प्रवक्ता डॉट कॉम ने दबी हुई आवाज को जुबां दी / एम. अफसर खां सागर

pravaktaप्रवक्ता डॉट कॉम के पांच साल के सफर पर गौर करें तो एक बात जेहन में हमेशा रहती है कि पूरी ईमानदारी से संजीव भाई ने समाज की छूटी हुई आवाज को जुबां देने का काम किया है। वेब मीडिया के संस्करणें में प्रवक्ता डॉट कॉम ने जितनी बेबाकी से सरोकारी मुद्दों को उठाया हे वह पत्रकारिता के मकसद को सफल बनाती है।

प्रवक्ता डॉट कॉम पर आलेख प्रकाशित कराने के लिए ना तो किसी पैरवी और ना ही संपादक से सम्पर्क साधने की जरूरत पड़ती है। रचना ई-मेल करने के बाद स्वतः ही प्रवक्ता डॉट कॉम की टीम रचना के गुणवत्ता के आधार पर उसे वेबसाइट पर जगह देती है जो कि नये व युवा रचनाकारों को उचित प्लेटफार्म प्रदान करती है। कई जगहों पर ऐसा नहीं है! जबकि अन्य जगहों पर सदस्य बनना पड़ता है जोकि सदस्यता के रूप में धन अर्जन करते हैं साथ ही विज्ञापन का दबाव बनाते हैं जिससे कि युवा प्रतिभायें दब जाती हैं।

पत्रकारिता का असल मकसद आम आदमी व सरकार के बीच की कड़ी बनना है। आम जन की समस्या से सरकार व प्रशासन को अवगत कराकर उसके निराकरण का प्रयास करना है। इसके लिए ईमानदार कोशिश की जरूरत है जो कि प्रवक्ता डॉट कॉम साकार कर रही है। बेहद संजीदगी के साथ सामाजिक सरोकार की पत्रकारिता का अलम्बरदार है प्रवक्ता डॉट कॉम। इसके लिए संजीव भाई व उनकी टीम बधाई के पात्र हैं।

एक चीज पर मैं ध्यान आकर्षित कराना चाहूंगा कि रचनाकारों के प्रकाशित रचना के लिंक ई-मेल से रचनाकारों को भेज दिए जाऐं। उद्देश्यपूर्ण व साथक प्रयास के लिए प्रवक्ता डॉट कॉम के संचालक मण्डल को दिली मुबारकबाद! !

 

2 thoughts on “प्रवक्ता डॉट कॉम ने दबी हुई आवाज को जुबां दी / एम. अफसर खां सागर

  1. प्रवक्ता डाट काम ने हर मुद्दे को बड़े गम्भीरता से उठाया है।
    मीडिया जगत में विश्वास का दूसरा ना है प्रवक्ता।
    यूं ही ये कारवां जारी रहे…।

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