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    Homeसाहित्‍यकवितामै मन के भाव लिखता हूं

    मै मन के भाव लिखता हूं


    मन में भाव आते हैं तो लिखता हूं।
    दिल में दर्द होता है तो लिखता हूं।।
    किसी का कुछ न लेता हूं न बिगाड़ता हूं।
    केवल अपने उदगारो तो मैं लिखता हूं।।

    दीवार के सहारे खड़ा हूं तेरा क्या लेता हूं।
    केवल अपने दिल की तपिश बुझा लेता हूं।।
    तू प्यार का पानी पिला न पिला मुझको।
    अपने प्यार की प्यास तो मै बुझा लेता हूं।।

    ये जिंदगी तेरे हवाले कर दी है मैंने।
    सब कुछ लुटाकर तुझे पाया है मैंने।।
    ये एहसान मान न मान तू मेरा अब।
    तू कुछ भी कर ये तुझ पर छोड़ा है मैंने।।

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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