लेखक परिचय

वीरेंदर परिहार

वीरेंदर परिहार

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वीरेन्द्र सिंह परिहार 

वस्तुतः कांग्रेस पार्टी और छद्म धर्म निरपेक्षता-वादियों की समस्या यह है कि मोदी सुशासन के प्रतीक ही नही, आईकान भी बन चुके है। विगत कई वर्षों से उनकी रेटिंग देश में बतौर सर्वश्रेष्ठ मुख्यंमत्री की है। देश के लिए ताजा जनमत-सर्वे में उनको प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखने वालों की संख्या 24 प्रतिशत है, जबकि राहुल गांधी को मात्र 17 प्रतिशत लोग ही इस कुर्सी पर देखना चाहते है। यह उपलब्धि इसलिए और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है कि नरेन्द्र मोदी को उनकी पार्टी भाजपा ने ही उनको कभी भी बतौर प्रधानमंत्री प्रोजेक्ट नही किया, जबकि राहुल के साथ पूरी कांग्रेस पार्टी बिछी रहती है।

अन्ना हजारे एवं सिविल सोसाइटी के आन्दोलन से यह स्पष्ट है कि पूरा देश कुशासन से त्रस्त है, और देश में सुशासन चाहता है। सुशासन के बल पर मोदी गुजरात में तीसरी बार भारी जीत दर्ज कर अनुभवहीन, अपरिपक्व और उद्धत राहुल गांधी के मुकाबले काफी बढ़त ले चुके हैं। अब जब राहुल गांधी सैम पित्रोदा को बढ़ई बताकर या अपने को ब्राह्मण बताकर सत्ता की सीढि़या चढ़ना चाहते है। वही धीर-गंभीर नरेन्द्र मोदी ने जाति या सम्प्रदाय आधारित राजनीति का कभी भी रंच-मात्र सहारा नही लिया। पिछड़े वर्ग से संबंधित होते हुए भी अपने को कभी भी बतौर वोट की दृष्टि से पिछड़ा प्रचारित नही किया। आज सिर्फ भारत में ही नही, पूरी दुनिया उनका लोहा मान चुकी है, तभी तो देश में ही नही, लंदन की इकोनामस्टि और अमेरिका की टाइम्स जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं ने उन्हे भारत में प्रधानमंत्री पद का सबसे सशक्त दावेदार बता दिया है।

मोदी के चलते गुजरात आज देश में सर्वाधिक कपास उत्पादन करने वाला राज्य हैं इसके साथ वह सर्वांधिक मूंगफली उत्पादक राज्य भी है। कपास वह इतनी उत्कृष्ट पैदा करता है कि विदेशों तक में खास तौर पर चीन तक में उसकी मांग है। गुजरात का गन्ना और दुग्ध उत्पादन मे भी प्रमुख स्थान है। उसके दूध के उत्पाद तो पूरे देश में अपनी विशिष्ट बाजार बनाए हुए है। गुजरात की आज देश में औद्योगिक उत्पादन में 39 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। देश का 80 फीसदी नमक उत्पादन गुजरात में है तो कपड़ा उत्पादन में उसकी भागीदरी 25 प्रतिशत है। पेट्रोलियम उत्पाद के क्षेत्र में गुजरात की भागीदारी 67 फीसदी की है, तो देश में 40 फीसदी दवाओ को निर्माण एवं उत्पादन गुजरात में हो रहा है। बेहतर सड़क, दूरसंचार, मजबूत आधारभूत ढ़ाँचे, सटीक वैज्ञानिक सलाह और सुगम बिक्री-तंत्र के चलते गुजरात का कृषि-उत्पादन पचास हजार करोड रू. के पार पंहुच गया है। पूरे देश में कृषि विकास-दर जहां दो से ढ़ाई प्रतिशत के आस-पास है, वहीं गुजरात में कृषि विकास-दर दस प्रतिशत तक पंहुच चुकी है, जो कि सम्पूर्ण विश्व में सर्वाधिक है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2001 में राज्य का कृषि उत्पादन मात्र नौ करोड़ रू. था जो अब तक पचास हजार करोड़ रू. पंहुच चुका है। एक अध्ययन के अनुसार गुजरात में नब्बे प्रतिशत कृषि क्षेत्र की सिंचाई भूमिगत जल से की जाती है। मात्र 10 प्रतिशत की सिंचाई भूतल के जल-स्त्रोतों से होती है। गुजरात की ग्रामीण-सड़के पूरे देश में सर्वश्रेेष्ठ है। पिछले दशक में गुजरात में ऐतिहासिक रूप से जैसा पूंजी-निवेश हुआ। उससे वह आटोमोबाइल हब के रूप में विकसित हो चुका हैं। देश के 8 फीसदी गुजरातियों की ये उपलब्धियां अविश्वसनीय भले लगती हो लेकिन है-वास्तविक। विश्व प्रसिद्ध पत्रिका फोब्स गुजरात को विकास का आर्थिक पावर हाउस दो वर्ष पूर्व ही बता चुकी है।

अब देश में विगत कई दशको से गंगा-कावेरी समेत देश की प्रमुख नदियों को जोड़ने की बात चल रही है। 1999 से 2004 के मध्य एन0डी0ए0 शासन के मध्य इसके लिए 60 हजार अरब की महत्वाकांक्षी योजना बनाई गई थी। लेकिन यू.पी.ए. सरकार आते ही उक्त महत्वाकांक्षी योजना को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। भले देश को सूखा और बाढ़ दोनो ही विभीषकाओ ंसे मुक्त करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय केन्द्र सरकार को देश की प्रमुख नदियों को जोड़नें की बात कह चुका हो। पर आंकठ भ्रष्टाचार और घोटालों में लिप्त सरकार के पास ऐसी परियोजना के लिए न तो संसाधन है, और न ही इच्छाशक्ति। लेकिन एक राज्य के मुख्यमंत्री रहते होते और सीमित संसाधनों के बावजूद नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में वह करिश्मा कर दिखाया। जो साबरमती नदी गर्मियों में सूख जाती थी और नर्मदा का पानी बाढ़ के रूप में गुजरात पर कहर ढ़ाता था। उस साबरमती नदी को नर्मदा नदी से जोड़ देने से साबरमती नदी से अहमदाबाद शहर को भरपूर पानी मिल रहा है। इससे गुजरात में जो अन्य नदियां भी सूखी रहती थी, वह भी जलमग्न रहती है। गुजरात में इन नदियों को जोड़ने का दूरगामी परिणाम यह है कि सिर्फ नदियों ही जल से भरपूर नही रहती, बल्कि अन्य जलाशय, कुएं एवं ट्यूबबेल भी रिचार्ज रहते है। उत्तर गुजरात का बनास कांठा जिला सदैव सूखा-पीडि़त रहता था, मगर अब ऐसा कतई नही है। नर्मदा परियोजना के माध्यम से गुजरात की 23 नदियां जुड जाने से गुजरात में एक क्रांतिकारी बदलाव आ गया है, और गुजरात पूरी तरह सूखा, बाढ़ एवं जल-संकट से मुक्त हो चुका है।

कुछ वर्षो पूर्व जब पूरे देश में आंतकवादी पूरे देश मे बम-विस्फोट कर हजारो लोगों की जान ले रहे थे, और पूरे देश को त्रस्त किए हुए थे। ऐसी स्थिति में 26 जुलाई 2008 को आंतकवादियों ने जब अहमदाबाद में श्रृंखलाबद्ध बम-विस्फोट किया तो कुछ ही दिनों में मोदी की पुलिस ने उक्त विस्फोट के जिम्मेदार सारे आंतकियो को पकड़ लिया। और एक तरह से तत्कालीन तौर पर उनका नेटवर्क ध्वस्त कर उनकी कमर तोड़ दी। इतना ही नही, इससे जयपुर, बगलौर और दूसरे आंतकी विस्फोटो का भी खुलासा हो गया। जबकि इसके पूर्व देश के दूसरे हिस्सों में आंतकी बम-विस्फोट कर आराम से अपना काम करते रहते थे।

वर्ष 2002 के गुजरात दंगों को लेकर मोदी के विरूद्ध बहुत कुछ अब तक प्रचारित किया जा रहा है। लेकिन यह बहुत बडी सच्चाई है कि सन1970 से लेकर 2002 के बीच 443 दंगों का इतिहास रखने वाला गुजरात पूरी तरह दंगा-मुक्त हो चुका है। अब इन दंगों में जो लोग मुस्लिमों की हत्या का आरोप लगाते है। उन्हे पता होना चाहिए कि इन दंगों में 662 मुस्लिमों के साथ 190 हिन्दू भी मारे गए, जिनमें 80 हिन्दू पुलिस की गोली से मारे गए। जबकि 1968 के अहमदाबाद के दंगों में ही 1800 लोग मारे गए थे। अब जिन्होने अपनी राजनीति या न्यस्त-स्वार्थो के तहत मोदी को अपराधी बताने की ठान ली हो, उनकी बात अलग है, वरना सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित एस.आई.टी. द्वारा यह कहे जाने के बाबजूद की मोदी के विरूद्ध दंगों मंे संलिप्तता को लेकर कोई भी प्रथम-दृष्टया साक्ष्य नही है, बांकी लोेगों के भ्रम का कुहांसा दूर हो जाना चाहिए। इसके पूर्व गुजरात दंगों के लिए गठित नानावटी आयोग भी इन दंगों में मोदी की किसी किस्म की संलिप्तता से इंकार कर चुका है। अब सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा इस मामले में बनाए गए न्याय-मित्र राजू रामचन्दन ने भले मोदी को दोषी मानने का राग अलापा हो। लेकिन उसका आधार इतना कमजोर है कि यह बात भी किसी विशेष-प्रयोजन के लगती है।रामचन्दन का कहना है कि संजीव भट्ट जो एक पुलिस अधिकारी हैं, वह कैसे राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ इतने गंभीर आरोप लगाएंगे? अब एस.आई.टी. तो अपनी जांच मंे बता चुकी है कि 27 फरवरी की उक्त बैठक में संजीव भट्ट मौजूद ही नही थे। अब यदि संजीव भट्ट उक्त बैंठक में मौजूद थे, और मोदी ने ऐसा कुछ कहा था तो राजू रामचन्दन को कुछ तो प्रमाण देना था। ऐसा अनुमान लगा लेना कि कोई व्यक्ति यदि कुछ कहा है तो वह सच है, यह न तो विधि के मापदण्डों के अनुकूल है, और न न्याय के। फिर आखिर में जांच किस बात की की जाती है। लाख टके की बात यह कि संजीव भट्ट खुद स्वीकार कर चुके है, मोदी को फंसाने के लिए उन्होनेे झूठे कथन किए, क्योकि विपक्ष के नेता द्वारा उन्हे महंगे उपहार दिए गए।

अब 2002 के दंगों को लेकर मोदी के विरूद्ध चाहे जितना हो-हल्ला मचाया गया हो, और आगे भी मचाया जावे। पर यह एक सच्चाई कि मुस्लिमों का हत्यारा प्रचारित करने के बाबजूद पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को गुजरात में 24 प्रतिशत मुसलमानों का समर्थन मिला था। वर्ष 2008 मे गोधरा नगर निगम में जहां मुस्लिमों का बाहुल्य है, वहा पर भी भाजपा को विजय मिली। कथनाल विधान सभा जो मुस्लिम बाहुल्य है, वहां का उपचुनाव भी भाजपा जीत चुकी है।सच्चर कमेटी की रिपोर्ट कहती है कि पूरे देश में मुसलमानों की तुलना में गुजराती मुसलमान सबसे संपन्न और खुशहाल है। औसतन वह दूसरे प्रांतों की तुलना में 20 से 25 प्रतिशत ज्यादा कमाते है।

वस्तुतः मोदी की उपलब्धियां इसलिए भी और अभिनंदनीय है कि वह बहुत ही विपरीत परिस्थितियों में पाई गई।विरोधी केन्द्र सरकार, छद्म निरपेक्षतावादियों के लगातार हमले और मीडिया के एक बड़े वर्ग के सतत हमलों के बाबजूद मोदी ने भगवान शंकर की तरह विष पिया और गुजरात की जनता को अमृत-पान कराया। वस्तुतः यदि कांग्रेस और दूसरे धर्म-निरपेक्ष इस तरह से मोदी के विरोध में खड़ें है, तो उसके मायने है-पहला मुस्लिम वोटो की गोलबंदी अपने पक्ष में करना और दूसरे उन्हे यह भी पता है कि राहुल, मोदी के समक्ष टिकने वाले नहीं।

अब समय आ गया है कि भाजपा मोदी को प्रधानमंत्री पद को उम्मीदवार बेझिझक घोेषित कर दे। इससे यदि भाजपा की कुछ सहयोगी पार्टिया तिनकती है, तो उसकी भी परवाह करने की जरूरत नही है। क्योकि मोदी एक ऐसा व्यक्तित्व है, जो पूरे देश को विकास की बुलंदियों तक ले जा सकते है, गरीबी को अतीत की बातें बना सकते है। कोटा पद्धति को किनारे लगा सकते है। क्योकि गरीबी के चलते ही इतनी ज्यादा कोटा पद्धति-आरक्षण की मारामारी है। मोदी आंतकवाद को जड़-मूल से मिटा सकते है, चाहे वह जेहादी आंतकवाद हो या माओवादी आंतकवाद हो। मोदी दंगा-मुक्त भारत की गारण्टी है। मोदी देश में सामाजिक समरसता लाकर देश को एकसूत्र में पिरोकर एक महान, समृद्ध और ताकतवर राष्ट्र बना सकते है। इस बात से आशंकत होने की जरूरत नही कि मोदी के चलते भाजपा को मुस्लिमों का कतई वोट नही मिलेगा। पहली चीज तो ऐसा होगा नही, क्योकि विचारशील, प्रगति के पक्षधर और राष्ट्रवादी-धारा से जुड़े मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग मोदी के साथ खड़ा होगा। यदि ऐसा नही भी हुआ तो रामजन्मभूमि आंदोलन की तरह मोदी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी से अपने-आप एक बड़ा आन्दोलन खड़ा हो जाएगा। सरदार पटेल को देश का प्रथम प्रधानमंत्री न बनाकर जो भयावाह भूल की गई थी, यह उस ऐतिहासिक भूल-सुधार का भी अवसर होगा, क्योकि मोदी में लोग सरदार पटेल का अक्स देखते है।

अंत में मोदी के लिए कुंवर बेचन के शब्दों में यही कहा जा सकता है:-

जिस दिए में लौ होगी वह विराधों में और चमकेगा।

किसी दिए पर अंधेरा उछाल कर देखो।। 

2 Responses to “नरेन्द्र मोदी अंधेरों में और चमकेगा …”

  1. डॉ. मधुसूदन

    dr. madhusudan

    भारत अब अवसर गवांया तो
    अषाढ़ चूक जाओगे, फिर बैठना किसी अवतार की राह देखते
    (१) मोदी ने अभी तो केवल शासन का भ्रष्टाचार मिटाया है, अफसरों का अंशतः —केवल इतने से ही गुजरात संसार भर में विषय बन गया है|
    (२) ५५ वर्षों में बाकी जो अन्य शासक नहीं कर पाए, —मोदी जी ने केवल शासन के भ्रष्टाचार को बहुत कुछ ख़तम करके किया है| कुछ भ्रष्टाचारी अभी भी हो सकते हैं|
    (३) टाटा को तिन बरसमें सिंगुर में भूमि नहीं मिली, गुजरात में ३ दिनमें| यह चमत्कार नहीं है?
    (४) गुजरात उत्पादन जन संख्या से ४.२२५ गुना|
    (५) निर्यात ३.२२५ गुना|
    (६) सौर ऊर्जा, नर्मदा जल, कच्छ को हराभरा बनाना —किसी भी चमत्कार से कम है?
    भारत का शत्रु ही उनका विरोध करेगा, ऐसा मैं मानता हूँ|
    अवसर आया है –गवांना सही नहीं —कहीं कोई आशा की किरण थी नहीं –सूरज उगने को है, अपनी मुर्गिको टोकरी टेल ढकने का अवसर नहीं है|
    जागो भारत जागो अब अवसर चुके तो अषाढ़ चुक जाओगे|

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  2. parshuramkumar

    यह प्रमाणित हो चूका है कि मोदी आतंकवाद को जड़ मूल से मिटा सकते है ,चाहे वह जेहादी आतंकवाद हो या माओवादी आतंकवाद | नरेन्द्र मोदी दंगा मुक्त भारत की गारंटी है | जब बंजर गुजरात पानी संपन्न एवँ उपजाऊ किया जा सकता है तो देश को अन्य मैदानी भूभाग में अमृतत्व क्यों नहीं विकसित किया जा सकता ? सरदार पटेल को देश का प्रथम प्रधान मंत्री न बनाकर जो भयावह भूल कि गई थी नरेन्द्र जी को प्रधान मंत्री बनाकर उस ऐतिहासिक भूल का परिमार्जन करने का देर से ही सही ,एक स्वर्णिम अवसर प्राप्त होगा ~~~परशुरामश्च~~~हरनौत,नालन्दा

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