श्रीराम तिवारी

लेखक जनवादी साहित्यकार, ट्रेड यूनियन संगठक एवं वामपंथी कार्यकर्ता हैं। पता: १४- डी /एस-४, स्कीम -७८, {अरण्य} विजयनगर, इंदौर, एम. पी.

हलाला ‘कानून और ‘तीन तलाक’ जैसे बर्बर कानूनको त्यागने में दिक्कत क्या है ?

जब दुनिया के अधिकांश प्रगतिशील मुस्लिम समाज ने ‘तीन तलाक’ को अस्वीकार
कर दिया है , तब भारतीय मुस्लिम समाज को इस नारी विरोधी ‘हलाला ‘कानून
और ‘तीन तलाक’ जैसे बर्बर कानूनको त्यागने में दिक्कत क्या है ? सदियों
उपरान्त इस आधुनिक वैज्ञानिक युग में भी ,हम हर गई गुजरी परम्परा को
क्यों ढोते रहें ?

जिन्हें आप्रेशन सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत चाहिए वे नोट करें !

जो लोग अभी सत्तामें हैं और इस आपरेशन सर्जिकल की छुद्र कार्यवाही को
‘धजी का साँप’ बता रहे हैं।वे सत्ता समर्थक चाटुकार लोग यदि इस मामूली
कार्यवाही की अतिरञ्जित वयानबाजी केलिए जिम्मेदारहैं ,तो सत्ताविरोधी और
सनकी लोग भी बिना आगा-पीछा सोचे ही अपनी भारतीय फ़ौजसे उसकी काबिलियत
का सबूत मांग रहेहैं जो कि वेहद निंदनीय और शर्मनाक कृत्य है।

इतिहास साक्षी है भारत ने हमेशा बचाव में ही हथियार उठाये हैं।

अपनों द्वारा बार-बार ‘ठगे’जाने के वावजूद संयुक्त परिवार की उपादेयता
पर मुझे बड़ा अभिमान है ,पांच हजार साल से जिस कौम में ,जिस कुल में
भगवद्गीता के बहाने ‘महाभारत’ पढ़ाया जाता रहा हो , उस कुल के तमाम
कुलदीपक पार्थ या पार्थसारथी भले ही न बन सके हों ,किन्तु
‘कौरव-कुलांगार’ बनने में कहीं कोई चूक नहीं हुई।

युध्द होगा तो पाकिस्तान खत्म हो जाएगा !

पाकपरस्त आतंकियों ने  भारतको लहूलुहान कर रखा है ,क्या पाकिस्तान के
वुद्धिजीवियोँ  को इतना सहस नहीँ कि  इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठायें
?क्या उन्हें यह नहीं मालूम कि पाकिस्तान द्वारा भारत पर थोपे गए यद्ध का
नतीजा क्या होगा ?

उनकी नजर में शायद हिंदी शासितों की भाषा है,और अंग्रेजी शासकों की भाषा है।

श्रीराम तिवारी वेशक दुनिया के अधिकांस प्राच्य भाषा विशारद ,व्याकरणवेत्ता ,अध्यात्म -दर्शन के अध्येता और

बिल्ली काली हो या सफेद यदि चूहों को मारती है तो हमारे काम की है ”-माओत्से तुंग !

किसी भी आदर्श लोकतान्त्रिक व्यवस्था में विपक्ष और आम जनता द्वारा ‘सत्ता पक्ष ‘की स्वस्थ

इस चालू ढर्रे से भारतीय युवाओं को किसी धर्मनिपेक्ष -क्रांतिकारी विचारधारा से लेस नहीं किया जा सकता।

अंग्रेजों की जै -जैकार करने  वाली विचारधारा के आधुनिक उत्तराधिकारी अब आज के स्वयंभू राष्ट्रवादी स्थापित हो चुके हैं। तमाम

किकू शारदा ने अनजाने में उस दाढ़ी में हाथ दाल दिया ,जिसमें असंख्य साँप -बिच्छू पल रहे हैं।

गोस्वामी तुलसीदास जी कह गए हैं कि “प्रीत विरोध समान सन ,,,,,”अर्थात दोस्ती -दुश्मनी तो