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    जनाब ! डाटा नहीं आटा का हिसाब रखिए

                        प्रभुनाथ शुक्ल

    मैडम किचन में कड़क चाय की चुस्कीयां हलक से नीचे उतारते हुए आवाज दी, अजी सुनते हो। जी, मोहतरमा फरमाइए। अरे! फरमाना क्या है महाराज, कभी-कभी आटे-दाल की फ़िक्र भी कर लिया करें। आपको जितनी डाटा की चिंता रहती है उतने आटे की नहीं। अरे!भाग्यवान, अभी हप्ते भर भी नहीं हुए आपका किचन रिचार्ज कराया था मेरा मतलब राशन भराया था। फिर ? फिर क्या, आप किस ख्याल में डूबे हैं। आपने ने ही तो कहा था जीएसटी की वजह से जेब भारी हो गयी। चलिए इस बार 15 के बजाय दस दिन का राशन भरा देते हैं। अगली तनख्वाह पर पूरा भरवा लेना।

    अजीब भूलककड़ हैं डाटाजीवी महराज। आपको जितनी डाटा बचत कि फ़िक्र रहती है उतनी आटे-दाल की नहीं। किचन के लिए दस दिन का राशन भरावा कर 15 दिन का ख्वाब देख रहे हैं। जबकि इससे बेहतर तो आप अपने मोबाइल डाटे का हिसाब रखते हैं। उतना ख्याल तो मेरा भी नहीं रखते हैं। वाई-फाई कनेक्ट माँगने पर मुंह फेर लेते हैं। जैसे मैं डाटा नहीं आपकी माशूका मांग रहीं हूँ। काश ! इतना ख्याल मेरा भी रखते। अच्छा मजाक कर लेती हो बेगम। खामखां मेरा माखल उड़ाती फिरती हैं।

    अब क्या बताएं मोहतरमा यह डाटा न होकर जैसे कोई माशूका है। मोबाइल कंपनियां भी कम थोड़ी हैं। डाटा खपत का संदेश रात-दिन भेजती हैं। जैसे यह कोई मोबाइल डाटा न होकर निगरानी में रखी गयी कोई माशूका हो। आप ठीक फरमाती हैं मोबाइल कंपनियां ग्राहक को डाटा सतर्कता को लेकर जितना संदेश भेजती हैं उतना मैसेज तो को कोई नयी नबेली माशूका भी अपने आशिक को नहीं भेजती होगी। बेचारी मोबाइल कंपनियां डाटाजीवियों और उनकी जेब का कितना ख्याल रखती हैं। इस घोर कलयुग में इतना भला कौन परोपकारी होगा, जब दुनिया को अपने की पड़ी हो। हमें इनका ऐहशानफरामोश 

    होना चाहिए।

    जी! आप ठीक कहते हैं जनाब! इतनी फ़िक्र तो आपने उस वक्त भी मेरी नहीं कि थीं जब नयी-नयी शादी के बाद मुझे हनीमून पर ले गए थे। मोहतरमा की बात सुनकर डाटाजीवी ने अपनी खींसें निपोर दी और हें-हें-हें करने लगे। मोहतरमा अब हम क्या बताएं इनकी ख्याली का मैं शुक्रगुजार हूँ। रात आधी हो या फिर बात बाकि हो उस दरमियां भी एक प्यारा सा संदेश मोबाइल के मैसेज बॉक्स में गूंज उठता है।…आपने अपने दैनिक डाटा का उपयोग सौ फीसदी खर्च कर लिया है। अगले दिन आपका दैनिक हाईस्पीड डेटा फिर बहाल हो जाएगा। अधिक जानकारी के लिए अपने डेटा कोटा के लिंक पर क्लिक करें…। मोहतरमा उस वक्त मेरी सारी ख़ुशी ख़ाफूर हो जाती है और आटे-दाल का भाव मालूम पड़ जाता है। उन्हें पता ही नहीं होता है कि अभी मुझे डीपी भी बदलनी है और ईडी भी देखनी है।

    मोहतरमा ! मैं आपसे गुजारिश करता हूँ कि आप रोज का खाना तैयार करने से पहले मुट्ठी भर दाल, चावल और आटे निकाल कर रख दिया करें। हमारी अम्मा ऐसा करती थीं जिसकी वजह से दस दिन चलने वाला राशन पांच दिन और चल जाता था। कम से कम टैक्स वाले मौसम की घनघोर बारिश से बचने का यह सबसे सरल-तरल और नरम तरीका है। वाह रे डाटाजीवी! आपको मालूम है कि नहीं, आपके अम्मा के जमाने में सीबीआई और ईडी नहीं थीं। अरे भग्यान इस नेक सलाह में भी विपक्ष की तरह ईडी और सीबीआई को क्यों घुसेड़ रही हो। लगता है आप भी विपक्ष के साथ मिली हैं।…ना बाबा ना, ऐसा हम कत्तई नहीं कर सकते। जानबुझ कर आ बैल मुझे मार कि स्थिति क्यों पैदा करूँ।

    डाटाजीवी जी, आपको पता होना चाहिए जमाखोरी और घूसखोरी के खिलाफ ईडी बेहद सख्त है। पड़ोसियों से अपन की जमती नहीं है। आपको पहले से मालूम है कि यहाँ पडोसी कम विपक्ष के नेता अधिक हैं। पता नहीं राशन की जमाखोरी की शिकायत कब ईडी तक पंहुच जाए। जनाब! फिर तो छापेमारी से मुश्किल बढ़ जाएगी। आपकी इनकम तो बमुश्किल आटे-दाल की है। आप इनकम टैक्सपेयी भी नहीं हैं। फिर ईडी के सवालों का जबाब हमारे पास क्या होगा। अगर उन्होंने ने पूछ दिया कि दस दिन के राशन में आप 15 दिन रसोई का खर्च कैसे चलाती हैं। आय से अधिक राशन आपने कहां से जमा किया है। यह सीधे-सीधे जमाखोरी है। आपको जेल जाना ही होगा। मोहतरमा के तर्क से मैं बिचलित हो चला था और मेरा कलेजा काँप गया था। डाटा के बजाय अब हमें आटे-दाल का भाव मालूम पड़ गया था।

    प्रभुनाथ शुक्ल
    प्रभुनाथ शुक्ल
    लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं

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