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    Homeसाहित्‍यकविताधन दौलत पर न कर इतना गुमान

    धन दौलत पर न कर इतना गुमान

    धन दौलत पर न कर इतना गुमान,
    ये हाथ का मैल है धुल ही जाएगा।
    न कुछ लाया था न कुछ ले जायगा,
    यही पर सब कुछ ही रह जाएगा।।

    बनाये थे जो तूने महल दुम्हले,
    क्या तू इनको साथ ले जाएगा ?
    खड़े रहेंगे ये सभी यही पर बन्दे,
    साथ कुछ भी न तू ले जाएगा।।

    बांट देना अपने दोनों हाथो से,
    तुझे कुछ तो पुन्य मिल जाएगा।
    यही तेरे साथ साथ चलेगा बन्दे,
    बाकी यहां सब कुछ रह जाएगा।।

    बचपन बीता जवानी चली गई,
    फिर तो तुझे बुढ़ापा ही आयेगा।
    एक कोने में तू पड़ा रहेगा बस,
    पास तेरे कोई भी नहीं आएगा।।

    यह भी मेरा,यह नहीं है तेरा,
    इसी तेर मेर में तू चला जाएगा।
    अपने से कमजोर से तू लडता,
    बलवान से तू पछाड़ा ही जाएगा।।

    पता नहीं कुछ तेरी जिंदगानी का,
    कब ऊपर से तेरा बुलावा आयेगा।w
    हाथ पैर सब कुछ होते हुए भी,
    चार के कंधो पर चढ़ कर जाएगा।।

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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