‘प्रवक्‍ता’ ने साबित किया उड़ान परों से नहीं हौसलों से होती है / शादाब जफ़र ’’शादाब’’

pravakta23 मार्च 2011 का वो दिन मुझे आज भी याद है, जब मेरा पहला लेख ’’तख्ती पे तख्ती तख्ती पे दाना’’ प्रवक्ता डॉट कॉम पर प्रकाशित हुआ था। वो दिन मेरे लिये किसी ईद से कम नहीं था। क्‍योंकि देश के एक बहुत ही छोटे से कस्बे नजीबाबाद के एक बहुत ही छोटे लेखक को जिसका कोई नाम कोई बड़ा वजूद पत्रकारिता के क्षेत्र में न हो उसे देश के विभिन्न राज्य के साथ ही अमेरिका के न्यूयार्क तक पढा जाने के साथ ही प्रसिद्ध साहित्यकार, लेखक, समीक्षक डॉ; मधुसूदन, डॉ. राजेश कपूर, और प्रेम सिल्ही जी जैसे लोगों का आशीर्वाद मिला। मैंने तुरन्त मोबाईल द्वारा भाई संजीव जी को लेख के प्रकाशन के लिये मुबारकबाद दी। संजीव जी ने आभार व्यक्त करने के बाद मुझ से कहा शादाब भाई आप के फोन ने मुझ में एक नया जोश भर दिया। बस सहयोग बनाये रखे। और समय समय पर मेरी गलतियों से मुझे अवगत भी कराते रहे। पर दाद देना चाहॅूगा में संजीव जी के हौसले की, तमाम उतार-चढाव आने के बाद भी आज बहुत कम समय में प्रवक्ता डॉट कॉम ने देश और दुनिया में अपनी पहचान बना ली है। मैं जब कभी कही बाहर जाता हूं और पाठक मुझ से प्रवक्ता डॉट कॉम में प्रकाशित समाचारों, लेखों और संजीव जी के व्यवहार की तारीफ करते है तो मुझे बहुत गर्व होता है। जिसे में समय समय पर संजीव जी से फोन पर शेयर भी करता हूं।

कहना चाहॅूगा कि आज एक ओर पत्रकारिता में बहुत गंदगी फैल चुकी है कुछ लोगों ने केवल पैसा कमाने और पुलिस प्रशासन और सत्ता के गलियारों को रौब में लेने के उद्देश्य से ही समाचार पोर्टल चला रखे है और कुछ लोग अपने इस मकसद में कामयाब भी हुए है। पर मैंने कभी भी संजीव जी को पैसे की ओर भागते या समाचार को पैसे से तौलते नहीं देखा। वास्तव में प्रवक्ता डॉट कॉम ने अपने तमाम पत्रकार साथियों के सर को कभी पैसे के आगे नहीं झुकने दिया, निष्पक्ष और निर्भीक होकर समय समय पर विभिन्न मुद्दों पर सरकार के खिलाफ जनहित में आवाज बुलंद की और अपनी लेखनी को कभी बिकने नही दिया। सदैव पत्रकारिता को मिशन माना और प्रवक्ता डॉट कॉम को गरीबों मजलूमों और देश की गरीब जनता की आवाज बनाये रखा।

आज प्रवक्ता डॉट कॉम की पांचवी वर्षगाठ के अवसर पर में इस से जुडे़ तमाम लोगो को उनकी ईमानदारी, नेकनियती और हौसले, को सलाम करना चाहूंगा और उन से कहना चाहूंगा –

’’उडान परो से नहीं हौसलो से होती है’’

प्रवक्ता डॉट कॉम के हौसले को इसी प्रकार बनाये रखे इन्शाअल्लाह वो दिन दूर नही जब प्रवक्ता डॉट कॉम के हौसले और ईमानदारी की पूरी दुनिया में मिसाल पेश की जायेगी। में विशेष रूप से प्रवक्ता डॉट कॉम और प्रवक्ता डॉट कॉम के सभी पाठको, शुभचिंतकों भाई संजीव जी को बहुत बहुत धन्यवाद देने चाहूंगा कि जिन्होंने एक क्षेत्रीय पत्रकार को अपने बहुमूल्य विचारों के कारण आज अंतरराष्‍ट्रीय स्तर पर पहचान देकर घन्यवाद देने का ये अवसर प्रदान किया।

जयहिंद, जय भारत

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