आधी दुनिया कर ली मुठी में

जितेंद्र कुमार नामदेव

दुनिया को अपना लोहा मनवाना तो भारतीयों की पुरानी आदतों में सुमार है। दुनिया के नक्शें पर तेजी से विकसित होते देशों में भारत का नाम सबसे आगे है। फिर वह शिक्षा हो, सुविधा हो या सुरक्षा, हर क्षेत्र में हम तरक्की के नए आयाम गढ़ रहे हैं। इसी की एक जीती जागती मिसाल है आधी दुनिया को अपने घेरे में लेने वाली मिसाइल अग्नि-5। जिसने पड़ोसी मुल्कों की हवा खराब कर रखी है। प्रतिस्पर्धा रखने वाले देशों ने इस पर अपनी नजरें तिरछी कर लीं हैं। वर्चस्व वाले देशों को अग्नि-5 की धमक से ठेस पहुंची है।

अग्नि-5 के रूप में देश को एक विशालकाय सुरक्षा बल मिला है। हमें दुनिया की नजर में यह दिखाने को मौका मिला है कि हम भी किसी से कम नहीं है। ओड़िशा के व्हीलर द्वीप में अग्नि-5 के सफल परीक्षण ने दुश्मनों के माथे पर बल डाल दिए हैं। अब वह हम पर हमला करने से पहले सौ बार सोचेंगे। अब आधी दुनिया हमारी मिसाइलों की जद में आ गई है। इसके साथ ही हम उन देशों के प्रतिष्ठित क्लब में दाखिल हो गए हैं, जिनके पास पांच हजार किमी से अधिक दूरी तक मार करने वाले अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आइसीबीएम) हैं।

सूत्रों की माने तो परीक्षण के दौरान मिसाइल ने 15 मिनट में अपना निर्धारित लक्ष्य को भेद दिया। सतह से सतह पर मार करने वाली यह मिसाइल चीन समेत पूरे एशिया, ज्यादातर अफ्रीका व आधे यूरोप तक अंडमान से छोड़ने पर आस्ट्रेलिया तक पहुंच सकती है और एक टन तक के परमाणु बम गिरा सकती है। दो और परीक्षणों के बाद इसे 2014-15 तक सेना के हवाले कर दिया जाएगा। अब तक अंतरमहाद्वीपीय प्रहार क्षमता वाली मिसाइलें केवल अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन व ब्रिटेन के पास थीं। अग्नि-5 भारत की सबसे तेजी से विकसित मिसाइल है। इसे महज तीन साल में तैयार किया गया है। इसे अचूक बनाने के लिए भारत ने माइक्रो नेवीगेशन सिस्टम, कार्बन कंपोजिट मैटेरियल से लेकर मिशन कंप्यूटर व सॉफ्टवेयर तक ज्यादातर चीजें स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई हैं।

भारत की पहली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आइसीबीएम) के सफल परीक्षण के बाद रक्षा मंत्री एके एंटनी का कहना था कि देश का कद बढ़ गया है। हम विशिष्ठ देशों के क्लब में शामिल हो गए हैं। उनका इशारा आइसीबीएम क्षमता वाले पी-5 के ताकतवर मुल्कों की तरफ ही था। वैसे भी अमेरिका के साथ नाभिकीय करार के बाद भारत को पी-5 प्लस वन जैसा एक विशिष्ठ दर्जा दिया गया है। चुंकि भारत ने एनपीटी और सीटीबीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, लिहाजा उसे यह बिल्कुल अलग दर्जा दिया गया है। हालांकि, भारतीय राजनयिक सूत्र मानते हैं कि इस सफलता भर से सुरक्षा परिषद में भारत का रास्ता आसान नहीं होता, लेकिन जाहिर तौर पर उसके दावे को एक मजबूती तो मिलती ही है। खात बात है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अग्नि-5 के सफल परीक्षण के बाद किसी बड़े मुल्क की नकारात्मक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बावजूद इसके कि अग्नि-5 की जद में उत्तर अटलांटिका संधि संगठन (नाटो) के भी कई मुल्क हैं। फिर भी नाटो की प्रतिक्रिया आई है कि भारत का परमाणु अप्रसार रिकॉर्ड बेहद अनुशासित, शांतिपूर्ण और शानदार रहा है। हमें उससे कोई खतरा नहीं है।

अग्नि-5 अपने निर्धारित लक्ष्य को पांच हजार किलोमीटर तक भेदने की क्षमता रखती है, लेकिन इसकी असली ताकत तो 8000 किलोमीटर तक भेदने की है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मिसाइल अपने स्थान से आठ हजार किलोमीटर तक भी लक्ष्य को भेद

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