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    Homeसाहित्‍यकवितामेरे कन्हैया प्रभु

    मेरे कन्हैया प्रभु

    मेरे मन में बस जाओ कन्हैया मेरे,
    सुबह उठते ही तुम्हें मै निहारा करूं।

    चराते हो जो गईया मधुबन में प्रभु
    उन गाईयो का मैं नित्य दुग्ध पान करू।

    बजाते हो बंसी जो यमुना तट पर
    उस बंसी की तान में रोज श्रवण करू।

    खाते हो जो माखन मिश्री प्रभु तुम,
    उस माखन को मैं रोज तैयार करूं।

    खेलते हो जिस गेंद से प्रभु तुम,
    उस गेंद को रोज मै उछाला करूं।

    क्रीड़ा करते हो जो नंद यशोदा के आंगन में,
    उस क्रीड़ा को मैं नित्य निहारा करू।

    रचाते हो रास जो गोपियों के संग प्रभु ,
    उस रास को अपने नेत्रों से निहारा करूं।

    दिए हैं उपदेश गीता में प्रभु तुमने
    उन उपदेशों को जीवन में उतारा करू।

    किये हैं बहुत कार्यकलाप प्रभु तुमने,
    रस्तोगी उन सबको भक्तो को सुनाया करू।

    रामकृष्ण रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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