[नव संवत्सर, सरहुल और रामनवमी पर दोहे]

 

नव संवत्, नव चेतना, नूतन नवल उमंग।

साल पुराना ले गया, हर दुख अपने संग।।

 

चैत शुक्ल की प्रतिपदा, वासन्तिक नवरात।

संवत्सर आया नया, बदलेंगे हालात।।

 

जीवन में उत्कर्ष हो, जन-जन में हो हर्ष।

शुभ मंगल सबका करे, भारतीय नव वर्ष।।

 

ढाक-साल सब खिल गए, मन मोहे कचनार।

वन प्रांतर सुरभित हुए, वसुधा ज्यों गुलनार।।

 

प्रकृति-प्रेम आराधना, सरहुल का त्योहार।

हरी-भरी धरती रहे, सुख-संपन्न घर बार।।

 

रघुकुल में पैदा हुए, जग के पालनहार।

कौशल्या हर्षित हुई, धन्य हुआ संसार।।

 

कण-कण में जो हैं बसे, पावन जिनका नाम।

पीड़ा हरने आ गए, सबके दाता राम।।

 

मर्यादा आदर्श के, रघुवर हैं प्रतिरूप।

धीरज, धरम, त्याग व तप, राम चरित के रूप।।

 

-हिमकर श्याम

4 thoughts on “नूतन नवल उमंग

  1. सराहना तथा प्रोत्साहन के लिए आप सभी का हृदय से धन्यवाद एवं आभार !
    ~सादर

  2. श्रीमन् हिमकर जी,

    अति सुन्दर ! कविता के लिए धन्यवाद ।

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