नवोदित लेखकों का स्थायी मंच बना प्रवक्ता / अवनीश सिंह

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pravaktaप्रवक्ता एक ऐसा नाम जो विचारों को रखने का स्थाई मंच बनकर उभरा। यहां कभी भी किसी लेखक से परहेज नहीं किया गया चाहे वह नवोदित हो या पुरोधा, अगर प्रमुखता दी गयी तो विषय बस्तु और प्रस्तुति को। यही कारण है कि आज प्रवक्ता को भारत ही नहीं वरन् विश्व का हिन्दी प्रेमी बौद्धिक जगत का भरपूर प्यार मिला है।

प्रवक्ता पर आज से तीन-चार साल पहले मैने अपना पहला लेख भेजा था। उन दिनों पत्रकारिता का शुरुआती दौर था और लेख आने के बाद मुझे उतनी ही खुशी हुई थी जितनी किसी पत्रकार को अपने समाचार पत्र में बाईनेम स्टोरी छपने पर होती है। इसके बाद मैंने 10-15 लेख व कई समाचार इसके लिए लिखा और प्रमुखता से इसे स्थान भी मिला।

उस दौरान कई ऐसे वरिष्ठ स्तंभकार जिनके लेख पढ़ने के लिए समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं था ऐसे में प्रवक्ता ने एक ऐसा मंच दिया जहां हमने अपनी पसंद के अनुसार लेखकों और लेख का चयन कर उसपर मंथन किया।

हालांकि मै प्रवक्ता परिवार का प्रत्यक्ष रुप से हिस्सा नहीं बन सका लेकिन बड़े भाई संजीव सिन्हा जी के स्नेह ने कभी भी इसका अहसास नहीं होने दिया। प्रवक्ता के पांच वर्ष पूरे होने पर पूरे परिवार को दिल से आभार…

 

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अवनीश राजपूत
उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर,आजमगढ़ में जनवरी 1985 में जन्म और वहीँ स्नातक तक की शिक्षा। वाराणसी के काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता एवं जनसंचार में परास्नातक की शिक्षा। समसामयिक एवं राष्ट्रीय मुद्दों पर नियमित लेखन। हैदराबाद और दिल्ली में ''हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी'' में दो वर्षों तक काम करने के उपरांत "विश्व हिंदू वॉयस" न्यूज वेब-पोर्टल, नई दिल्ली में कार्यरत।

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