एक देश: एक टैक्स जीएसटी

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने से केन्द्र और राज्यों के स्तर पर लगने वाले एक दर्जन से अधिक कर समाप्त हो जायेंगे और उनके स्थान में केवल जीएसटी लगेगा। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस कार्यक्रम से दूर रही। कांग्रेस ने जीएसटी की शुरुआत के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम को तमाशा करार दिया। कांग्रेस के इसी बहिष्कार के चलते पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी इस कार्यक्रम से दूर रहे। तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, डीएमके और वामपंथी दलों ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया। जीएसटी से देश की 2,000 अरब की अर्थव्यवस्था और 1.3 अरब लोग सभी एक साथ जुड़ जायेंगे और पूरा देश एक साझा बाजार बन जायेगा।

आखिरकार ७० सालों बाद कोई १५ वर्षो के सतत् प्रयासों के परिणाम स्वरूप ३० जून की आधी रात को देश में एक कर ‘जीएसटी (गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स)यानी वस्तु एवं सेवाकर लागू हो गया। इसके लागू होने से १७ तरह के टैक्स और २३ सेसकर एक झटके में समाप्त हो गये।
अब ‘एक देश एक कर के तहत जीएसटी की चार दरें ५,१२,१८ एवं २५        फीसद लागू हो गई है। जिनमें से २६३ वस्तुओं पर ५ फ ीसद, २४२ वस्तुओं पर १२ फ ीसद, ४५३ वस्तुओं १८फ ीसद व २२८ वस्तुओं पर २८ फ ीसद कर लगाया गया है।
विडम्बना यह देखिये कि उसी कांग्रेस ने इस कर प्रणाली का अंत तक विरोध किया जिसने इस कर को लागू करने की पहल की थी। अन्य विपक्षीदल तो सिवाय विरोध की परम्परा का निर्वाह करने की दृष्टि से समारोह में शामिल नहीं रहे। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री व जद सेकुलर के प्रमुख श्री एचडी देवगौड़ा, राकांपा के मुखिया श्री शरद पवार व जदयू सहित कुछ अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों के शामिल होने से साफ  हो गया कि विपक्षीदलों में इस मुद्दे पर भी एक जुटता नहीं है।
संसद के केन्द्रीय कक्ष में शुक्रवार की आधी रात राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घंटा बजाये जाने के साथ जीएसटी लागू हो गया तथा प्रधानमंत्री ने इस महत्वपूर्ण कर सुधार की तुलना आजादी से करते हुए कहा कि यह देश के आर्थिक एकीकरण में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। संसद के केन्द्रीय कक्ष में हुई विशेष बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति श्री मुखर्जी ने इसे ऐतिहासिक क्षण करार दिया और कहा कि यह कराधान के क्षेत्र में एक नया युग है जो कि केंद्र एवं राज्यों के बीच बनी व्यापक सहमति का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दायरे के लोगों द्वारा किया गया प्रयास है जिन्होंने दलगत राजनीति को परे रखते हुए राष्ट्र को आगे रखा। उन्होंने कहा कि यह भारत के लोकतंत्र की परिपक्वता और बुद्धिमत्ता का सम्मान है।
इससे पहले समारोह को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि जीएसटी सभी राजनीतिक दलों के सामूहिक प्रयासों की देन है। उन्होंने कहा कि यह सभी राज्यों एवं केंद्र के वर्षों तक चले विचार विमर्श का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जीएसटी सहकारी संघवाद का एक बेहतर उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार सरदार वल्लभ भाई पटेल ने विभिन्न रियासतों को मिलाकर भारत का एकीकरण संभव कराया था, उसी प्रकार जीएसटी के कारण देश का आर्थिक एकीकरण होगा। उन्होंने कहा कि इसमें शुरूआत में थोड़ी दिक्कत आ सकती है लेकिन इसके कारण सभी वर्गों के लोगों को लाभ मिलेगा। मोदी ने देश के व्यापारी वर्ग से अपील की कि जीएसटी लागू होने से उन्हें जो लाभ होता है उसका फायदा वे गरीब तबके के लोगों तक पहुंचाएं।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी लागू होने की लंबी यात्रा का उल्लेख करते हुए इसमें शामिल सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जीएसटी लागू होने से दीर्घकाल में महंगाई पर लगाम लगेगी और कर वंचना कम होगी। संसद के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में आजादी सहित यह चौथा ऐसा मौका है जब मध्य रात्रि के समय कोई कार्यक्रम हुआ। 14 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि के अलावा, 1972 में स्वतंत्रता की रजत जयंती और 1997 में स्वर्ण जयंती के अवसर पर ऐसे कार्यक्रम हुए थे।
कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने भले ही इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया हो लेकिन इस मौके पर केंद्रीय कक्ष में सपा, जदयू, जद-एस, राकांपा, टीआरएस, अन्नाद्रमुक, बीजद के सांसदों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा, रतन टाटा सहित प्रमुख उद्योगपति एवं अन्य गणमान्य हस्तियां मौजूद थी। इस समारोह में मंच पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, लोक सभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, प्रधानमंत्री मोदी, वित्त मंत्री जेटली एवं पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा मौजूद थे। प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में, कैबिनेट मंत्रियों के अलावा वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा प्रमुख अमित शाह, राकांपा प्रमुख शरद पवार, सपा नेता रामगोपाल यादव, भाजपा नेता यशवंत सिन्हा आदि मौजूद थे।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने से केन्द्र और राज्यों के स्तर पर लगने वाले एक दर्जन से अधिक कर समाप्त हो जायेंगे और उनके स्थान में केवल जीएसटी लगेगा। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस कार्यक्रम से दूर रही। कांग्रेस ने जीएसटी की शुरुआत के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम को तमाशा करार दिया। कांग्रेस के इसी बहिष्कार के चलते पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी इस कार्यक्रम से दूर रहे। तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, डीएमके और वामपंथी दलों ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया। जीएसटी से देश की 2,000 अरब की अर्थव्यवस्था और 1.3 अरब लोग सभी एक साथ जुड़ जायेंगे और पूरा देश एक साझा बाजार बन जायेगा।
इस समूची प्रक्रिया को पूरा होने में 17 सालों का लंबा समय लगा है। जीएसटी से वर्तमान बहुस्तरीय कर व्यवस्था समाप्त होगी और कर के ऊपर कर लगने से माल की लागत पर बढऩे वाला बोझ भी समाप्त होगा।
जीएसटी को कारोबार सुगमता की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है। हालांकि, छोटे कारोबारी और व्यापारी इस नई कर प्रणाली को लेकर कुछ घबराहट में हैं। जीएसटी में कर भुगतान प्रणाली को लेकर उपजी आशंकाओं के चलते उत्तर प्रदेश में व्यापारियों ने एक रेलगाड़ी को रोक दिया। कई शहरों में इस दौरान थोक जिंस बाजार बंद रहे। जीएसटी को लेकर कश्मीर में बंद का आह्वान किया गया  जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में छिटपुट बंद के समाचार मिले थे। पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विरोध प्रदर्शन हुये।
देश के जाने-माने कर विशेषज्ञों का आकलन है कि इस नई कर प्रणाली से कर चोरी करना असंभव न भी सही तो भी बेहद मुश्किल तो होगा ही। इससे जहां करदाताओं की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होगी वहीं कर से सरकारी आय में उल्लेखनीय वृद्धि तय है।
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धरे रह गये सारे के सारे विरोध
इस देश के लोगो की मानसिकता भी अजीबो-गरीब है। एक तरफ देश के अधिसंख्य लोग दिन-रात भ्रष्टाचार, कालाबाजारी एवं महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को, व्यवस्था को व अपनों को कोसते रहते है तो दूसरी तरफ  सरकार जब इन पर चोट करती है, इन्हे दुरस्त करने की कोशिश करती है तो ऐसे ही लोग सरकार को कोसने लगते है।
क्या यह सच नहीं है कि ऐसे लोगो में वे भी शामिल होते हंै जो भ्रष्टाचार, कालाबाजारी एवं महंगाई जैसी समस्याओं के जनक, पोषक व उत्प्रेरक होते है। यह और भी अजीब है कि जब भी ऐसे लोगो पर शिंकजा कसता है वे अपने को बचाने के लिये उसी जनता की दुहाई देते नजर आते है जिसका वे शोषण करने में जरा भी हिचक महसूस नहीं करते हैं।
उदाहरणार्थ कपड़े वालों ने तीन दिन की हड़ताल की और हड़ताल की धमकी दे रहे है। उनका अन्तिम तर्क है कि कपड़े पर जीएसटी लगने से कपड़ा महंगा हो जायेगा जिससे गरीब, भिखारी कपड़े न खरीद पाने से नंगे रहने को विवश हो जायेगे। लोग तब दंग रहे गये जब इनके प्रदर्शन में भगवाधारी व लंगोटी पहने बाबाओं को भी नारे लगाते देखा।
जीएसटी का विरोध करने वाले अपने-अपने तर्क दे रहे हंै। बावजूद इसके अब जब जीएसटी लागू हो गया है तो देखना यह होगा कि विरोधियों के तर्क कितने वाजिब सिद्ध होते है।
हां! यदि तर्क वाजिब सिद्ध होते है तो सरकार को गौर करना ही होगा।

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