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एक देश: एक टैक्स जीएसटी

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने से केन्द्र और राज्यों के स्तर पर लगने वाले एक दर्जन से अधिक कर समाप्त हो जायेंगे और उनके स्थान में केवल जीएसटी लगेगा। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस कार्यक्रम से दूर रही। कांग्रेस ने जीएसटी की शुरुआत के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम को तमाशा करार दिया। कांग्रेस के इसी बहिष्कार के चलते पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी इस कार्यक्रम से दूर रहे। तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, डीएमके और वामपंथी दलों ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया। जीएसटी से देश की 2,000 अरब की अर्थव्यवस्था और 1.3 अरब लोग सभी एक साथ जुड़ जायेंगे और पूरा देश एक साझा बाजार बन जायेगा।

वस्तु एवं सेवा कर : समस्या या समाधान

1 जुलाई से लागू होने जा रहा है एक समान कर वाला जीएसटी यानि गुड्स एंड सर्विसिस टैक्स एक ऐसा टैक्स है जो टैक्स के बड़े जाल से मुक्ति दिलाएगा। जीएसटी आने के बाद बहुत सी चीजें सस्ती हो जाएगी जबकि कुछ जेब पर भारी भी पड़ेंगी। लेकिन सबसे बड़ा फायदा होगा कि टैक्स का पूरा सिस्टम आसान हो जाएगा। 18 से ज्यादा टैक्सों से मिलेगी मुक्ति और पूरे देश में होगा सिर्फ एक टैक्स जीएसटी।

जीएसटी-मोदी सरकार के तीन वर्षो की बड़ी कामयाबी

बात जीएसटी की आवश्यकता क्यों पड़ी ? इसकी की जाये तो विभिन्न राज्यों के बीच जिस तरह टैक्स में असंतुलन आ गया था, उससे निपटने के लिए जीएसटी आवश्यक हो गया था। इसके लागू होने से उत्पाद शुल्क, सेवा कर, राज्य वैट, मनोरंजन कर, प्रवेश शुल्क, लग्जरी टैक्स जैसे तमाम टैक्स समाप्त हो जाएंगे। इस समय देश में केंद्र और राज्यों के आठ से दस अप्रत्यक्ष कर सेस है, जीएसटी लागू होने के बाद ये खत्म हो जाएंगे और इसका मतलब है कि दोहरे कराधान से सबको निताज मिल जायेगी। इ