लेखक परिचय

श्रीराम तिवारी

श्रीराम तिवारी

लेखक जनवादी साहित्यकार, ट्रेड यूनियन संगठक एवं वामपंथी कार्यकर्ता हैं। पता: १४- डी /एस-४, स्कीम -७८, {अरण्य} विजयनगर, इंदौर, एम. पी.

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श्रीराम तिवारी

भारत में राजनीति को कुआँर की कुतिया समझ कर सरे राह लतियाने वालों में दिग्भ्रमित विपक्ष और टी आर पी रोग से पीड़ित -प्रिंट,श्रव्य,दृश्य और बतरस मीडिया का नाम पहले आता है.भारत को बर्बाद करने में जुटी पाकिस्तान कि खुफिया एजेंसी आई एस आई,उसके द्वारा प्रेरित -पोषित घृणित आतंकवादियों,अलगाववादियों,नक्सलवादियों,पूंजीवादी -सामंती शोषण कि ताकतों,एनजीओ और स्वनामधन्य तथाकथित सच्चाई -ईम नदारी के ठेकेदार अन्नाओं,योग गुरुओं का नाम उसके बाद आता है.वर्तमान सत्तारूढ़ यूपीए सरकार और कांग्रेस को सत्ता च्युत करने का न तो अभी वक्तआया है और न किसी राजनैतिक ,सामाजिक जन आन्दोलन के प्रहारों की नितांत आवश्यकता ही अपेक्षित है,कांग्रेस को सत्ता विमुख करने में कांग्रेसी खुद सक्षम हैं.यकीन न हो तो जिन राज्यों में उसकी सरकारें अतीत में सत्ताच्युत हुई वहाँ का और जब -जब केंद् में सत्ता से बाहर हुई वहाँ के राजनैतिक सफरनामों पर गौर फरमाकर देख लीजिये. कुछ अपवादों को छोड़कर अधिकांशतः काग्रेस जन खुद ही कांग्रेस के सत्ताच्युत होते रहने के लिए जिम्मेदार रहे हैं.अब यदि वर्तमान दौर मैं विश्व बैंक और आई एम् ऍफ़ निर्देशित नेता और नीतियां इसी तरह जबरियां देश पर लादी जाती रहीं कि गाँव में २६ रुपया रोज और शहर में ३२ रुपया रोज कमाने वाला अब गरीब नहीं कहलायेगा तो  सरकार को २०१४ को होने जा रहे लोक सभा चुनाव में पराजय का मुंह क्यों नहीं देखना चाहिए?

मेरा आशय ये है कि जब सरकार और सतारूढ़ पार्टी में विराजे लोग हाराकिरी पर उतारू हैं तो क्यों खामखाँ लोग बाग़ राजनीति को गन्दा और अपवित्र सिद्द करने पर तुले हैं?जो निपट निरीह अनाडी और व्यक्तिवादी -आदर्शवादी समूहों ,गुटों और व्यक्तियों के रोजमर्रा के आदतन सरकार विरोधी अरण्यरोदन हैं वे तो वैसे भी इस देश के मजबूत प्रजातांत्रिक ढांचे में मौसमी पखेरुओं या कीट पतंगों कि तरह जन्मत�-मरते रहेंगे,किन्तु विराट जनसमर्थन वाले , केडर आधारित ,नीतियों -कार्यक्रमों औरघोषणा पत्रों वाले राष्ट्रव्यापी जनाधार वालेविपक्षी राजनैतिक दलों को यह शोभा नहीं देता कि सिर्फ भंवर में फंसी मछली को आहार बना लिया जाए या रणभूमि में रक्तरंजित धरा में धसे कर्ण के रथ को देखकर विजय श्री का उद्घोष किया जाए.

प्रतिगामी आर्थिक नीतियों और निम्न आय वर्ग की दुर्दशा एक दूसरे के अन्योंनाश्रित हैं ,वर्तमान दौर की असहनीय महंगाई और भृष्टाचार भी पूंजीवादी पतनशील मुनाफा आधारित व्यक्तिनिष्ठ साम्पत्तिक अधिकार की लोलुपता का परिणाम है.इसके बरक्स निरंतर जन लाम-बंदी और जनतांत्रिक जनवादी क्रांति की दरकार है.भारत के संगठित मजदूर,कर्मचारी किसान,केन्द्रीय ट्रेड यूनियनें और वाम मोर्चा लगाता जी जान से इस सर्वजनाहित्कारी उद्देश्य के लिए संघर्षरत थे,संघर्ष रत हैं और जब तलक सामाजिक,आर्थिक,सांस्कृतिक,राजनैतिक असमानता और अमानवीयता का इति श्री नहीं हो जाता तब तलक उम्मीद है कि वे अविराम संघर्ष जारी रखेंगे. संसदीय प्रजातांत्रिक परम्परा में सिर्फ सरकारें बदल जाने ,इस या उस गठबंधन या पार्टी के सत्ता में आने-जाने से किसी भी पूंजीवादी निजाम में आम जनता को न्याय मिल जायेगा � �ह कदापि संभव नहीं.नेता और चेहरों को ताश के पत्तों कि तरह फेंटने से देश की तकदीर नहीं बदल जायेगी, विनाशकारी भृष्ट नीतियों को बदलने और जनाभिमुख कल्याणकारी श्रम समर्थक नीतियों को स्थापित किये बिना कोई भी व्यक्ति तो क्या विशाल राजनैतिक पार्टी भी व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद न करे.

देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी भाजपा में इन दिनों जो चल रहा है वो सिर्फ व्यक्तियों के अहम् का विस्फोट है.आर्थिक ,सामाजिक,वैदेशिक पर्यावरण ,साक्षरता,इत्यादि किसी खास मुद्दे पर सरकार को घेरने और जनांदोलन चलाने के बजाय कोई सद्भावना उपवास पर बैठ जाता है ,कोई रथ यात्रा की हुंकार भरता है और कोई मीडिया के सामने विफर रहा है.प्रधानमंत्री बनने की तमन्ना जिस तरह उछालें मार रही है उससे तो लगता है कि बस वो सत्तासीन होने ही जा रहा है. इन नादानों को यह जानने का सब्र नहीं है कि कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने अभी किसी भी कोण से यह नहीं दर्शाया है कि वो पस्तहिम्मत हो चुकी है.अभी आगामी लोक सभा चुनाव के लिए इतना समय पर्याप्त है कि कांग्रेस अपनी खामियों को दुरुस्त कर लगातार तीसरी बार सत्ता में पहुंचे हालाँकि जब अन्ना एंड कम्पनी राम लीला मैदान में केंद्र सरकार को गरिया रही � ��ी तब कोई सर्वे में बताया गया था कि मनमोहन सरकार की साख घटी है.लेकिन उतनी नहीं घटी कि बस अब सिंहासन खली होने जा रहा है तो ख़ुशी के मारे कोई राजघाट पर नाच उठता है,कोई अपने जन्मदिन पर उपवास का प्रहसन करता है,कोई अपनी धवल कीर्ति को दाव पर लगाने को उद्धृत रहता है.

दरसल भाजपा में जो प्रथम पूज्य की होड़ मची है उसमें उसके सभी घोषित -चर्चित चेहरे कार्तिकेय भले ही हो जाएँ किन्तु गणपति वही वन पायेगा जो धर्मनिरपेक्षता की कसोटी पर खरा नहीं तो कम से कम अटल बिहारी या वक्रतुंड तो होगा ही.भाजपा कि सबसे बड़ी ताकत उसका संघ आधारित काडर है और भाजपा में संघ का दखल ही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है.भविष्य में यदि यूपीए कि हार और एनडीए की जीत होती है तो जिस व� �यक्ति को संघ का आशीर्वाद होगा वो कभी भी प्रधानमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुँच सकता.भले ही नितीश्कुमार ,शरद यादव,अकाली,शिवसेना नवीन पटनायक ,झामुमो या मायावती संघ के मुरीद हो जाएँ किन्तु भारतीय मूल्यों की वजह से.भारतीय वैविध्य की वजह से,भारतीय प्रजातांत्रिक आकांक्षाओं की वजह से एक्चालुकनुवार्तित्व के प्रसाद पर्यंत वाला व्यक्ति प्रधानमंत्री नहीं बन सकता.नरेंद्र मोदी जी को य� �ि संघ ने भावी प्रधानमंत्री मान लिया है तो समझो वे आजीवन प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री रहेंगे.

संघ को चाहिए कि नेत्रत्व की दौड़ में हस्तक्षेप न करते हुए भाजपा को स्वतंत्र रूप से प्रजातांत्रिक तौर तरीके से अपने और अपने अलायंस पार्टनर्स की सहमती आधारित सर्व स्वीकार्य नेता ,सामूहिक नेत्रत्व की अवधारणा और न्यूनतम साझा कार्यक्रम आधारित जनोन्मुखी नीतियों तय करने में कोई बाह्य संविधानेतर दवाव स्वीकार नहीं करना चाहिए तभी भाजपा और एन डी ऐ की केंद्र में सरकार और भाजपा का प� �रधानमंत्री बन सकता है.लगातार नागपुर में जिस किसी की उठक-बैठक कराओगे उसको देश की १२० करोड़ आवाम अपना नेता कैसे स्वीकार कर सकती है?

सुप्रीम कोर्ट के किसी अंतरिम वर्डिक्स या अमेरका के दो-चार सीनेटरों द्वारा मोदी को संदेह का लाभ मात्र दिए जाने का तात्पर्य भारत का राज सिंहासन सौंपना नहीं है.नरेंद्र मोदी वैसे भी सामूहिक नेत्रत्व,प्रजातांत्रिक कार्य प्रणाली से कोसों दूर हैं.उनकी व्यक्तिवादी हठधर्मिता से भाजपा को कोई फायदा नहीं होने वाला.गुजरात विकाश के ढिंढोरे पीटने वाले और कुछ नहीं तो अन्य भाजपा शा� �ित राज्यों की जनता और वहाँ के भाजपा नेत्रत्व को तो नीचा दिखा ही रहे हैं.ऐंसे में मोदी जी का समर्थन शिवराजसिंह,रमनसिंह या कर्णाटक,उत्तरांचल के सी एम् क्यों करने चले.इन हालातों में नितीश,नवीन,चौटाला,कुलदीप ठाकरे या बादल को भी मोड़ो जैसे का समर्थन करने में कितनी इन्सल्ट होगी यह अभी मूल्यांकित कर पाना संभव नहीं है.

शरद यादव .पासवान,लालू,मुलायम,मायावती,फारुख,ममता,जयललिता अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि बनाए रखने के लिए भाजपा से यदि सम्बन्ध बनायेंगे तो अटल बिहारी की लाइन का कोई भी दोयम नेता स्वीकार कर लेंगे किन्तु संघ प्रिय व्यक्ति को वे सहज स्वीकारेंगे इस में संदेह है.

एन डी ऐ ही नहीं तीसरे मोर्चे की भी भविष्य में सशशक्त होने की सम्भावना है.क्योंकि सत्तारूढ़ यूपीए का यदि पराभव होगा तो अकेले भाजपा ही ५५० सीटों पर काबिज नहीं होगी.विगत विधान सभा चुनावों में पांच राज्यों में से चार में भाजपा का खता भी नहीं खुला था केवल असम में ५ विधायक जीते जबकि पूर्व में वहाँ १८ विधायक थे.इसी तरह जिन राज्यों में वो गठबंधन में शामिल होकर सत्तारूढ़ है वहाँ भी भेल ा नहीं कर लिया.खुद नितीश ,नवीन चौटाला और कर्नाटक में भाजपा ही संकट में है.अकेले एम् पी ,छ गा,और गुजरात के भरोसे दिल्ली के सिंहासन पर अपने हिंदुत्व ध्वजाधारी को बिठाने की तमन्ना पालने वालों को निराशा ही हाथ लगेगी.ऐंसे में भाजपा के बड़े नेताओं का कुर्सी संघर्ष कोरी मृग मरीचिका है.जनता के सवालों पर तीसरे मोर्चे और वाम मोर्चे का साथ देकर भाजपा और एन डी ऐ सत्ता में आ सकता है वशर्ते उसक नेता ’संघम शरणम् गच्छामि’ का मन्त्र न पढ़ें.

8 Responses to “नरेंद्र भाई अभी दिल्ली दूर है…”

  1. vimlesh

    तिवारी जी उवाच :=Respected shri vimleshji ,you may be right or wrong ; whats the policy
    and programme of congres that is not the matter of my this
    article-narendr bhai dilli abhi door hai’.your language about shri
    atal bihari vajpei not expectable.this is your negetive verdic not my
    words and not my opinion.thanks for comments but very sorry to say
    that your thinking is very distructive and meaningles.

    आदरणीय तिवारी जी सादर अभिवादन

    प्रत्येक व्यक्ति का कोई भी कार्य करने का एक अंदाज होता है आपका मेरा क ख गा यानि इसमें दो राय नहीं है भले ही वे सामान विचारो वाले ही क्यों न हो किन्तु उनकी शैली से विभिन्नता आ ही जाती है
    ना तो आपसे मेरा कोई दुराग्रह है न ही कोई विवाद जैसी बात ना ही मेरा कोई ऐसा इरादा है .

    फिर भी अपने कमेन्ट के बारे में बताना चाहूँगा वो मेरी शैली है मेरी शैली क्या है?
    “जैसे को तैसा ”
    न तो मैंने आपको कम्युनिस्ट कहा है ना ही बीजेपी विरोधी नहीं यूपीए समर्थक.

    अब जरा अपने लेख पर आइये

    +++++++++++++++++++
    भारत में राजनीति को कुआँर की कुतिया समझ कर सरे राह लतियाने वालों में दिग्भ्रमित विपक्ष और टी आर पी रोग से पीड़ित -प्रिंट,श्रव्य,दृश्य और बतरस मीडिया का नाम पहले आता है.भारत को बर्बाद करने में जुटी पाकिस्तान कि खुफिया एजेंसी आई एस आई,उसके द्वारा प्रेरित -पोषित घृणित आतंकवादियों,अलगाववादियों,नक्सलवादियों,पूंजीवादी -सामंती शोषण कि ताकतों,एनजीओ और स्वनामधन्य तथाकथित सच्चाई -ईम नदारी के ठेकेदार अन्नाओं,योग गुरुओं का नाम उसके बाद आता है.वर्तमान सत्तारूढ़ यूपीए सरकार और कांग्रेस को सत्ता च्युत करने का न तो अभी वक्तआया है और न किसी राजनैतिक ,सामाजिक जन आन्दोलन के प्रहारों की नितांत आवश्यकता ही अपेक्षित है
    +++++++++++++++++
    तब कोई सर्वे में बताया गया था कि मनमोहन सरकार की साख घटी है.लेकिन उतनी नहीं घटी कि बस अब सिंहासन खली होने जा रहा है तो ख़ुशी के मारे कोई राजघाट पर नाच उठता है,कोई अपने जन्मदिन पर उपवास का प्रहसन करता है,कोई अपनी धवल कीर्ति को दाव पर लगाने को उद्धृत रहता है.

    तिवारी जी अब आप अपनी भाषा पर ध्यान दे जो अति विद्वत्व को किस प्रकार प्रदर्शित कर रही है

    ये प्रहसन क्या होता है

    राहुल गाँधी जो करते है उसे आप क्या कहेंगे

    यदि आप किसी का समर्थन करते है तो जरूरी नहीं है की कोई दूसरा भी उसका समर्थन करे .
    आपको बीजेपी में बुराई नजर आती है मुझे नहीं अब इसमें न तो आपका कोई दोष है न ही मेरा

    सब समझ समझ का फेर है .

    बात यही पर खत्म

    यदि आपको मेरी टिप्पणी से इतना ज्यादा बुरा लगा तो भविष्य के लिए आपको भी आपनी तरफ से पहल करनी होगी .
    हालाँकि मैंने आपकी कई पोस्टो पर सकारात्मक टिप्पणिया की है.फिर भी यदि आप अपनी शैली नहीं बदल प् रहे है तो मुझे खेद है.

    धन्यवाद

    Reply
  2. मुकेश चन्‍द्र मिश्र

    Mukesh Mishra

    श्रीराम तिवारी जी अगर “संघ” ना होता तो आज आपका नाम भी “मोहमम्द श्रीराम खान” होता और पूरे भारत का नाम पाकिस्तान हो गया होता, ये तो संघ का दृढनिश्चय और जुझारूपन है की वो आप जैसे इतने जयचंदों के होते हुए भी भारत माँ और उसकी संस्कृत के लिए बिना किसी स्वार्थ के लड़ रहा है. आपको लालू और पासवान सेकुलर लगते हैं वो लालू जिसने गोधरा कांड को कारसेवकों द्वारा स्टोप जलाने के कारन हुयी दुर्घटना बताया और पासवान जो लादेन जैसे दिखने वाले को साथ लेकर घूमता है. वैसे फोटो में आप एक परिपक्व आदमी नजर आ रहे हैं और राज के कमेन्ट पर अगर आप रिस्पोंस कर सकते हैं तो उम्मीद है की “विमलेश जी” द्वारा कही गयी बातों का उत्तर भी देंगे अगर उत्तर ना मिले तो “संघ” में जाईये और स्वयं सेवक बन के देश की सेवा कीजिये.

    Reply
  3. vimlesh

    वर्तमान सत्तारूढ़ यूपीए सरकार और कांग्रेस को सत्ता च्युत करने का न तो अभी वक्तआया है और न किसी राजनैतिक ,सामाजिक जन आन्दोलन के प्रहारों की नितांत आवश्यकता ही अपेक्षित है,

    देश में सब कुछ कितने करीने से हो रहा है देखि एक झलक

    १- कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए ने मैक्‍समूलर और अन्य अंग्रेजो द्वारा लिखे गए इतिहास को हमें पढ़वाया और पूरे समाज में कड़वाहट घोली,हमारे वास्तविक सपूतो का इतिहास में सही तरीके पेश नही किया ये सब पड़ कर देश में देशी विदेश गधो की फौज तैयार कर रही है

    २- कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए ने जातिवाद को बढ़ावा दिया और जातिवाद की एक परंपरा हर जगह कायम करवाई ,

    ३-कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए ने अंग्रेजो द्वारा बनायीं गयी उन व्यवस्थाओ को हमारे महान देश में लागु किया जो की हमारी इस हमारी सांस्कृतिक धरोहर को रोज ब रोज विकृत कराती जा रही है
    ,
    ४-कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए ने उस देश को गाय का मांस निर्यातक देश बना दिया, जहा पर की गाय हत्या पाप है और गाय को पूज्य माता का दर्जा दिया जाता है,

    ५-कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए ने हिन्दुओ को क्रिस्चियन बनाने के लिए धर्म परिवर्तन की व्यवस्थाओ को बढ़ावा दिया और उनको पोसा खासकर जब से सोनिया मैनो के हाथ में सत्ता की ताकत आयी है,

    ६- कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए के ज़माने में नए नए गाय काटने के केंद्र बनाये जा रहे है, जो एकदम अस्वीकार्य है, हम to गोवध पर पाबंदी की maag कर रहे है.

    ७-कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए ने भ्रष्टाचार को को राजनैतिक विशेषाधिकार बना दिया और सभी भारतीयों को भ्रष्टाचार से ट्रस्ट कर दिया है,

    ८-कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए ने जानबूझ कर महगाई को बढाया है ताकि जनता का ध्यान परेशानी से बाहर आकर सरकार के भ्रष्टाचार पर न टिक जाये,

    ९- कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए ने हिन्दुओ को आतंकवादियों की कतार में खड़ा कर दिया जब की हिंदुत्व टिका ही है अहिंसा के सिद्धांत पर,
    जब हिन्दुओ के मेधावी बच्चे आतंकवादी हो जायेंगे समझो उसी दिन से दुनिया अपने आप समाप्त हो जाएगी.

    १०- कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए ने आयुर्वेद को कुचला और अंग्रेजी दवाओ को आगे बढाया.

    ११- कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए ने हमेशा ही हिन्दू और मुसलमानों को आपस में लड़ाया जो की खून से वास्तव में सगे भाई ही है, और इस आड़ में अंग्रेजो के धर्म ईसाई धर्म को खूब छुट देकर पाला पोसा और हर जगह विदेशी पैसो से मिशनरी खुलवा दिया.

    १२- एक तरफ तो कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए भारतीय हिन्दू संतानो के चढ़ावे के पैसो को सरकार का पैसा बताती है और अपने पास रख लेती है तो दूसरी तरफ इसाइयों को विदेश से पैसा दिलवाती है,

    १३-भारत की जनता की गाढ़ी कमायी को विदेश में काले धन के रूप में जमा किया है उस पर पिछले ६३ साल में कोई कार्यवाही नहीं किया, क्या सरकार के बिना जानकारी के इतना पैसा विदेश में जमा किया जा सकता है, कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए ने विदेशी सौदों में कमीशन को जायज बनाया और हद तो तब हो गयी जब खुद प्रधानमंत्री कमीशन लेने लगे.

    १४- कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए के ज़माने में मिडिया सिर्फ सरकार और इसी धर्म के लिए काम कराती है, जनता और देश हित से उसका कोई सरोकार नहीं है, नीरा राडिया जो एक विदेशी है, उसने क्या किया सरकार क्यों नहीं आम जन को बताती है.

    १५-कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए इन्टरनेट से सारी जानकारी जो की कांग्रेस के विरोध में है, हटवा रही है और कांग्रेस विरोधियो का ईमेल आई दी ब्लाक करवा रही है,

    १६-कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए हमेशा से हिन्दुओ को मुसलमानों के खिलाफ एक हौव्वा के रूप में खड़ा किया, जब की सत्य तो यह है की जो लोग ज्यादा धार्मिक होते है, वह जायदा अच्छे इंसान होते है, जो अपने धर्म को समझता है वह दुसरे धर्म की भी इज्जत करता है, कांग्रेस ने हमेशा ही मुसंमानो को सिर्फ वोट समझा, भारतीय नहीं,

    १७-कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए का इतिहास रहा है, जब जब उस पर ख़राब समाया आया है, भारत में हिन्दू-मुस्लिम दंगे हुए है और सरकार ने खूब बयानबाजी की है,
    हाल फिलहाल फिर कोई दंगा होने ही वाला है सरकार के सौजन्य से क्योकि बम धमाको से इस बेवकूफ जनता का ध्यान कम हटता है.

    १८- कांग्रेस व सत्तारूढ़ यूपीए ने कभी किसी राष्ट्रवादी विचारधारा को पनपने ही नहीं दिया, जिसने राष्ट्रवाद का नारा दिया, वह पृष्ठभूमि से ही गायब होता चला गया,

    १९- भारत में कोई भी व्यक्ति आतंकवादी नहीं है, बम फोड़ना आतंकवाद नहीं है, हमारी सेना तो रोज हजारो बम फोड़ती है, आतंकवाद किसी के हक़ को जबरिया दबाने पर निकला हुआ प्रतिकार है, यदि भ्रष्टाचार पूरी तरह से समाप्त हो जाय तो जितने गलतवाद है, सब समाप्त हो जायेंगे, यह तो गारंटी है,

    २०-कांग्रेस ने सदा ही हमारी पुरातन सामाजिक मान्यताओ को ह्रास किया है और सब चीजो को पूँजीवाद से जोड़ दिया,

    २१- इटली और स्विट्जर्लैंड के १२ बैंको को भारत में क्यों खुलवाया गया है, इसमे किसका पैसा जमा होता,

    २२- कत्रोच्ची के बेटे को अंदमान द्वीप पर तेल की खुदाई का ठेका २००५ में किसने दिया जब की कत्रोच्ची इस महान भारत देश का विदेशी अपराधी है,

    इतना सब होने के बाद भी समाज के पदेलिखे लोग जो सायद अपने आप को समाज का सर्वे सर्व भी समझते है उनकी नजरो में …

    हो रहा भारत निर्माण

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  4. vimlesh

    श्री रामतिवारी जी द्वारा लिखा गया यह लेख सचमुच इतिहास की अमूल्य धरोहर के स्वरूप है .
    >>>>>>>>>>>
    अटल बिहारी की लाइन का कोई भी दोयम नेता स्वीकार कर लेंगे
    ***********

    सच लिखा तिवारी जी ने अटल बिहारी बाजपेयी से नीच गिराहुआ बकवास नेता ना तो आज तक पैदा हुआ और न ही पैदा होगा .

    क्या दूर द्रस्ती है तिवारी जी की

    ऐसी दूर द्रस्टिवाले युग पुरुष को १०००६८ बार नमन

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  5. श्रीराम तिवारी

    shriramt tiwari

    हे गर्धभ पुत्रो तुम्हें अपने आकाओं से पूंछना चाहिए था की रसिया और सोवियत संघ में क्या फर्क है ?जिस सोवियत संघ पर तुम पुराना घिसा पिटा जुमला वमन कर रहे हो उसे नष्ट हुए २५ साल हो
    चुके हैं. आज का रसिया और भारत दोनों एक जैसे हैं.
    मेरे प्रस्तुत आलेख में एक शब्द भी कम्युनिस्टों या सोवियत संघ के बारे में नहीं है फिर भी विमलेश जैसे लफंगों और राज जैसे टुच्चों को मेरे आलेख में कम्युनिस्म का भूत नज़र आ रहा है तो इसके लिए मैं क्या कर सकता हूँ?

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  6. vimlesh

    राज जी अभी अभी फोन आया है रूस में बारिस हो रही है

    घर से निकलते वक्त छतरी लेना मत भूलना .

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  7. RAJ

    अबे पगले क्या बकवास किये जा रहा है निधर्मी कहिके कोम्मुनिस्ट पगले

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