लेखक परिचय

आलोक कुमार

आलोक कुमार

बिहार की राजधानी पटना के मूल निवासी। पटना विश्वविद्यालय से स्नातक (राजनीति-शास्त्र), दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नाकोत्तर (लोक-प्रशासन)l लेखन व पत्रकारिता में बीस वर्षों से अधिक का अनुभव। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सायबर मीडिया का वृहत अनुभव। वर्तमान में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के परामर्शदात्री व संपादकीय मंडल से संलग्नl

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nitishकल राजद संसदीय दल की बैठक के बाद वरिष्ठ राजद नेताओं ने नीतीश कुमार को सीधे अपने निशाने पर लिया l संकेत कुछ अच्छे नहीं हैं नीतीश जी के लिए …..राजद खेमे में इस बात की घुटन व् कसक सरकार बनने के बाद से ही थी कि “गठबंधन का सबसे बड़ा दल होने के बावजूद नीतीश जी ने अपनी ‘ऑटोक्रैटिक स्टाईल ऑफ फंक्शिनिंग ‘ से राजद को बैकफुट पर धकेल रखा है l” राजद के कार्यकर्ताओं ,समर्थकों व् वोट-बैंक को भी इस का मलाल था और असंतोष का एक माहौल कायम होता दिख रहा था जिसके परिणामस्वरूप शीर्ष नेतृत्व पर भी दबाब कायम हो रहा था l

हाल के दिनों में राजद से सक्रीय तौर पर जुड़े लोगों से सीधे – संवाद के दौरान कुछेक कॉमन अभिव्यक्ति सुनने को मिली ” सरकार में कहने को तो हम मेजर – पार्टनर हैं लेकिन हो वही रहा है जो नीतीश कुमार चाह रहे हैं …. सरकार के अनेकों अहम फैसले हमारी राय लिए बगैर तय कर लिए जा रहे हैं ….. हमारी चुप्पी व् सरकार के फैसलों पर हमारी सहमति को जेडी (यू) हमारी कमजोरी समझने की भूल न करे , कुछेक फैसलों पर असहमति के बावजूद अगर हम मौन हैं तो सिर्फ इस लिए कि हम जनता के बीच कोई भ्रम की स्थिति नहीं पैदा करना चाहते , न ही सरकार के काम-काज में अड़ंगा डालने का ठीकरा अपने ऊपर फूटने देना चाहते … बहुत चालाकी से और रणनीति के तहत इस सरकार के अब तक के कार्यकाल की ‘गुडी-गुडी’ चीजें जेडी (यू) अपनी झोली में डालता जा रहा है और सारी निगेटिव चीजों का श्रेय राजद के नाम करने की कोशिश भी जारी ही है ….. सरकार के काम में हमारी तरफ से कोई अनावश्यक दखलंदाजी नहीं होने को हमारी कमजोरी समझ हमें हाशिए पर धकेले जाना हमें कतई मंजूर नहीं है …..”

राजद समर्थकों की उपरोक्त अभिव्यक्तियों और तदुपरांत शीर्ष नेतों के प्रतिकियावादी बयानों से ये साफ तौर पर समझा जा सकता है कि “महागठबंधन की सरकार में राजद अब अपनी भूमिका कड़े तेवरों के साथ तय करने के मूड में है l” वैसे भी राजद अपने अग्रेसिव – अप्रोच के कारण ही अपने वोट-बैंक को अपील करता है और पिछले तमाम ‘डाउन्स’ के बावजूद अगर राजद का वोट-बैंक बरकरार है तो वो सिर्फ और सिर्फ पॉलिटिक्स में राजद की फ्रंट पर रह कर आक्रामक – रणनीति के साथ चलने के कारण है l.

वर्त्तमान में अगर राजद से जुड़े जमीनी लोग अगर खुद को हाशिए पर एवं ठगा महसूस कर रहे हैं तो ऐसे में उनको जोड़े रखने के लिए एवं सरकार में सीनियर – पार्टनर की अपनी भूमिका को दर्शाने के लिए राजद की ओर से नीतीश जी की कार्यशैली पर तीखे सवाल आगे भी उठते दिखें तो कोई आश्चर्य नहीं !!

आलोक कुमार

2 Responses to “संकेत कुछ अच्छे नहीं हैं नीतीश जी के लिए …”

  1. Paul

    There is a silver lining here. If Nitish’s su-shashan collapses, it will be the end of Lalu, the ultimate evil genius for good.

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  2. mahendra gupta

    रा ज द ने जिस सोची समझी नीति के तहत नीतीश को समर्थन दिया है , उस मंसूबे को पूरा करने की राह पर लालू पार्टी चल पड़ी है , अब उसके बयान देने चालू ककर दिए हैं , नीतीश पी एम् बन ने के स्वप्न में बाहर घूम रहे हैं , बिहार शहाबुद्दीन के हाथों सौंप दिया गया है , लालू परिवार व पार्टी की बन आई है ,उस के नेताओं ने नीतीश की खिल्लियां उड़ानी शुरू कर दी है , तस्लीमुद्दीन ने तो यहाँ तक कह दिया है कि नीतीश तो गांव के मुखिया बनने योग्य भी नहीं है ,इस लिए लगता है कि नीतीश के हाथों से बिहार फिसल रहा है ,सुशासन कुमार कहीं बेरोजगार न हो जाएँ

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