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    Homeसाहित्‍यकविताशायद ,अब तुमको मेरी जरुरत नहीं

    शायद ,अब तुमको मेरी जरुरत नहीं

    शायद ,अब तुमको मेरी जरुरत नहीं
    क्या करीने से महफ़िल सजी आपकी
    फिर क्यों रहमत नहीं है अजी आपकी
    आँखों का है धोखा या धोखा मिट रहा
    खो गया है चैन ,सुकून मिलता नहीं
    हुस्नवालों में होती है ,चाहत नहीं
    फिर भी इनके बिना ,दिल को राहत नहीं
    तू जानती है बिन तेरे ,दम घुटता मेरा
    शायद अब तुमको मेरी जरुरत नहीं ||
    अश्क इन आँखों से ,न यूँ ही बह जाएं कहीं
    जो कहा मैंने ,तुमने सुना ही नहीं
    मजबूर है तू गर्दिशे अय्याम के आगे
    मेरी चाहत में शायद वो सिद्दत नहीं
    मेरे दर्द का किश्तों में आदाब आ रहा
    मेरे हसरतों की ,कोई अब कहानी नहीं
    तू जानती है बिन तेरे ,दम घुटता मेरा
    शायद अब तुमको मेरी जरुरत नहीं ||
    तेरी तस्वीर ही तो अमानत मेरी
    इनसे अनमोल मेरे पास कुछ भी नहीं
    यकीन न हो ,तो ले लो कसम
    झूंठ से अब मेरा कोई वास्ता नहीं
    मैं तेरी राहों में ,महज एक मुफ़लिस हूँ
    इसलिए तेरे पास ,मेरे लिए फुर्सत नहीं
    तू जानती है बिन तेरे ,दम घुटता मेरा
    शायद अब तुमको मेरी जरुरत नहीं ||

    नाम : प्रभात पाण्डेय

    प्रभात पाण्डेय
    प्रभात पाण्डेय
    विभागाध्यक्ष कम्प्यूटर साइंस व लेखक

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