत्र का शव लेकर राजद्वार पर आया और ‘हा पुत्र!’ ‘हा पुत्र!’ कहकर विलाप करते हुये कहने लगा, “मैंने पूर्वजन्म में कौन से पाप किये थे जिससे मुझे अपनी आँखों से अपने इकलौते पुत्र की मृत्यु देखनी पड़ी। केवल तेरह वर्ष दस महीने और बीस दिन की आयु में ही तू मुझे छोड़कर सिधार गया। मैंने इस जन्में कोई पाप या मिथ्या-भाषण भी नहीं किया। फिर तेरी अकाल मृत्यु क्यों हुई? इस राज्य में ऐसी दुर्घटना पहले कभी नहीं हुई। निःसन्देह यह श्रीराम के ही किसी दुष्कर्म का फल है। उनके राज्य में ऐसी दुर्घटना घटी है। यदि श्रीराम ने तुझे जीवित नहीं किया तो हम स्त्री-पुरुष यहीं राजद्वार पर भूखे-प्यासे रहकर अपने प्राण त्याग देंगे। श्रीराम! फिर तुम इस ब्रह्महत्या का पाप लेकर सुखी रहना। राजा के दोष से जब प्रजा का विधिवत पालन नहीं होता तभी प्रजा को ऐसी विपत्तियों का सामना करना पड़ता है। इससे स्पष्ट है कि राजा से ही कहीं कोई अपराध हुआ है।” इस प्रकार की बातें करता हुआ वह विलाप करने लगा।
    जब श्रीरामचन्द्रजी इस विषय पर मनन कर रहे थे तभी वशिष्ठजी आठ ऋषि-मुनियों के साथ दरबार में पधारे। उनमें नारद जी भी थे। श्री राम ने जब यह समस्या उनके सम्मुख रखी तो नारद जी बोले, “राजन्! जिस कारण से इस बालक की अकाल मृत्यु हुई वह मैं आपको बताता हूँ। सतयुग में केवल ब्राह्मण ही तपस्या किया करते थे। फिर त्रेता के प्रारम्भ में क्षत्रियों को भी तपस्या का अधिकार मिल गया। अन्य वर्णों का तपस्या में रत होना अधर्म है। हे राजन्! निश्‍चय ही आपके राज्य में कोई शूद्र वर्ण का मनुष्य तपस्या कर रहा है, उसी से इस बालक की मृत्यु हुई है। इसलिये आप खोज कराइये कि आपके राज्य में कोई व्यक्‍ति कर्तव्यों की सीमा का उल्लंघन तो नहीं कर रहा। इस बीच ब्राह्मण के इस बालक को सुरक्षित रखने की व्यवस्था कराइये।”
    नारदजी की बात सुनकर उन्होंने ऐसा ही किया। एक ओर सेवकों को इस बात का पता लगाने के लिये भेजा कि कोई अवांछित व्यक्‍ति ऐसा कार्य तो नहीं कर रहा जो उसे नहीं करना चाहिये। दूसरी ओर विप्र पुत्र के शरीर की सुरक्षा का प्रबन्ध कराया। वे स्वयं भी पुष्पक विमान में बैठकर ऐसे व्यक्‍ति की खोज में निकल पड़े। पुष्पक उन्हें दक्षिण दिशा में स्थित शैवाल पर्वत पर बने एक सरोवर पर ले गया जहाँ एक तपस्वी नीचे की ओर मुख करके उल्टा लटका हुआ भयंकर तपस्या कर रहा था। उसकी यह विकट तपस्या देख कर उन्होंने पूछा, “हे तपस्वी! तुम कौन हो? किस वर्ण के हो और यह भयंकर तपस्या क्यों कर रहे हो?”
    यह सुनकर वह तपस्वी बोले, “महात्मन्! मैं शूद्र योनि से उत्पन्न हूँ और सशरीर स्वर्ग जाने के लिये यह उग्र तपस्या कर रहा हूँ। मेरा नाम शम्बूक है।”
    शम्बूक की बात सुनकर रामचन्द्र ने म्यान से तलवार निकालकर उसका सिर काट डाला। जब इन्द्र आदि देवताओं ने महाँ आकर उनकी प्रशंसा की तो श्रीराम बोले, “यदि आप मेरे कार्य को उचित समझते हैं तो उस ब्राह्मण के मृतक पुत्र को जीवित कर दीजिये।” राम के अनुरोध को स्वीकार कर इन्द्र ने विप्र पुत्र को तत्काल जीवित कर दिया। ”
    यहाँ प्रश्न यह उठता है कि शम्बूक को सिर्फ इसलिए मार दिया कि वो शुद्र था शम्बूक तपस्वी था, लेकिन बहुसंख्यक हिन्दु समाज ( ब्राह्मणों )का आदर्श नहीं, हिंदुओं का सिरोधार्य नहीं रहा। बल्कि चरणधार्य था ?
    ***मर्यादा पुरुषोत्तम की पत्नी माता सीता को जब राम अपने साथ वन ले जाने को तैयार हो जाते हैं तो माता सीता को सारे आभूषण उतार कर वहीं रख देने को कहते हैं। सीता अनिच्छापूर्वक ऐसा करती तो है पर चोरी छुपे कुछ अपने साथ भी रख लेती है। रावण जब उसे हर कर ले जाता है तब वह उनमें से एक-एक उतार कर डालती जाती है। अशोक वाटिका में भी वह अपनी मुद्रिका हनुमान को पहचान के लिये देती है। तात्पर्य यह कि आभूषणों के प्रति उसका इस हद तक मोह यह तो स्पष्ट करता ही है कि माता सीता इनके लिये अपने पति की आज्ञा की भी अवहेलना कर सकती है यह भी जताता है कि वह इनके लिये अनैतिक समझौते भी कर सकती है।”
    ***कवि कहता है –
    मेरे राम
    तुम कसौटी नायक हो।
    तुम सार्वकालिक अभागे हो।
    तुम पाखंडी!
    इतने निस्पृह अनासक्त थे तो
    सीता भू-प्रवेश के बाद
    लक्ष्मण को क्यों त्याग दिए?
    स्वयं आत्महत्या कर गए
    सरयू में छलांग लगा
    कैसी कसौटी थी वह राम ?
    मुझे हैरानी होती है
    कोई तुम्हारी आत्महत्या की बात क्यों नहीं करता?
    जो कथित हिन्दू समाज के ठेकेदार राजा हरिश्चंद्र बनने और तथ्यों को तोड़ने मरोड़ने की कोशिश करते हैं उस कलंक के लिए और, शूद्रों के अधिकार हनन और उत्पीडन के पाप का प्रायश्चित करने के लिए कौन सा मंदिर बनायेंगे?

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  3. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    डा तोगडिया जी की एक भी बात का तर्कसंगत उत्तर देते मैंने उदारता का नाटक करने वालों को आजतक नहीं देखा. उनका एक ही सुपरिचित तरीका होता है की विषय को भटकादों, बेतुके और अप्रासंगिक प्रश्न करके. कोई विवाद खड़ा करदो और मूल विषय-वास्तु पर चर्चा न होने दो. खैर फिर भी कुछ उठाये गए प्रश्नों का उत्तर इसलिए दे रहा हूँ क्योंकि यह भी एक सुअवसर है कि हम हिन्दू धर्म के बारे में महत्व पूर्ण जानकारी दें—————————–
    १. धर्म संसार में केवल एक है और वह है ‘सनातन धर्म’ जिसे आर्य और हिन्दू धर्म के नाम से भी हम जानते हैं. इस धर्म के इलावा बाकी सब ‘सम्प्रदाय’ हैं, धर्म नहीं.
    * सम्प्रदाय वह होता है जिसको शुरू करने वाला कोई प्रवर्तक / पैगम्बर होता है और उसकी कोई पुस्तक तथा एक खुदा होता है. इस्लाम, इसाईयत, बौध, जैन, सिख, शाक्त, यहूदी ; ये सब सम्प्रदाय हैं क्योंकि इन सब के कोई प्रवर्तक, पुस्तक और कोई इष्टदेव या खुदा हैं.
    * सनातन धर्म का कोई प्रवर्तक, पुस्तक या खुदा नहीं है. सर्वोच्च न्यायालय, डा. राधा कृष्णन, स्वामी विवेकानंद, महर्षी अरविन्द आदि ने कहा है कि यह एक उच्च जीवन पद्धती है.
    * हज़ारों साल के चिंतन, मनन, अनुभव से विकसित श्रेष्ठ जीवन शैली, जीवन मूल्यों, परम्पराओं के समुच्चय का नाम आर्य या सनातन या हिन्दू संस्कृति या धर्म है जिसका वर्णन उच्च कोटि के ज्ञान सागर उपनीशदो, वेदों के इलावा गीता आदि में मिलता है.
    * हिन्दू होने के लिए किसी सम्प्रदाय विशेष को मानने की या किसी देवी-देवता को मानने की बाध्यता नहीं है. आप किसी भे सम्प्रदाय को न मानते हुए या किसी भी सम्प्रदाय में आस्था रखते हुए हिन्दू रह सकते हैं.
    * हिन्दू या धार्मिक होने के लिए इन मानवीय मूल्यों का पालन आपसे अपेक्षित है , और ye ही हिन्दू या धार्मिक होने के लक्षण हैं————-
    # आत्मनी प्रतिकूलानी परेशां न समाचरेत. अर्थात जो व्यवहार आपको अपने साथ पसंद नहीं, वह व्यवहार दूसरों के साथ मत करो.
    # धारणात आईटीआई धर्मं आहुह. अर्थात जिस से समाज की धारणा यानी समाज का कल्याण हो वह धर्म है.
    # धरिती, क्षमा, दामो,अस्तेयं, शौचं, इन्द्रीय निग्रह, धीर,विद्या, सत्यम, अक्रोधो दशकं धर्म लक्षणं. ये दस धर्म के लक्षण कहे गए हैं. (संभवतः ईसाई पंथ के टेन कमाडेट्स इन्ही दस धर्म लक्षणों से प्रेरित हैं. )
    ये है हिन्दू धर्म और उसके लक्षण. किसी को कोई प्रश्न इसपर करना हो तो सादर स्वागत है.
    ## जहाँ तक एक कुटिलतापूर्ण प्रश्न की बात है कि स्वर्ण हिन्दुओं द्वारा हरिजनों पर अत्याचार पर डा. तोगडिया जी जैसे लोग चुप क्यों है? तो जवाब ये है कि कुछ लोग हरिजनों के हित के नाम पर देश में अलगाव, विद्वेष को बढाने के प्रयास चालाकी से अनेक दशकों से कर रहे हैं. तोगडिया जी और उन जैसे लोग इस को बढ़ावा न देकर अपने व्यवहार से जोड़ने का काम कर रहे हैं. क्या आप जानते हैं कि वे और उनके अनेकों साथी निम्न समझे जाने वाली जातियों से समानता का व्यवहार करते हैं और उनके उत्थान के अनेकों प्रकल्प चला रहे हैं. पर इसका ढिंढोरा पीट कर वे सस्ती लोकप्रियता प्राप्त नहीं करना चाहते. किसी का आग्रह है तो उसकी जानकारी दी जा सकती है.
    ## सूत्र वाक्य : देश को तोड़ने वालों की एक ख़ास प्रकार की भाषा और शैली होती है जिसे अब हमको समझ लेना चाहिए ताकि उनकी पहचान हो सके और हम उनके फैलाये जा रहे देश तोड़क जाल में न फंसें, उन्हें करारा जवाब दे सकें.

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  4. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. प्रो. मधुसूदन उवाच

    एक कुतर्क शास्त्र
    (१) कुछ टिप्पणीकार, जब किसी प्रश्नका, सही और सच्चायी पर आधारित, तर्क शुद्ध उत्तर नहीं दे पाते, तो कुछ अन्य प्रश्न खडे कर देते हैं, जिस से सारी चर्चा की दिशा ही, बदल जाती है।
    (२) जो मूल-टिप्पणीकारको अभिप्रेत नहीं है, गौण बिंदू को आगे बढाकर, फिर उसी से “राइ का पहाड़ (वह भी हिमालय)” खडा करके, जाने निकले थे, पूरब में, अंतमें पश्चिम में पहुंच जाते हैं।
    (३) इस तकनिक से प्रवक्ता के बुद्धिमान टिप्पणीकारों को बचना चाहिए, प्रवक्ताको भी ऐसी हीन चर्चा से बचाना चाहिए, नहीं तो एक सही दिशामें बढता हुआ “प्रवक्ता”, बिके हुए मिडीया की ही दिशामें और एक इतिहास हो जाएगा।
    (४) फिर भी “आदरणीय पाठक”,(अपना नाम यहां लिख लीजिए) मानकर चलता हूं, कि आपका प्रश्न सही सच्चायी के शोधके लिए किया गया है।
    यदि आप कहते हैं, तो मैं आपके अनुरोधपर “हिंदू” शब्दके बदले “प्रजा” या “पीडित-प्रजा” का शब्द प्रयोग करूं, या फिर “काफिर” या “गैर इस्लामी” शब्दका प्रयोग करूं, तो शायद आपको आपत्ति नहीं होनी चाहिए। आपको इनमेंसे जो भी शब्द सम्मान सूचक लगता हो, उसे स्वीकार करें, और यह भी स्वीकार नहीं तो, “क्ष” जैसा बीजगणित में, उपयोग किया जाता है, वैसा प्रयोग करें। और पूरी टिप्पणी फिरसे पढें।

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  5. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    आदरणीय गहलोत जी
    आपने किस आधार पर समझ लिया की मेने aapki किसी टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया दी है .आप मेरी उस प्रतिक्रिया को चिन्हित करें की मेने कहाँ पर आपको उल्लेखित किया ;या आपके विचारों पर अनुकूल -प्रतिकूल टिप्पणी की .
    आपने मुझे तोगड़िया जी का अनुयाई समझ कर भयंकर भूल की है ;आप तोगड़िया जी के किसी भी आलेख पर मेरी टिप्पणी उनके अनुकूल कभी नहीं पायेंगे ;
    हाँ यह अवश्य है की में rss या आप जैसों की शब्दावली का प्रयोग करने में कृपण हूँ ;क्योंकि मुझे हमेशा यह विश्वास रहता है की सिर्फ समझदारी और सत्यार्थ का सौभाग्य मुझे ही नहीं अपितु प्रतिपक्षी को भी प्राप्त है .मेरे पहले वाले आलेख को एक बार पुनः पढने का कष्ट करें .उसमें वही कहा गया है जो आपने अभ्व्यक्त किया है .
    सिर्फ अंदाजे बयाँ-जुदा है .

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  6. Ateet Agrahari

    Mr.Gahlot,
    Mai apse yah prashan poonchata hoo ki Desh me kab Bantwara hota hai?
    desh me kab dange hote hai?
    Aaj tak ka itihas hai ki Hinduo ne kabhi Kisi desh ya dharm ke upar pahile Hamala nahi kiya hai?
    aaj Congress jaisi Ghtiya sarkar k karan desh me ek aur batwara ho raha hai.
    Kripaya aap EK Deshbhakti Nagrik bankar apne comment likhe

    Reply
  7. Jeengar DS Gahlot

    Dr. Prof. MadhuSudan Sahib, Hinduo par huye bataye attyacharo ko lekar aapne jo sawal utaye hai, vah kitne sach hai yah to aap hi jane, kyonki aap Dr. bhi hai oor Prof. bhi. Meharbani karke aap sirf yahi batla de ki- Hindu kon hai ? : Hindu ka arth kya hai ? : Oor Hindu Dharm ka Sar-Sandesh kya hai ? Tatha, Hindu Dalito ke prati aaj bhi en tathakathit Sawarn Hinduo ke man me ‘Nafrat Bhav’ kyo bana hua hai ? Dhanaywad.

    – Jeengar Durga Shankar Gahlot, Kota (Raj.). Mob. – 098872-32786

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  8. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. प्रो. मधुसूदन उवाच

    इतिहास के प्रश्न:
    (१) किसने १००० साल राज किया, और काफिरोंसे जज़िया लिया?
    (२) अन्याय किसने किया?
    (३) किसने, मा बहनो पर अत्याचार गुज़ारे?
    (४) किसने धर्मांधता से धर्मांतरण किया?
    (५)किसने बलात्कार किए?
    (६) १००० वर्ष सुविधाएं किसे मिली?
    (७)१५० साल, अंग्रेजो से भी पक्षपाती सुविधाएं किसे मिली?
    (८) अंतमें पाकीस्तान भी किसे दिया गया?
    इतनी सुविधाओमें भी पढ लिखकर सुशिक्षित ना हो पाया, आगे ना बढ पाया,पीछडा रह गया बिचारा, इसलिए शासनकी कठपुतली उन्हे preferable treatment पर उनका पहला अधिकार होनेकी बात कहती है।
    और हिंदु, हिंदुस्थानमें और वह भी अयोध्यामें मंदिर नहीं बना सकता? तो क्या सौदि अरेबिया में बनाएगा? या अफ्गानीस्तानमें?
    सारे अन्याय तो हिंदुने सहे, और इतना सारा सहनेके बाद, हिंदुओंपर अनगिनत अमानुषि अत्याचार गुज़ारने के बाद किस ऐतिहासिक अन्याय की भरपाईके लिए मुसलमानों को भारतकी सरकार preferential Treatment दे रही है? इतिहास सक्षी है, कि, ७०,००० (एक ऐतिहासिक अनुमान) मस्ज़िदे मंदिरोंकी बुनियादों पे खडी है, तो एक राम मंदिर जहांपर राम जन्मा था, वह भी उसे ना मिले? और वह भी हिंदु बहुल हिंदुस्थानमें?
    और जो फर्ज़ी अन्याय मुसलमान पर हुआ है, उसके बदले उसके हितमें पक्षपाती व्यवहार भारत सरकार कर रही है। कौनसा अन्याय उनपर हुआ? कोई उत्तर देगा?
    और जिन हिंदुओंनें ११५० साल अन्याय सहा है, उसी पर और अन्याय करते रहो। उसके ७०००० हजार ध्वस्त मंदिरोंमें से एक भी उसे मत दो। अरे जहां राम जन्मे थे, वह अयोध्या भी ना दो, और वह भी भारतमें, जहां कहा जाता है कि हिंदूको स्वतंत्रता मिली है? कोइ उत्तर देगा, काहेकी स्वतंत्रता? क्या करनेकी स्वतंत्रता? मुसलमानोंको सहायता करने की स्वतंत्रता?

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    • आर. सिंह

      R.Singh

      dhanya ho mahaaraaj.Main to samajh rahaa thaa ki Dr.Togadiya apane sankuchit aur ekpakshiye vjichaaron ke kaaran alag thalg pad gayen hain,par yah shaayad meri bhool thee.Mera to apanaa khayaal yahi hai ki insaan insaan mein bhed karne waalaa hindu nahi ho sakta.Maine pahle bhi likhaa hai ki anya dharmon mein kya hai,main nahi jaanataa par hindu dharm ke bare mein daave ke saath kah sakataa hoon ki wahaan yah kahi nahi likhaa hain ki garibon ko hataa kar mandir kaa nirmaan karo,vah chahe bhagwaan ek kathit awataar ka janm sthaan hi kuon naa ho?Agar garibon ko mandir ki jamin ke aaspaas basaayaa hi gayaa hai to isme aisi kaun badi baat ho gaayee jiske liye Togadiyaji aur unke samarthak itnaa hai taubaa machaa rahe hain aur phir ye log apane ko hindu bhi kahte hain.Togadiyaji aur unke samarthak bhi yah maanate hain ki hidutva koi majhab nahi hai yah to ek jiwan shaili hai.Yah to jine ki ek raah hai,jisme bhagawaan ke nam ki nahi balki karm ki pradhaanta hai,isi kaaran hindu dharm ya uska progressive roop Buadh dharma hi ,aisa hai jahaan aap bhagwaan ko na maanate huye bhi apne aachran dwaraa shreshthtaa ko prapt kar sakte hain.Agar hindu Iswar ke anek roopon ko ek doosre ka virodhi maan kar chaltaa hai,to mere vichaar se to wah hindu hi nahi hai.Main daawaa to nahi kartaki hindu dharm ke baare mein bahut jyadaa gyaan hai,kyonki hindu darshan ya bhaartiya darshan itnaa brihaat hai ,ki uska thaah paane ke liye mere jaise Insaan ko shaayad kayee janm lene pade..par itnaa to main kah hi saktaa hoon ki ek hindu agar Babur ya anya Mulim shaashkon kki nakal karta hai ,to usne hindutva ko samajhaa hi nahi.Hindutva pratikriya kabhi nahi sikhaataa.Hamaare dharm granthon mein aneko drishtaant milenge,jisse mere kathan ki satyataa jaahir hogi,par in sab baton ke liye aap ko hindu dharm granthon aur prachya darshan ka adhyan karranaa padegaa.

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  9. Jeengar DS Gahlot

    Shriman Tiwari Ji, Aap Dr Togriya ke Agent hai ya Pravakta hai, hame nahi malum. Lekin, hamne sawal Dr Togriya se kiye hai, aap se nahi. Esliye achcha hota yadi hamare sawalo ka jawab Dr Togriya hi de oor aapki bat ko bhi apna samarthan de. Samjdar Insan ko chahiye ki vah jabran dusre ki pervi karne se pahle uski soch ko bhi samjh le. Ham apni bat ko phir se dohra rahe hai ki – Dr. Togriya na to hindu hi hai oor na hi unko Hindu Dharm se hi kuch lena-dena hi hai, Unko to sirf RSS ke eshare par BJP ke Labh-Hani ko dhayan me rakhkar bayanbaji karni hai, tatha ‘Sach’ bhi yahi hai. – Jeengar Durga Shankar Gahlot, Kota.

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  10. shishir chandra

    आदरणीय तोगड़िया जी आप से मैं सहमत हूँ कि अयोध्या में मुस्लिमों को नहीं बसाया जाना चाहिए. क्या सरकार ने अयोध्या को मुस्लिम सिटी बनाने का फैसला कर लिया है? हिन्दुओं को 400 मुस्लिम परिवारों को बसने का पुरजोर विरोध करना चाहिए. यह उसी तरह है जैसे जेरुसलम में मुसलामानों को बसाया जाये. अयोध्या जैसे पवित्र शहर में मुस्लिमों को बसाया जाना किसी गहरी साजिश का हिस्सा है. शायद ऐसा करके क्षद्म धर्मनिरपेक्षतावादी अयोध्या आन्दोलन की धार को कुंद करना चाहते हैं, किसी समस्या को टेकल करने का बहुत ही घटिया तरीका है.

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  11. आर. सिंह

    R.Singh

    श्री तोगडियाजी,भगवान् के कथित नाम पर आप कब तक हिन्दुओं के भावनाओं से खिलवाड़ करते रहेंगे?इन्सान इंसान में भेद करना आपको किस हिन्दू धर्म ने सिखाया है?आप अपना जितना समय हिन्दुओं की धार्मिक या अधार्मिक भावनाओं को भड़काने में लगाते हैं ,उससे आधा समय भी आप अगर हिन्दुओं के सुधार और उनकी एकता को विकसित करने लगाते तो शायद हिन्दू धर्म और उसके साथ ही देश का भी कल्याण होता.ऐसे देश में डाक्टरों की भी बहुत कमी है.ज्यादा अच्छा होता अगर अपने पेशे में लगे रहते और बिना भेद भाव के इंसानों का कष्ट हरण करते.जिन ४०० गरीब इंसानों को आपके तथाकथित रामजन्म भूमी के इर्द गिर्द बसाया गया है,वे जीते जागते इंसान हैं.अगर आप यह दुराग्रह छोड़कर एक डाक्टर की तरह उनकी सेवा में लग जाते तो शायद देश और समाज का ज्यादा कल्याण होता और आपको राम मंदिर बनाने में उन लोगों का सहयोग भी हासिल हो जाता.मैं यह तो नहीं जानता की इस्लाम दूसरे धर्मों के बारे में क्या कहता है,पर हिन्दू होने के नाते और हिन्दू धर्म का थोडा ज्ञान होने के चलते मुझे इतना तो जरुर पता है की हमारा धर्म इंसान इंसान में में धर्म के नाम पर बैर करना नहीं सिखाता.यह बात जिस दिन आप जैसे धर्मान्धों की समझ में आजायेगी उसदिन न केवल हिन्दू धर्म का बल्कि देश का भी बहुत कल्याण हो जायेगा.रही प्राथमिकता की बात तो मेरे जैसे हिन्दू यह समझते हैं की गंगा और यमुना की सफाई रामजन्मभूमि के उद्धार से ज्यादा जरुरी है.मुझे नहीं पता आप जैसे हिन्दू धर्म के स्तम्भ उसके लिए क्या कर रहे हैं?

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  12. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    आदरणीय डॉ प्रवीन तोगड़िया जी आप के प्रश्न का जबाब देने को कोई भी बाध्य नहीं है .अव्वल तो प्रश्न ही आपके स्तर का नहीं है ; आप ठहरे एक अरब हिदुओं के ह्रदय सम्राट और सवाल कर रहें दोयम दर्जे का ?आपको मेरी बात पर विश्वाश न हो तो rifrendum करा लें .यदि सारी दुनिया के धर्मांध अनुय्याई सिर्फ अपने तई सीमित स्वार्थों में बुरी तरह बट जायेंगे ;तो स्वाभविक ही धार्मिक तौर पर हिन्दू भी कोई तो सहारा अवश्य धुन्डेगे..हालांकि व्यक्तिगत रूप से मेरा विचार आपसे सदैव भिन्न रहा है ;क्योंकि आप हिदुत्व में लहर पैदा कर उसे भाजपा के सत्ता में आने की सीडी बना देते हैं .
    आप की बातों से उन हिदुओं की आत्मा रोटी है जो कांग्रेस .माकपा .या अन्य गैरभाजपा दलों के अनुयाई हैं .अधिकांस तो किसी भी दल में नहीं हैं ;पैसे वाले भृष्ट नेता उन्हें एक दारु की बोतल और एक सस्ते कम्बल में महज एक वोट का भागीदार समझते हैं .
    आपको अपने सिद्धांत का पुनरवलोकन करना होगा .पहले तो आपको भारत की अस्मिता को हिंदुत्व से अलग करना होगा .फिर दलित आदिवाशी को साथ में लाना होगा .उसके बाद इस देश में जो १४ करोड़ मुसलमान हैं उन्हें भारत वंशी और हिदुओं का हो सहोदर मानना होगा .इसके उपरान्त आपको इस देश के जितने भी गैर हिदू हैं उन्हें उनके अनुपात में प्रतेक धार्मिक स्थल में आंशिक पूजा स्थल देना होगा .बिलकुल सगे छोटे भाई के हिस्से की तरह .
    आबादी का हर हिस्सा भारतीय पूर्वजों की ही संतान है अत;फैजाबाद में ४०० झोपड़ों का उतना महत्व नहीं जितना भारतीय समाजों की एकता. .आप बहुत बड़े यशश्वी जननेता हैं आप यदि चाहते हैं की हिदुओं ;हिदुत्व और हिदुस्तान का कल्याण हो तो आपको mahaan tyaag और balidaan के liye aadarsh sthapit करना chahiye .इसके baad भी यदि कोई vykti या samooh इस देश से gaddari karta है तो -आपको iski poori chhoot hogi की -जो ran hame pukare कोई ..ladahin suveer kaal kin hoi .

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  13. Jeengar DS Gahlot

    Dr Togriya & Co. se chand sawal –
    (1) Kya Dr Togriya & Co. vastav me hindu hai ?
    (2) Kya Dr Togriya & Co. “Hindu” ka shai arth batayegee ?
    (3) Ayodhya ka vivadit “Ram Mandir” kon se “Hinduo” ki Aastha ka kendra hai ?
    (4) Ayodhya Mandir vivad ko lekar kitna Insani khoon bahayege Dr Togriya & Co. ?
    (5) Yadi Dr Togriya & Co. hindu hiteshi hai to Ve, Uchh Hinduo dwara Dalit Hinduo par kiye ja rahe athayacharo par Kyo khamosh bane hue hai ?
    (6) Kya Dr Togriya & Co. batayege Ki – “Ramchrit-Manas” ke rachanakar Tulsi Das Ji es Ayodhya ke vivadit banaye huye “Ram Mandir” & “Babri Masjid” mamle par Kyo kamosh rahe hai ?
    – Jeengar Durga Shankar Gahlot, Publisher & Editor, Samachar Safar [Fornightly], Satti Chabutre ki Gali, Makbara Bazar, Kota – 324 006 (Raj.). Mob. : 098872-32786

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  14. Anil Sehgal

    विषय : drtogadiya@gmail.com मुसलमानों को जानबूझकर अयोध्या की पवित्र भूमि पर 400 घर दिए हैं। मिलकर लोकतांत्रिक विरोध.
    निवेदन:
    – प्रथम बात, डॉ. प्रवीण तोगड़िया जो भी आदेश करें, राम मंदिर के लिए हमारा समपूर्ण समर्पण है.
    – तनिक समझने और सुझाव प्रस्तुत करने के लिये, कुछ जानकारी की जरूरत है e.g. स्कीम का विवरण जिसके अंतर्गत 400 घर मुसलमानों को जानबूझकर दिए हैं : यह स्कीम कहाँ से देखी जा सकती है, आदि, आदि.
    – क्या प्रवक्ता. कॉम का माध्यम सुगम नहीं होगा ? विवरण जानने की प्रतीक्षा है.

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      • डॉ. मधुसूदन

        डॉ. प्रो. मधुसूदन उवाच

        गरीब हिंदुओंको भी तो दिया जा सकता था। इसमें राजनीति का पैंतरा प्रतीत होता है। कल, इन्ही घरोंमें हथियार इक्कठे होकर हिंसा भडकने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

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