लेखक परिचय

डॉ. राजेश कपूर

डॉ. राजेश कपूर

लेखक पारम्‍परिक चिकित्‍सक हैं और समसामयिक मुद्दों पर टिप्‍पणी करते रहते हैं। अनेक असाध्य रोगों के सरल स्वदेशी समाधान, अनेक जड़ी-बूटियों पर शोध और प्रयोग, प्रान्त व राष्ट्रिय स्तर पर पत्र पठन-प्रकाशन व वार्ताएं (आयुर्वेद और जैविक खेती), आपात काल में नौ मास की जेल यात्रा, 'गवाक्ष भारती' मासिक का सम्पादन-प्रकाशन, आजकल स्वाध्याय व लेखनएवं चिकित्सालय का संचालन. रूचि के विशेष विषय: पारंपरिक चिकित्सा, जैविक खेती, हमारा सही गौरवशाली अतीत, भारत विरोधी छद्म आक्रमण.

Posted On by &filed under स्‍वास्‍थ्‍य-योग.


कैंसर के कारण और इलाज ढूंढने के दावे करने वाले समाचार बार-बार अनेक दशकों से छपते आ रहे हैं। पर कैंसर से मरने वालों की संख्या हर देश में हर साल बढ़ती ही जा रही है। विकासशील देशों की बात छोड़कर विकसित देशों को लें तो पुराने प्राप्त आंकड़े बतलाते हैं कि केवल इग्लैंड में पिछले 50 साल से कैंसर से मरने वालों की संख्या साढ़े चार गुणा बढ़ी थी। संयुक्त राज्य में कैंसर की मृत्यु दर 50 हजार प्रतिवर्ष से भी अधिक हो गई हैं। आज भी यह संख्या लगातार बढ़ रही है। एक अन्य आंकलन कर्ता ने यह संख्या 50 के स्थान पर 75 हजार बताई है।

ऐलोपैथी की दवाओं और ऑपरेशन द्वारा कैंसर के इलाज की बात भी सही सिद्ध नहीं हो रही है। प्राप्त आंकड़ों और एलोपैथी के मूर्धान्य चिकित्सकों के अनुसार ऑपरेशन कैंसर का इलाज नहीं हो सकता। इन दवाओं से कैंसर का इलाज असम्भव है। लदंन के एक प्रसिद्ध चिकित्सक ‘जेम्स वुड’ ने हजारों ऑपरेशन करने के बाद अपने अनुभव के बारे में लिखा कि उन हजारों में से 6 को छोड़कर सबको फिर से कैंसर हो गया। वे 6 रोगी साधारण टयूमर के थे-कैंसर के नहीं। उसी काल के प्रसिद्ध चिकित्सक ‘डॉ वाश’ ने कहा कि नश्तर यानी ऑपरेशन से कैंसर रोग को ठीक नहीं किया जा सकता और न ही रोगी का जीवन लम्बा किया जा सकता है। अनेक आधुनिक पर ईमानदार चिकित्सक मानते हैं कि ऑपरेशन से कैंसर और भी भयानक रूप ग्रहण कर लेता है। यहां तक कि बयोप्सी में भी रोग अधिक तेजी से फैलने लगता है। मंहगी आधुनिक दवाएं भी रोग से अधिक रोगी को मारती है। अर्थात् ऐलोपैथिक इलाज से आर्थिक और शारीरिक दोनों स्तर पर हानि ही हानि।

कैंसर के अनेक रोगियों का सफल इलाज होम्योपैथी से करने वाले और अनेक रोगियों की जीवन रक्षा करने वाले ऐलोपैथिक अमेरीकी ‘डाक्टर जी. जेम्स’ ने अनेक साथी ऐलोपैथिक चिकित्सकों के सन्दर्भ से प्रमाणित किया कि एलोपैथिक इलाज और ऑपरेशन रोगी को जल्दी मार देते हैं और रोग तेजी से बढ़ता है। ये इलाज रोगी के कष्ट को बढ़ाने और मृत्यु को और निकट लाने वाले हैं। सर्जरी के विश्व प्रसिद्ध ‘डॉ बेंजामिन’ ने 500 स्तन कैंसर की रोगिणियों के ऑपरेशन यह कह कर किए थे कि इससे उनकी आयु लम्बी नहीं होगी।

ऐलोपैथिक की दवाओं और शोध के नाम पर अरबो डालर की राशि खर्च करने की लूट की पोल खोलते हुए बम्बई के दो एलोपैथिक चिकित्सकों ने एक खोजपूर्ण पुस्तक लिखी जो इंग्लैंड में छपी तथा भारत में केवल गुजराती में उपलब्ध है। कैंसर-मिथ एण्ड रियलटीज एबाऊट कॉज एण्ड क्यूर नामक इस पुस्तक में अपने निष्कर्ष देते हुए वे लिखते हैं कि ऐलोपैथी का इलाज करवाने वाला रोगी कम समय तक जीता है और उसकी मृत्यु बड़ी कष्टप्रद होती है। जो ऐलोपैथिक इलाज नहीं करवाते वे अधिक समय तक जीते हैं और उनकी मृत्यु बिना कष्ट के होती है।

वे बायोप्सी के बारे में लिखते है कि यह समझदारी नहीं। इससे कैंसर शरीर के अन्य भागों में तेजी से फैलता है। पिछले 50 सालों में कैंसर के इलाज पर अरबों डॉलर खर्च करने पर एक इंच की प्रगति नहीं हुई फिर भी लम्बे चौड़े दावे छपते रहते हैं। दोनों सुप्रसिद्ध चिकित्सकों का कहना है कि यह आर्थिक स्वार्थों को साधने का षड्यन्त्र है। आज तक उक्त पुस्तक के दावों का खण्डन करेन का साहस किसी एलोपैथिक चिकित्सक का नहीं हुआ है।

प्राप्त प्रमाणों से सन्देह होता है कि विश्व की व्यापारी शक्तियाँ कैंसर के नाम पर अरबों-खरबों रूपयों की लूट कर रही हैं। मानव कल्याण के नाम पर काम करने वाले वैश्विक संगठन भी उनके षड़यन्त्र में शामिल नजर आते हैं। आधुनिक ऐलोपैथिक चिकित्सा कैंसर के इलाज में असफल सिद्ध हो जाने के बाद भी उसे बढ़ावा देना कैंसर का प्रमाणिक इलाज करने वाली चिकित्सा पद्धतियों तथा व्यक्तियों की उपेक्षा, ये सब बातें दवा निर्माता कम्पनियों और वैश्विक संगठनों तथा सरकारों की मिलीभगत के सन्देह को और भी गहराती हैं। आयुर्वेद और पारम्परिक चिकित्सकों के दावों पर कभी कोई धयान नहीं दिया जा रहा। ऐलोपैथिक को 93 प्रतिशत और आर्युवेद आदि पद्धतियों को केवल 7 प्रतिशत बजट केन्द्र सरकार द्वारा दिया जाना उनके पक्षपात पूर्ण व्यवहार का स्पष्ट उदाहरण है।

राजगढ़ (म.प्र.) के एक बनवासी द्वारा हजारों रोगियों का इलाज किए जाने के समाचार वर्षों तक पत्र-पत्रिकाओं में छपते रहे। स्वमूत्र चिकित्सा ने अनगिनत रोगियों की जीवन रक्षा की है। बम्बई के लोगों ने तो इस पर एक अभियान ही छेड़ दिया और एक फाऊंडेशन की स्थापना कर डाली।

तुसली-दहीं के प्रयोग से ठीक होते अनेक रोगियों को देखा गया। गेहूँ के ज्वारों और योग-प्राणायाम से कैंसर ठीक होने के विवरण विश्व भर से वर्षों से प्राप्त हो रहे हैं। खमीर के प्रयोग, फलाहार आदि से ठीक होने वाले रोगियों की लम्बी सूची है। पर सरकार और वैश्विक तथाकथित समाज सेवी संगठन केवल ऐलौपैथिक को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में नियत पर सन्देह होना स्वाभाविक है। नहीं लगता कि इन संगठनों और इनकी उंगलियों पर नाचने वाली सरकारें कैंसर तथा अन्य समस्याओं को समाधान चाहती हैं। वे सब केवल धन कमाने के काम में जुटे हुए हैं, मानव कल्याण से उनका कोई वास्ता नहीं।

अत: अपने हित के लिए समाज के समझदार और जिम्मेवारी समझने वालों को स्वयं सब समझना और समाधान निकालना होगा। वैश्विक शक्तियों की कथनी करनी के निहितार्थ को समझे बिना भारत और मानवता का कल्याण सम्भव नहीं। कैंसर के इलाज और बाकी सब समस्याओं के समाधान की सामर्थ्य हम में है, बस निर्भरता और इन शक्तियों पर विश्वास छोड़कर स्वयं प्रयास करने की दिशा में कार्य करना होगा।

-डॉ. राजेश कपूर

20 Responses to “कैंसर के इलाज का झूठ”

  1. Kumar gaurav

    My mother is overy Canser patient and its spread Dr said chemotherapy but we r giving Ayurveda but she is vomating what I can do

    Reply
  2. मुकुल शुक्ल

    आप का लेख एक दम सही जानकारी देता है कैंसर के झूठ के बारे में | आयुर्वेद और होम्योपैथ में ही कैंसर का कारगर इलाज संभव है | वैसे एक जानकारी मै आप के साथ अवश्य बांटना चाहूँगा की आयुर्वेद के अनुसार अदि कैंसर का ऑपरेशन करना ही पड़े या बायोप्सी करनी पड़े तो आम सर्जिकल टूल्स के बजाय चांदी के बने टूल्स का इस्तेमाल करना चाहिए | इस प्रकार के ऑपरेशन से कैंसर के दोबारा होने की सम्भावना बहुत कम होती है क्योंकि आयुर्वेदिक दवाइयों में चांदी का इस्तेमाल किया जाता है और चांदी कैंसर का इलाज होती है | चूंकि सबसे ज्यादा वेद जर्मनी में ही पढ़े जाते है इसीलिए जर्मनी में इस बाबत एक शोध हुआ जिसमे ये बात सही भी पायी गयी है |

    Reply
    • पवन कुमार

      सर मेरी माँ को गोलब्लाइडर का कैसर है । अग्रेजी दवा से हार चुके है सुझाव दे।

      Reply
  3. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    जयन्ती जी हर प्रकार के कैसर का प्रमुख कारण स्थूल और सूक्ष्म विश हैं. अतः हर प्रकार के कैंसर की चकित्सा के लिए ——–
    १. रसायनों से युक्त आहार बंद करें.बोतल या डिब्बा बंद सभी आहार , पानी रसायनों से yukt यानी विषैला है.
    २. समुद्री नमक बंद करके कम से कम मात्रा में काला, सेंधा नमक दें.
    ३. सफेद चीनी, मिठाई, बाजारी दूध के सभी उत्पाद, मैदा, खटाई. ओवन-कुक्कर के बने आहार पदार्थ रोग बढाते हैं.
    ४. गिलोय, नीम, तुलसी, बिलब, घीक्वार ( एलोवेरा), गेहूं के छाया में उगाये पत्तों का रस दिन में तीन बार दें.
    ५. प्राण वायु (ऑक्सीज़न) की उपस्थिती में कैंसर के कोष( कार्सीनोमा सेल)जीवित नहीं रहते. मज्जा (बोन मेरो) के कार्यों में सुधार होने लगता है. अतः दिन में ८-१० बार उज्जाई करें. एक बार में १० से बढाते हुए ५० तक करने लगें. रोज़ प्रातः पूरा प्राणायाम पॅकेज उतना करें जिससे थकावट न हो.
    ६. स्वदेशी गो के गोबर का सूखा टुकडा (२-३ इंच का) गोघृत लगा कर प्रातः-सायं धूप की तरह जलाएं. सैंट वाली धूप-अगरबती न जलाए. डियोडोरेंट का भी प्रयोग न करें.
    ७. ॐ की सी.डी मद्धम आवाज़ में कई घंटे तक लगा कर रखें. सबसे achhee में टी सीरीज की गुल्शंकुमार की डी.वी.डी. लगी. अपनी पसंद की कोई लेलें.
    ८. यथासंभव सात्विक और ताज़ा, हल्का, रसायनों से रहित आहार दें.
    **रोगी के अन्य रोग, आयु, मानसिकता, स्वभाव, शरीर का रंग, कद, वज़न आदि भी बतलाएं तो कुछ आसानी होगी. उपरोक्त में कोई समझने में कठिनाई हो तो मेल भेजें. पता है…..

    Reply
  4. डॉ. राजेश कपूर

    Dr. Rajesh Kapoor

    *** Easy to prevent cancer ***
    Regujar use of Hridra,Giloy< Raii, Aelovera wil protect you from various deseases including cancer.Alone Raii can be a perfact ptotection against cancer. Just use it with Jeera ( cumin ); daal, vegitable are being fried. It is wise to grow all or some of these ln flower pots in your own houses.
    One hing more, if u take 2-3 leaves of tulsi in morning regularly, it will enhans your immunity & brain power. Dont take milk & milk products (Curd may be taken) immideate after taking tulsi.

    Reply
  5. y.hasneen UAE dubai

    Dear Dr R.kapoor i am eagerly waiting for your next article and i hope you would not dis appoint me
    also give the survival contact number so i could contact them with regards……Y.Hasneen

    Reply
  6. R.Kapoor

    यासीन जी!
    मुझे बड़ी प्रसन्नता होगी कैंसर की ‘ सरल ‘ चिकित्सा की जानकारी देने में. जानताहूँ कि कोई भी विश्वास नहीं करेग कि कैंसर की चकित्सा सरल हो सकती है. पर एक हद तक सही यही है. आशा करें कि चन्द दिन मे ” प्रवक्ता ” में आपको इसपर उपयोगी लेख पढने को मिलेगा.
    प्रेरणा देने केलिए धन्यवाद !

    Reply
  7. y.hasneen UAE dubai

    Respected and Dear Dr r.Kapoor The article is written by you is excellent and very informative regaring carcinoma disease and i understand the main objective or motto to write such article by you i agree with all of the point except if someone tell to having treatment for curing such disease is disguising to people and misguiding them i dont know whether you agreed with me or not but it is true

    Reply
  8. R.Kapoor

    प्रो. मधुसुदन जी,
    स्वमूत्र चिकित्सा से ठीक होनेवाले कुछ केंसर रोगियों का विवरण हमारे पास है, पढ़ना चाहें तो भेजा जासकता है.

    Reply
  9. R.Kapoor

    Yaasneen ji ,thanks for comments.My dear friend remember, science is based on fect finding process, not on ones belief.Kidly send your e-mail id so that fact may be provided.It would be a pleasure for me to aware somebody about miths & trouth. It is not cancer but cancer- industry+ treatment killing people.

    Reply
  10. y.hasneen UAE dubai

    The disease carcinoma is neither bacterial nor viral disease it occur only by the irregular and abnormal cell division and if someone tell for curing he is a big liar and cheater because such disease is not having any treatment for cure till now its main treatment biopsy kemothrapy and radiation and surgery also only spread the disease rather than cure ……………………………………………………………………….

    Reply
  11. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. प्रो. मधुसूदन उवाच

    ———“स्वमूत्र चिकित्सा ने अनगिनत रोगियों की जीवन रक्षा की है”——– इसके कुछ अनुभवकर्ता मित्रोंको व्यक्तिगत रूपसे जानता हूं। लेकिन उनके अनुभवसे चेहरेके दाग ठीक हुए। और साधारण स्वास्थ्यमें अंतर स्पष्ट दिखाइ दे , ऐसा अनुभव हुआ।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *