समाज

वृद्ध समाज की नई चुनौतियां: वैश्विक परिदृश्य और भारत की तैयारियां

अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस(1 अक्टूबर)

ओ.पी. पाल

दुनिया भर में 1 अक्टूबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस’ मनाया जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के उपलक्ष्य में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक संदेश जारी किया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगया है कि साल 2050 तक दुनिया भर में 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की संख्या बढ़कर 2.1 अरब हो जाएगी, जो वैश्विक आबादी का पूरा 20 प्रतिशत हिस्सा होगा। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब दुनिया के आधे देशों में जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 75 वर्ष से अधिक हो गई है जो 1950 की तुलना में 2030 तक 25 वर्ष अधिक होने का अनुमान है। एक अनुमान के अनुसार, वैश्विक स्तर पर वृद्धों की संख्या युवाओं से अधिक है और विकासशील देशों में यह संख्या तेजी से बढ़ रही है।

माना जा रहा है कि इंसान आज पहले से कहीं ज़्यादा लंबी ज़िंदगी जी रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और बेहतर होती जीवनशैली के चलते मानव आयु में यह वृद्धि हमारे समय की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। संयुक्त राष्ट्र के इस संदेश में ऐसी अपील की गई है कि इस ‘अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस’ पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम पीढ़ियों के बीच आपसी एकजुटता और सहयोग को मजबूत करेंगे। सरकारें, समाज और परिवार मिलकर यदि ऐसी नीतियाँ और वातावरण तैयार करें, जो यह सुनिश्चित करें कि लंबी ज़िंदगी सिर्फ लंबी न हो, बल्कि बेहतर, सुरक्षित, सम्मानित और लोगों की अपनी पसंद की हो, तभी सही मायनों में इस उपलब्धि का जश्न मनाया जा सकता है।
समाज में बुजुर्गों की अमूल्य भूमिका
भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों को मार्गदर्शक और परिवार की रीढ़ माना जाता है। वे हमारे परिवारों और समुदायों के वास्तविक संचालक हैं। इस अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम पीढ़ियों के बीच आपसी एकजुटता को मजबूत करेंगे। सरकार, समाज और परिवार मिलकर यदि ऐसा परिवेश तैयार करें, जहाँ लंबी ज़िंदगी सिर्फ लंबी न हो बल्कि सुरक्षित, सम्मानित और खुशहाल हो, तभी हम सही मायनों में एक विकसित और समावेशी भारत का निर्माण कर पाएंगे।

इस दिवस को मनाने का मकसद यह भी है कि हमारे वरिष्ठ नागरिकों के योगदान, ज्ञान, गरिमा और जरूरतों को स्वीकार करने और उनकी भलाई सुनिश्चित करने के लिए हमारे प्रयासों को फिर से समर्पित करने का अवसर प्रदान किया जाए। बुजुर्गो के इसी सम्मान की दृष्टि से ही शायद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 14 दिसंबर 1990 को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाने का निर्णय लिया था। इस निर्णय के तहत विश्व में बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा करना, उनके योगदान का सम्मान करना और उनके सामने आने वाली समस्याओं के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पहली बार 1 अक्टूबर 1991 को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया गया था।
भारत का बदलता जनसांख्यिकीय परिदृश्य
यह वैश्विक बदलाव भारत जैसे देश के लिए एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट है। कभी अपनी युवा आबादी के लिए पहचाने जाने वाले भारत में अब बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों से इतर भारत के नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों की आबादी 2050 तक दोगुनी होकर लगभग 31 से 34 करोड़ तक पहुँच जाने का अनुमान है। इस समय देश की कुल आबादी में वरिष्ठ नागरिकों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है, जिसके तहत आने वाले दशकों में हर पाँचवां भारतीय नागरिक बुजुर्ग श्रेणी में होगा।

विशेष रूप से अकेली रहने वाली बुजुर्ग महिलाओं और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों के वृद्धों के सामने आजीविका और स्वास्थ्य की दोहरी चुनौतियाँ खड़ी हैं। देश में आबादी का यह बढ़ता बुढ़ापा हमारे सामने जोखिम और अवसर दोनों लेकर आ रहा है। भारत में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो अनियोजित क्षेत्रों में काम करता है, जिनके पास नियमित पेंशन या भविष्य निधि (पीएफ) का सुरक्षा कवच भी नहीं होता। ऐसे बुजुर्गों के लिए उम्र बढ़ने का अर्थ असुरक्षा और भविष्य का डर है। कई बुजुर्गों के पास नियमित आय या पर्याप्त पेंशन का अभाव है, जिससे वे आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं।

बुजुर्गो की सामाजिक सुरक्षा पर फोकस
भारत में बुजुर्गों के जीवन को सुरक्षित और सम्मानित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इनमें स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में आयुष्मान भारत वय वंदना कार्ड के जरिए 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को इस योजना के तहत कवर किया जा रहा है, जिससे उन्हें 5 लाख रुपये तक के निःशुल्क स्वास्थ्य उपचार की सुविधा मिल रहा है। वहीं वरिष्ठ नागरिक बचत योजना के तहत विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए सरकार समर्थित योजना चला रही है, जो तिमाही आधार पर आकर्षक और सुरक्षित रिटर्न (ब्याज) सुनिश्चित करती है। इसके अलावा अटल वयो अभ्युदय योजना में वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में वृद्धाश्रमों का संचालन और उनके शारीरिक व मानसिक कल्याण के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया गया है। दूसरी ओर राज्य सरकार भी बुजुर्गो की आर्थिक मदद के लिए वृद्धावस्था पेंशन के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद बुजुर्गों को वित्तीय सहायता देने के साथ सामाजिक सुरक्षा पर फोकस कर रही है। इसके अलावा, ‘एल्डरलाइन’ जैसी हेल्पलाइन बुजुर्गों को मानसिक सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए सक्रिय हैं।

ओ.पी. पाल