गांव तक महिला सशक्तिकरण को मज़बूत करने की ज़रूरत

0
188

नरेन्द्र सिंह बिष्ट

नैनीताल, उत्तराखण्ड

दहेज़ के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित होने के बाद अहमदाबाद की आयशा द्वारा आत्महत्या ने जहां पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, वहीं यह सवाल भी उठने लगा है कि हम जिस महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, वास्तव में वह धरातल पर कितना सार्थक हो रहा है? सशक्तिकरण की यह बातें कहीं नारों और कागज़ों तक ही सीमित तो नहीं रह गई है? कहीं ऐसा तो नहीं है कि जितना ज़ोर शोर से हम महिला दिवस की चर्चा करते हैं, उसकी गूंज सेमिनारों से बाहर निकल भी नहीं पाती है? क्योंकि हकीकत में आंकड़े इन नारों और वादों से कहीं अलग नज़र आते हैं। देश का शायद ही ऐसा कोई समाचारपत्र होगा जिसके पन्नों पर किसी दिन महिला हिंसा की ख़बरें नहीं छपी होंगी। जिस दिन किसी महिला या किशोरी को शारीरिक अथवा मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं किया गया होगा।

देश में महिला सशक्तिकरण योजनाएं भले ही महिलाओं के स्वाभिमान/सशक्तिकरण में सहायक हों, लेकिन लिंगानुपात आंकड़े इन योजनाओं पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं। भले ही समाज 21वी सदी की ओर अग्रसर है, लेकिन उसकी सोंच अभी भी अविकसित ही मालूम पड़ती है। आज भी लड़के की चाहत में लड़की की गर्भ में हत्या इसका ज्वलन्त उदाहरण है। स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर बात करने वाली अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका लैंसेट ग्लोबल हेल्थ के अनुसार भ्रूण हत्याओं के द्वारा वर्ष में औसतन 2 लाख से अधिक मौतें भारत में दर्ज की जाती है। यह इस बात की ओर इशारा करता है कि यदि लिंग संबंधी भेदभाव को समाप्त करना है तो मौजूदा कानून को और भी सख़्ती से लागू करने होंगे, इसके साथ साथ समाज की सोच में भी परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। समाज को यह बताने की ज़रूरत है कि यदि वंश को बढ़ाने वाला चिराग लड़का है, तो उस चिराग का बीज महिला की कोख में ही पनपता है। जब कोख ही नहीं होगी, तो चिराग कैसे होगा? दरअसल आज भी समाज की प्राचीन संकुलन सोच का खामियाजा महिलाओं को किसी न किसी रूप में सहन करना पड़ता है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की वर्ष 2019 की रिर्पोट के अनुसार भारत में बलात्कार के प्रति घंटे 85 मामले देखने को मिलते है। वहीं दहेज निषेध अधिनियम के तहत दहेज हत्या के मामले 2018 में 690 से बढकर 2019 में 739 हो गयी है और यह निरन्तर बढ़ रहीे है। घरेलू हिंसा के 2 लाख मामले प्रति वर्ष दर्ज होते हैं, जिसके लिए घरेलू हिंसा अधिनियम का निर्माण 2005 लागू किया गया था। इसके अन्तर्गत मारपीट, यौन शोषण, आर्थिक शोषण, अपमानजनक भाषा का उपयोग की परिस्थितियों में कार्यवाही की जाती है। इसके अतिरिक्त प्रति वर्ष 300 एसिड हमले के मामले दर्ज होते हैं। जबकि आईपीसी की धारा 326ए के तहत एसिड हमले में शरीर जलने, झुलसने पर दोष साबित होने पर 10 वर्ष की कैद या उम्र कैद जैसी कड़ी सजा का प्रावधान है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी एसिड हमले को रोकने हेतु केन्द्र व राज्य सरकारों से एसिड की बिक्री को रेग्युलेट करने के लिए कानून बनाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद एसिड हमलों में कमी तो आई है, लेकिन अभी भी महिलाओं पर एसिड हमलों को पूरी तरह से रोका नहीं जा सका है।

महिलाओं पर होने वाली हिंसा को रोकने में सबसे अधिक शिक्षा का रोल होता है। इससे जहां लड़कों में महिला सम्मान की भावना जागृत की जा सकती है तो वहीं महिलाओं और किशोरियों को भी उनके अधिकारों से परिचित कराया जा सकता है। लेकिन देश के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी व्यवस्थित रूप से शिक्षा का अभाव है। यही कारण है कि शहरों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा का प्रतिशत अधिक देखने को मिलते हैं। हालांकि ग्रामीण महिलाओं का शिक्षित और जागरूक नहीं होने के कारण इन क्षेत्रों में हिंसा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के मामले बहुत कम होते हैं।

बात अगर देवभूमि उत्तराखंड की करें, तो यहां भी महिलाओं की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। 2011 की गणना के अनुसार यहां महिला साक्षरता दर भले ही 70 प्रतिशत है, परंतु आज भी यहां महिलाओं को निर्णय लेने का अधिकारी नहीं समझा जाता है। पुरुष प्रधान समाज की प्रथा अब भी राज्य के 70 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिलती है। महिलाएं यदि प्रगति मार्ग पर अग्रसर भी होना चाहें तो अशिक्षा उनके मार्ग में रोड़ा बनकर आ जाता है। इन क्षेत्रों में प्रति 100 में 45 महिलाएं ही शिक्षित हैं, जो कहीं न कहीं लिंग भेदभाव, प्राचीन विचारधारा के कारण उच्च शिक्षा से वंचित हुई हैं। इसके बावजूद भी अल्प शिक्षित महिलाओं ने ऐसे कार्य किये हैं, जो सराहनीय है। नैनीताल शहर में महिलाओं द्वारा स्वरोजगार को अपनाकर आजीविका संवर्धन किया जा रहा है। शहर की धना आर्या द्वारा मोजे, टोपी, कनछप्पा बुनकर रात्रि में मालरोड़ फड़ पर इन्हे विक्रय कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायता कर रही हैं। इसी प्रकार शहर की कई अन्य महिलाएं भी इस स्वरोजगार की सहायता से अपने परिवार की आजीविका संवर्धन में सहायता कर रही हैं, जो एक सराहनीय कार्य है। राज्य में महिला स्वयं सहायता समूह सक्रिय रूप में कार्य कर रहे हैं। ग्राम तोली में पांच समूहों द्वारा अपनी लघु बचत से लघु उघोगों को विकसित किया है। राज्य में ऐसी कई महिला समूह हैं, जो मसाला, जूस, हस्तशिल्प, मोम, बुनकर इत्यादि उघोगों से जुड़कर आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा कर रहीं है। यह महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक सुखद पहलू है।

वास्तव में यदि महिला सशक्तिकरण पर कार्य किया जाना है, तो सर्वप्रथम महिलाओं के कार्य बोझ में कमी लाने के लिए प्रयास करने होंगे। जिससे वह अपने आप को समय दे सके और अपने बेहतर भविष्य के लिए सोच सके। साथ ही स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो पायें। पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाएं एक दिन में 15 से 16 घण्टे अपने दैनिक कार्यो को करने में लगा देती हैं, ऐसे में जब उनके पास अपने लिए समय होगा तो वह अन्य कार्यों को कर पाने में सक्षम हो सकेंगी। जिनमें उनके आजीविका संवर्धन संबंधी कार्य भी होंगे। इस प्रकार वह अपने अस्तित्व की लड़ाई जीत पाने में सक्षम होंगी। इसके लिए महिला शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि शिक्षा ही एकमात्र बाण है, जो किसी के लिए भी आजीविका या संतोषजनक जीवन जीने के लिए कारगर साबित होता है।

प्रतिवर्ष 08 मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसमें महिलाओं को उनके द्वारा किये जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया जाता है। सभी महिलाओं को सम्मानित किया जा सकना सम्भव भी नहीं है। लेकिन प्रत्येक महिला को व्यक्तिगत सम्मान देकर, उसकी आकांक्षाओं को पूरा करके, उसे शिक्षित तथा जागरूक करके हम उसे वह स्थान दे सकते हैं, जिसकी वह वास्तविक हकदार भी है। अक्सर महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा पर समाज ख़ामोश हो जाता है। उसकी यह ख़ामोशी तब और बढ़ जाती है जब हिंसा परिवार के बीच रह कर होती है। ज़रूरत है न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी प्रताड़ना के खिलाफ महिलाओं को चुप कराने की बजाये उन्हें बोलने की आज़ादी देने की। यही वह माध्यम है जो महिलाओं को सिसकते से सशक्तिकरण के रूप में परिवर्तित करेगा और महिला दिवस सच्चे अर्थों में सार्थक होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

* Copy This Password *

* Type Or Paste Password Here *

17,163 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress