प्रवक्‍ता के 8वें स्‍थापना दिवस पर आभार ज्ञापन

downloadआज 16 अक्‍टूबर है। इसी दिन आज से सात साल पूर्व 2008 में एक प्रकल्‍प की शुरुआत हुई थी। www.pravakta.com। तब से यह निरंतरता के साथ सक्रिय है।

प्रवक्‍ता डॉट कॉम के 8वें स्‍थापना दिवस पर संपादक के नाते मैं आप सब लेखकों और पाठकों, जो प्रवक्‍ता के आधारस्‍तंभ हैं, के प्रति हार्दिक आभार प्रकट करता हूं।

मुख्‍यधारा के मीडिया में महत्‍वहीन खबरों को ज्‍यादा तूल दिए जाने और महत्‍वपूर्ण खबरों की उपेक्षा से खीझे मन और राष्‍ट्रभाषा हिंदी में स्‍तरीय विचार-विमर्श हो, इसी की परिणति के रूप में ‘प्रवक्‍ता’ सामने आया। तब से इसने कई गौरवशाली उपलब्धियां हासिल की है।

कुछ का उल्‍लेख – अमेरिका में हिंदी पाठ्यक्रम में प्रवक्‍ता डॉट कॉम का संदर्भ आया। नया मीडिया पर लिखे गए सैकड़ों लेखों में प्रवक्‍ता का जिक्र हुआ। कई पत्रिकाओं एवं किताबों में इसका उल्‍लेख हुआ। जनसत्‍ता में प्रवक्‍ता पर प्रकाशित लेख पर विमर्श हुए। गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक पत्रकार के पक्ष में सहयोग का निवेदन किया तो झटके में ही 25 हजार रुपए पाठकों ने एटीएम में डाल दिए। हर दिन दर्जनों बड़े और सैकड़ों छोटे अखबारों में प्रवक्‍ता से साभार लेख प्रस्‍तुत होते हैं। बड़ी संख्‍या में युवाओं ने लेखन की दुनिया में पहला कदम प्रवक्‍ता के माध्‍यम से ही रखे। इस पर अब तक 15 हजार से अधिक लेख प्रकाशित हो चुके हैं तो लेखकों की संख्‍या 700 को पार कर गई है। इसे हर दिन 36 हजार हिट्स मिल रही है।

प्रवक्‍ता को ‘अभिव्‍यक्ति का अपना मंच’ कहा गया है। सभी विचारधारा के लेखकों के लेख यहां प्रकाशित होते हैं। वेबसाइट प्रारंभ करना आसान है लेकिन बिना किसी आर्थिक लाभ के निरंतरता के साथ इसे चलाना कठिन है। बहुत चुनौतियां हैं। लगातार वेबहॉस्टिंग का खर्चा बढ़ता रहता है और श्रम भी बहुत लगता है, जिसमें अपनी रचनात्‍मकता की क्षति होती है। प्रवक्‍ता के साथ कई वेबसाइट शुरू हुई थीं, लेकिन इन्‍हीं कठिनाइयों के चलते अधिकांश की निरंतरता कायम नहीं रह सकीं। सुधी लेखकों और पाठकों के आत्‍मीय सहयोग से न केवल प्रवक्‍ता की निरंतरता कायम है अपितु गुणवत्‍ता का भी ख्‍याल रखते हैं। यह सब प्रवक्‍ता के प्रबंधक Bharat Bhushan के सहयोग से संभव हो पाया।

प्रवक्‍ता को लोकप्रिय बनाने के लिए हम ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन करते हैं। गत दो सालों से दिल्‍ली में वार्षिक स्‍नेह मिलन का कार्यक्रम करते हैं, जिसमें प्रवक्‍ता के 10 लेखकों का सम्‍मान करते हैं और किसी खास विषय पर संगोष्‍ठी करते हैं। इस बार 29 नवंबर को यह समारोह आयोजित होना प्रस्‍तावित है।

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