नरेन्द्र मोदी के सपनों का भारत

-डॉ. मनोज चतुर्वेदी-
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हमारे देश में सिनेमा और राजनीति में सपनों का ही सिक्का चलता है। चुनावों से पहले नेतागण जनता को सुनहरे सपने दिखाते और वोट कमाते हैं, इसी तरह तीन घंटे तक सिनेमा भी सपनों की दुनिया में असंभव को संभव होता दिखाकर दर्शक की जेब से पैसा निकलवाने में अब सवाल यह उठता है कि दर्षक, श्रोता, जनता, इतनी बेवकूफ तो है नहीं या अज्ञानी तो है नहीं जो उसे सपनों की दुनिया की भूलभुलैया में ही भटकाये रखा जाय। आज लोकसभा की 16वीं आम चुनाव में भी कुछ इसी तरह की बातें हो रही है। सत्तारूढ़ कांग्रेस पिछले 10 वर्षों और अब तक के 60 सालों तक गरीबी हटाओ का सुनहरा सपना बेचती रही है और वोट कमाकर खुद एक परिवार को मजबूत करती रही है। भले ही देश कमजोर होता जाये, तो इसमें कोई बात नहीं। इसके अलावा देश की कम से कम 400 क्षेत्रीय पार्टियां और 7 राष्ट्रीय दल भी इसी तरह कुछ स्थानीय, जातीय और कुछ राष्ट्रीय मुद्दों से संबंधित, कुछ वर्ग विशेष की संतुष्टियों से संबंधित सपने दिखा रहे हैं। इन सब में एक ही समानता है, सभी प्रधानमंत्री की लालसा लिए अखंड भारत को जाति, धर्म, वर्ग, सम्प्रदाय द्वारा टुकड़ों में बांट-बांट कर अपने लिए वोट मांग रहे हैं। इन सबमें भाजपा पीएम प्रत्याशी नरेन्द्र भाई मोदी को जरूर अलग से रेखांकित किया जा सकता है, क्योंकि वे हिन्दू-मुस्लिम सभी को एक साथ लेकर चलने की बातें करते हैं। प्रखर राष्ट्रवादी हिन्दुत्व की छवि वाले नरेन्द्र भाई मोदी पूरे देश के 125 करोड़ लोगों से सीधे जुड़ने की बात करते हैं। केवल हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन, पारसी, बिहारी, बंगाली, मराठी, दक्षिण, उत्तर, गोरा-काला, केवल ब्राह्मण, पिछड़ा, केवल बनिया, केवल भुमिहार, केवल राजपूत की वे बातें नहीं करते। वे अखंण्ड भारत की बातें करते हैं। वे देश की एक अरब 25 करोड़ जनता की बातें करते हैं।

कांग्रेस नीति शासन में पड़ोसी देश चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, सभी के लिए भारत नरम चारा बना रहा है, जिसे वे समय-समय पर आघात पहुंचाते रहे हैं, लेकिन नरेन्द्र मोदी पड़ोसी देशों के प्रति सख्त कूटनीतिक रवैया स्पष्ट करते हैं। कहा भी जाता है कि गरीब की लुगाई, गांवभर की भौजाई। आज भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक और डेढ़ अरब जनसंख्या वाले राष्ट्र के बारे में भी यही बातें सत्यापित हो रही है।
एक तरफ कांग्रेस कहती है हमने लोगों को खाद्य सुरक्षा कानून का अधिकार, मनरेगा, स्वास्थ्य अधिकार दिया। दूसरी तरफ उसने देश को सबसे कमजोर प्रधानमंत्री जान-बूझकर दिया, ताकि मां-बेटा पार्टी अर्थात् सोनिया-राहुल की मजबूती बनी रहे। कांग्रेस के शासन में स्त्री-पुरूष-बच्चे, सिपाही, सैनिक, अधिकारी कोई भी सुरक्षित नहीं रहे। दूसरी तरफ नरेन्द्र मोदी शासित गुजरात में पिछले 12 वर्षों में कोई दंगा नहीं हुआ, महिलाएं आधी रात में भी सोने-चांदी के जेवर पहनकर बेखौफ घूम सकती हैं। तमाम राजनीतिक दलों के पास केवल एक काम बचा है, नरेन्द्र मोदी के नाम पर मुस्लिमों को डराकर उनका वोट बैंक हासिल करना, जबकि वास्तविकता यह है कि तमाम राज्यों से भागकर मुस्लिम समुदाय गुजरात के विभिन्न शहरों में बस चुका है और इन राज्यों के मुस्लिमों के बनिस्पत अच्छी माली दशा में है। आज यहां तमाम नेता केवल टोपी पहनकर और छद्म धर्मनिपेक्षता का गीत गाकर मुस्लिमों के रहनुमा बने हैं। वहीं नरेन्द्र मोदी मुस्लिमों का धरातल देने का वास्तविक कार्य कर रहे हैं। वे हिन्दू-मुस्लिम को समान भारतीय नागरिक मानते हैं न कि मुस्लिमों को विशिष्ट नागरिक मानकर उन्हें पृथक वर्ग मानते हैं।

आज जब एक राजनीतिक दल सत्ता प्राप्त कर लेता है। तो प्रायः पूर्व सत्तारूढ़ दल की परतें उखाड़ने में लग जाता है। और पूरा पांच वर्ष जनता के लिए कुछ सकारात्मक करने के बजाय केवल दलगत कूटनीति के दलदल में फंसता और धंसता जाता है। इसके लिए प्रायः प्रत्येक दल चुनाव के समय ही जोर-शोर से प्रचार भी करता है कि वह सत्ता में आने पर पूर्व सत्तारूढ़ दल की कलई खोलेगा आज जबकि पूरा देष यह जानता है कि कांग्रेस शासन भ्रष्टाचार के दलदल में डूबा हुआ है। तमाम घोटाले हुए हैं ऐसे में भी नरेन्द्र मोदी यह कह रहे हैं कि उनकी सरकार बनने पर कोई काम विद्वेष के नजरिये से नहीं होगा। सब कुछ संविधान और कानून के दायरे में होगा। यह वाकई नया और सुखद संदेश है। वस्तुतः पिछले 12 वर्षों में भी राज्य के मुख्यमंत्री होते हुए नरेन्द्र मोदी ने किसी भी दल के प्रति विद्वेष पूर्ण कार्यवाही नहीं की। जबकि तीनों विधानसभा चुनावों में कांग्रेस तथा अन्य दलों ने नरेन्द्र मोदी को, यमराज, कातिल, मौत के सौदागर, खूनी दरिंदा, ड्राकुला और भी न जाने कितने अपमानजनक ष्षब्दों से नवाज दिया था।

संभवतः यही कारण है कि आज जनता तमाम दलों के सपनों के बीच नरेन्द्र मोदी के सपनों को भोर का स्वप्न मान रही है, जो दिन के सपनों की तरह झूठे और आधारहीन नहीं होते। इसी कारण 1982 से आरंभ हुए भारत के आम चुनावों में पहली बार राजनीतिक गैर राजनीतिक नेताओं बुद्धिजीवियों गर्मपंथियों, पत्रकारों आदि के तमाम विरोधों, आरोप-प्रत्यारोप के बीच भी जनता नरेन्द्र मोदी को देखने-सुनने भारी संख्या में जा रही है। बड़े से बडा मैदान भी जनसागर के आगे बौना साबित हो रहा है। नेहरू, इंदिरा, जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया के स्वप्नों में जीता-पलता भारत अब केवल नमो-नमो का जाप कर रहा है। क्योंकि नरेन्द्र मोदी के दिखाये सपनों में भारत पुनः अपना खोया गौरव प्राप्त कर सकता है। नरेन्द्र भाई मोदी केवल स्वप्न ही नहीं दिखाते, वे यथार्थ के धरातल पर काम भी करते हैं।

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