लेखक परिचय

लालकृष्‍ण आडवाणी

लालकृष्‍ण आडवाणी

भारतीय जनसंघ एवं भाजपा के पूर्व राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष। भारत के उपप्रधानमंत्री एवं केन्‍द्रीय गृहमंत्री रहे। राजनैतिक शुचिता के प्रबल पक्षधर। प्रखर बौद्धिक क्षमता के धनी एवं बृहद जनाधार वाले करिश्‍माई व्‍यक्तित्‍व। वर्तमान में भाजपा संसदीय दल के अध्‍यक्ष एवं लोकसभा सांसद।

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जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वाकई इतिहास रच डाला है। जम्मू एवं कश्मीर के किसी अन्य मुख्यमंत्री ने कभी इसका प्रतिवाद नहीं किया कि जम्मू एवं कश्मीर राज्य भारत का अभिन्न अंग है। ऐसा करके उमर ने न केवल भाजपा को चिढ़ाया है अपितु आगे बढ़कर जो कहा है उससे राज्य में अलगाववादी और पाकिस्तान का मीडिया हर्षोन्माद में है।

राज्य विधानसभा में एक ताजा वक्तव्य में, उमर ने कहा: जम्मू एवं कश्मीर राज्य भारत के साथ जुड़ा है; इसका भारत के साथ ‘विलय‘ नहीं हुआ है।

तथ्य यह है कि 500 से ज्यादा रियायतें जिनमें हैदराबाद और जूनागढ़ शामिल है जिनका विशेष रुप से उल्लेख करते हुए उमर ने इसे जम्मू-कश्मीर से भिन्न केस बताया है- ने उसी तरह विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए जैसेकि जम्मू एवं कश्मीर ने किए हैं, और स्वतंत्रता के बाद भारत अखण्ड हिस्सा बने। और पिछले 6 दशकों से ज्यादा समय से न केवल अकेली भाजपा जम्मू एवं कश्मीर को भारतीय क्षेत्र का अभिन्न अंग बताती है अपितु देश के प्रत्येक नेता पंडित नेहरु से लेकर श्रीमती इंदिरा गांधी से वर्तमान विदेश मंत्री श्री एस.एम. कृष्णा भी इसकी पुष्टि करते रहे हैं।

वास्तव में पाकिस्तान के समाचार पत्र ‘डान‘ के 8 अक्टूबर के मुख्य पृष्ठ पर एस.एम. कृष्णा के दावे को विधानसभा में उमर के भाषण के सामने प्रकाशित किया है।

1994 में भारतीय संसद के दोनों सदनों द्वारा जम्मू-कश्मीर पर पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव को यहां स्मरण करना समीचीन होगा, जिसमें दृढ़तापूर्वक कहा गया है:

”जम्मू एवं कश्मीर राज्य भारत का अभिन्न अंग रहा है, और रहेगा तथा शेष भारत से इसे अलग करने के लिए किसी भी प्रयासों का सभी आवश्यक साधनों से प्रतिरोध किया जाएगा।”

यही प्रस्ताव आगे कहता है:

”पाकिस्तान को भारत राज्य के जम्मू एवं कश्मीर का क्षेत्र खाली करना चाहिए जिसे उसने बलात हथिया रखा है।”

अभी तक उमर अब्दुल्ला के त्यागपत्र की मांग इस आधार पर की जा रही थी कि वह पत्थर फेंकने वाली भीड़ द्वारा घाटी में पैदा किए गए हालात से निपटने में असफल रहे हैं। कुछ तत्व इसे उनकी प्रशासनिक अनुभवहीनता मानते थे। परन्तु उनके ताजे बयान से साफ होता है कि यह उनकी मात्र प्रशासनिक अनुभवहीनता नहीं है अपितु जहां तक जम्मू एवं कश्मीर का सम्बन्ध है, वह राष्ट्रीय मूड से पूरी तरह अलग है। इसलिए जितना जल्दी वे त्यागपत्र दे दें तो उतना ही जम्मू एवं कश्मीर और राष्ट्र के लिए अच्छा होगा।

विधानसभा के अपने भाषण में उमर अब्दुल्ला ने धारा 370 को समाप्त करने की भाजपा की मांग का आलोचनात्मक संदर्भ दिया। डा. श्यामा प्रसाद मुकर्जी के दिनों से हम एक प्रधान] एक निशान और एक विधान के लिए कटिबध्द रहे हैं।

डा. मुकर्जी द्वारा शुरु किए गए कश्मीर आंदोलन और बंदी अवस्था में उनकी मृत्यु से पहले दो लक्ष्य-एक प्रधान और एक निशान तो हासिल हो गए। तीसरा लक्ष्य एक संविधान-हासिल होना शेष है। और हम उसे हासिल करने के लिए कृतसंकल्प हैं।

बहुतों को यह नहीं पता होगा कि धारा 370 के कारण जम्मू एवं कश्मीर राज्य के पृथक संविधान की धारा 3 इस तरह है:

राज्य का भारत संघ के साथ सम्बन्ध- जम्मू एवं कश्मीर भारत संघ का अभिन्न अंग है और रहेगा।

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.एस. आनन्द ने अपनी पुस्तक द कांस्टीटयूशन ऑफ जम्मू एण्ड कश्मीर में उपरोक्त भाग पर निम्न टिप्पणी की है।

1951 में राज्य संविधान सभा आहूत की गई थी ताकि वह ”राज्य के जुड़ने के सम्बन्ध में अपने तर्कसंगत निष्कर्ष” दे सके। संयुक्त राष्ट्र संघ में कश्मीर सम्बन्धी विवाद पर ठहराव आ चुका था। राज्य के भविष्य के बारे में अनिश्चितता समाप्त करने के उद्देश्य से कश्मीर में असेम्बली ने पर्याप्त विचार-विमर्श के बाद 1954 में राज्य के भारत में विलय की पुष्टि की।

1956 में, जब राज्य संविधान की ड्राफ्टिग को अंतिम रुप दिया जा रहा था, तक राज्य संविधान में राज्य के विलय को एक ‘स्थायी प्रावधान‘ मानने के सम्बन्ध में राज्य की अंतत: स्थिति को शामिल करना जरुरी समझा गया। यही वह विचार था जो संविधान के भाग 3 के रुप में अपनाया गया।

इस भाग में शब्द प्रयोग में लाए गए ”हैं-और रहेगा” । इससे साफ होता है कि राज्य के लोगों के मन में भारत के साथ जुड़ने के बारे में कभी कोई शक नहीं था। यह भाग मात्र उनकी इच्छा कि ”भारत संघ के अभिन्न अंग” बने रहने की पुष्टि भर है।

तब क्यों, मि. उमर, आप भाजपा के यह कहने पर नाराज होते हो?

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पिछले सप्ताह समाचार पत्रों की यह दो सुर्खियां थी :

”राजा इगर्नोड पीएम, लॉ मिनिस्ट्रीज एडवाइस आन 2जी स्पेक्ट्रम, सेस सीएजी”

(राजा ने 2 जी स्पेक्ट्रम पर प्रधानमंत्री, विधि मंत्रालय के परामर्श की उपेक्षा की, सीएजी का कहना है)

”नथिंग मूव्स विदआउट मनी, सेस एक्सपर्ट”

(बगैर पैसे के कुछ भी नहीं हिलता, विशेषज्ञो का कहना है)

दोनों सुर्खियों भ्रष्टाचार सम्बन्धी समाचारों से जुड़ी हैं-पहली में एक केंद्रीय मंत्री शामिल है, और दूसरी केंद्र सरकार में व्याप्त भयंकर भ्रष्टाचार पर सर्वो

च्च न्यायालय द्वारा की गई कड़ी निंदा का सार है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने बताया कि ए. राजा की टेलीकॉम मिनिस्ट्री ने 2008 में समूचे स्पेक्ट्रम आवंटन में विधि मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और यहां तक कि प्रधानमंत्री की सलाह को नजर अंदाज करते हुए ”मनमाने ढंग” से काम किया।

सी.ए.जी. के अनुमान से इस मनमाने दृष्टिकोण से देश को 1.40 लाख करोड़ रुपए की विशाल धनराशि का नुक्सान उठाना पड़ा है! सी.ए.जी. के अनुमान से यह स्पेक्ट्रम घोटाला आजादी के बाद से सर्वाधिक बड़ा घोटाला बनता है।

सी.ए.जी. रिपोर्ट कहती है:

”टेलीकॉम मंत्रालय ने स्पष्ट और तार्किक या मान्य कारणों के बिना वित्त और विधि मंत्रालय की सलाह को उपेक्षित किया, 2जी स्पेक्ट्रम जैसी दुर्लभ परिमित राष्ट्रीय सम्पदा को आवंटित करने हेतु टेलीकॉम आयोग के विचार-विमर्श को नकारा।”

”स्पेक्ट्रम की कमी और वाजिब से कम दाम के बारे में सभी एजेंसियों की जानकारी के बावजूद, लाइसेंस जारी करने का प्रवेश शुल्क 2001 में निर्धारित की गई दरों से बंधा हुआ रखा गया।”

सीएजी ने टेलीकॉम मंत्रालय के इस तर्क को खारिज कर दिया कि स्पेक्ट्रम आवंटन पिछली सरकार द्वारा निर्धारित की गई नीति के अनुसार ही किया गया है। सीएजी कहता है कि ”यह दावा गलत है कि पूर्ववर्ती सरकार की नीति का पालन किया गया। सन् 2003 में केबिनेट ने भविष्य में सभी आवंटनों को सीधे नीलामी से करने का निर्देश दिया था।”

जहां तक दूसरे समाचार का संबंध है उसमें पहले जैसे की भांति किसी बड़े राजनीतिज्ञ के शामिल होने का मामला नहीं है, लेकिन फिर भी यह एक मध्यवर्ती सरकारी अधिकारी से सम्बन्धित है, सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियां दर्शाती हैं कि बार-बार भ्रष्टाचार के केसों के मामले में देश का सर्वोच्च न्यायालय कैसे क्रोधित और उत्तेजित है।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मार्केण्डय काटजू और टी.एस. ठाकुर की पीठ कहती है:

”यहां अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में भ्रष्टाचार पर कोई नियंत्रण नहीं है। विशेष रुप से आयकर, बिक्री कर और आबकारी विभागों में भ्रष्टाचार काबू से बाहर है। बगैर पैसे के कुछ भी नहीं हिलता।”

स्पष्ट कटाक्ष करते हुए पीठ ने आगे कहा: ”क्यों नहीं सरकार भ्रष्टाचार को वैध बना देती जिससे प्रत्येक केस के लिए एक विशेष राशि निर्धारित हो जाएगी। मान लीजिए यदि एक व्यक्ति अपने मामले को सुलझाना चाहता है तो उसे 2,500 रुपए भुगतान करने को कहा जाए।” उससे प्रत्येक व्यक्ति को पता चल सकेगा कि उसे कितनी रिश्वत देनी है।

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यह अत्यंत संतोषजनक है कि नई दिल्ली में राष्ट्रमण्डल खेलों की समांप्ति के बाद ही प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने खेलों से जुड़े भ्रष्टाचार और विभिन्न कुप्रबन्धन के आरोपों की जांच की घोषणा की है।

देश को आशा है कि आद्योपांत जांच होगी और गलत काम करने वाला कोई भी बख्शा नहीं जाएगा। और केवल बलि का बकरा ढूढने की खोज नहीं होगी।

देश के भीतर के प्रेक्षकों को भारतीय खिलाड़ियों द्वारा बड़ी मात्रा में पदक जीतने, और उद्धाटन तथा समापन के अवसर पर भव्य कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन से, महीनों से नकारात्मक प्रचार पा रहे राष्ट्रमण्डल खेलों के लिए कुछ हद तक क्षतिपूर्ति करने वाली हैं। लेकिन भारत के बाहर रहने वाले भारतीयों की बात मानी जाए तो विदेशों में इसका प्रचार नकारात्मक ही रहा है।

हालांकि, यह एक सुखद संयोग है कि राष्ट्रमण्डल खेलों के अंतिम दिन ने भारत को आस्ट्रेलिया के बाद दूसरे स्थान पर स्थापित किया है, इसके साथ-साथ क्रिकेट में भारत को तीन विजय मिलीं: (1) 2 मैच वाली श्रृंखला में आस्ट्रेलिया के ऊपर विजय, (2) दुनिया की क्रिकेट टीमों में भारत का पहले स्थान पर पहुंचना और (3) सचिन तेदुंलकर का लाजवाब प्रदर्शन। सभी खेलप्रेमियों को स्वाभाविक रुप से उस दिन गर्व महसूस हुआ होगा।

11 Responses to “उमर अब्दुल्ला का बयान एक अक्षम्य भारी भूल- आडवाणी”

  1. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    सच को सही-सही समझें. जब तक देश के दुश्मन और विदेशी ताकतों के एजेंट देश पर शासन करते रहेंगे, तब तक हर काम भारत की बर्बादी का ही होगा. कब तक इस ना समझी को दोहराते रहोगे कि ये विदेशी ताकतों की एजेंट सरकार इस देश का भला करेगी ? यह सरकार जो करने के लिए बनी है, वह ही यह कर रही है. इसे इटली, अमेरिका, पोप, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हित साधने हैं, वह सब ये पूरी शक्ती से कर रहे हैं. इनसे देश की समस्याओं के समाधान की आशा करने का मूर्खता पूर्ण प्रयास बार-बार दोहराने का अविवेक पूर्ण काम हम न जाने क्यों किये जा रहे हैं. इतना भोला होना भी ठीक नहीं . काफी बड़ी कीमत हम अपनी इस सरलता और अतिवादी आशावादिता की चुका चुके हैं, अभी और कितना ……….?

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  2. sunil patel

    उम्र अब्दुल्ला पर देश द्रोह का मुकदमा चलना चाइये जिन्होंने अपने वक्तव्य से संविधान को शर्मशार किया है. भारत देश है जो आप आज भी शान से मुख्यमंत्री है, और कोई देश होता तो आप को पता चलता की जिस देश में खाते है …

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  3. amit sahu

    ज &क का १ ही इलाज है नरेन्द्र मोदी को कमान दे देना चाहिए

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  4. Sushil Gupta

    कांग्रेस की एक ही सोच है, कश्मीर जाए भाड़ मैं, अपना वोट बैंक और अपना पाला हुआ अब्दुल्ला परिवार सलामत रहे.

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  5. Rajeev Dubey

    उमर अब्दुल्ला कांग्रेस के सहयोग से सत्ता में हैं और रहेंगे भी – फिर उनका कार्यकाल सफल हो या असफल . कश्मीर पर उनके वक्तव्य पर क्षोभ हो तो होता रहे कांग्रेस तो केंद्र में सत्ता में होते हुए भी चुप है .

    भ्रष्टाचार पर भी विचित्र परिस्थिति है … आगे देखिये कि कहीं ऐसा न देखने को मिले कि राष्ट्रमण्डल खेलों के घोटाले में सारा दोष विपक्षी दलों पर मढ़ कर उन्हें ही घेरा जाय .

    कांग्रेस के बयानों से तो ऐसा लगता है कि दिल्ली राज्य और केंद्र में सरकार तो कांग्रेस की है पर सारे निर्णय भाजपा करती है और अब जाँच कांग्रेस के मंत्रियों एवं कलमाडी की होने के बजाय कुछ अफसरों और भाजपा के नेताओं की होगी … !

    अति हास्यास्पद है यह परिस्थिति … दिन भर टीवी चैनल पर जिस तरह से समाचार आ रहे थे तो लगा कि कांग्रेस कुछ भी कर सकती है …! निश्चय ही अब जल्दी ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा और हम भ्रष्टाचार मुक्त हो जायेंगे !

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  6. कृष्ण कुमार सोनी (रामबाबू)

    कश्मीर पर विवादस्पद बयान देकर उमर अब्दुल्ला ने भारतीय गंणतंत्र का परोक्ष रूप से अपमान किया है. उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर का मुख्यमंत्री बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है.अगर अब भी कांग्रेस उनके खिलाप कोई ठोस कदम नहीं उठाएगी तो वह भी देशद्रोही कहलायेगी. यह उसका अक्षम्य अपराध होगा..

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  7. aman

    HE(CM) IS DONIG A GUD JOB IN J&K .
    NOBODY SHOULD OR MUST HAVE SAID ANY THING ABT HIM WITHOUT VISITING KASHMIR. (PRACTICAL).
    PHIR DHEKTE HA KITNE RUKTHE HA AUR KITNE BHAGTE HA

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  8. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    ladaka nadaan hai …. jaisa bhi hai ……apna hi hai…..bagad hi khet charne lage to kisko dosh deejiyega……dossharopan to nirantar prakriya hai….koi upay ho to tajbeej karen .

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  9. सुमित कर्ण

    सुमित कर्ण

    इस तरह के निरर्थक बयान देकर उमर अब्दुल्ला जी ने न केवल भारतवर्ष के अरबों लोगों को शर्मशार किया है अपितु कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिको का अपमान भी किया है .

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  10. paramjitbali

    यह सब इस लिये हो रहा क्यूँकि जो सरकार सब से ज्यादा राज करती रही है देश पर।उसकी नीतियां व प्रभाव वोट बैंक की खातिर ऐसा डुलमुल रहा है कि आज वे ऐसा कहने की हिम्मत कर रहे हैं।ऐसे हालात इसी लिये पैदा हुए लगते हैं।

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