न मै बीजेपी का प्रवक्ता 

न मै बीजेपी का प्रवक्ता
न मै कांग्रेस का प्रवक्ता
मै तो बिलकुल निष्पक्ष हूँ
सही बात को हमेशा लिखता

न मै सत्ता का भूखा
न मै कुर्सी का भूखा
मै तो केवल एक कवि हूँ
जो केवल तालियों का भूखा

जो मेरे मस्तिष्क में आता
उसे सच्चाई से मै कहता
कलम मेरी बनी है सहेली
उसके साथ हमेशा रहता

न मै किसी के डराने से डरता
न मै किसी को मक्खन मलता
मेरा स्वाभिमान अभी जीवित है
मै तो केवल अपना कर्त्तव्य करता

न मै किसी नेता का चमचा
न मै किसी जाति का चमचा
मै तो केवल देश भक्त हूँ
केवल अपने देश का चमचा

न मै किसी पत्रिका का सम्पादक
न मै किसी पार्टी का प्रवक्ता
मै तो केवल “प्रवक्ता” का प्रवक्ता
जिस पर अपनी कविता लिखता

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