कर्मठ और निष्ठावान कार्यकर्ता ही होते है संगठन के प्राण

किसी भी संगठन की दिशा और दशा उसमें कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं पर निर्भर करती है l कार्यकर्ता जितना ज्यादा कर्मठ और निष्ठावान होगा, वह संगठन उतने ही लंबे समय तक मजबूती के साथ कार्य करता रहेगा, क्योंकि कार्यकर्ता ही संगठन के प्राण होते हैं l कार्यकर्ता किसी इमारत की नींव के समान होते हैं l जो होते है, लेकिन दिखाई नहीं देते l जिस प्रकार नींव के दम पर इमारत खड़ी रहती है, उसी प्रकार निष्ठावान कार्यकर्ताओं के दम पर संगठन मजबूती से काम करता है l इमारत की फोटो बहुत सुंदर दिखाई देती है लेकिन यह सुंदरता तब तक है जब तक इमारत की नींव मजबूती से अपना काम कर रही है l कभी-कभी ध्यान न देने पर नींव में पानी चला जाता है और नींव कमजोर हो जाती है जिसके कारण सुंदर इमारत पल भर में धराशाई हो जाती है l नींव को इमारत से किसी प्रकार की कोई अपेक्षा नहीं होती है l बस नींव इतना ही चाहती है कि, उसका सम्मान बना रहे और बाहर का पानी उसे क्षति ना पहुंचाएं l इसी प्रकार संगठन का कार्यकर्ता भी किसी पद की लालसा किए बिना दिन-रात, हर मौसम में, हर परिस्थिति में अपने संगठन को मजबूती देने में लगा रहता है l जब संगठन मजबूत और विस्तृत होता है तो सबसे ज्यादा खुशी कार्यकर्ता को ही होती है l क्योंकि उसने अपने खून पसीने की मेहनत से संगठन को मजबूत किया है l कार्यकर्ता केवल यही अभिलाषा रखता है कि संगठन में उसका मान सम्मान बना रहे l निष्ठावान कार्यकर्ता के लिए ये पंक्तियाँ लिखी गई है कि —–
तन समर्पित, मन समर्पित और यह जीवन समर्पित |
चाहता हूँ मेरे संगठन तुझे, कुछ और भी दूँ ||
आज संघ और उसके अनुषांगिक संगठन इतनी मजबूती से खड़े हैं तो उसके पीछे उन समर्पित कार्यकर्ताओं की मेहनत है, जिन्होंने पूरी लगन और ईमानदारी से संगठन को मजबूत करने के लिए अपना सर्वोच्च न्योछावर कर दिया | लेकिन आज वे दिखाई भी नहीं दे रहे हैं l राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी ने ऐसे ही समर्पित कार्यकर्ताओं के लिए कहा होगा कि निष्ठावान कार्यकर्ता उस बीज के समान होता है जिस बीज से वृक्ष बनता है और बीज को मिट्टी में मिल जाना पड़ता है | समर्पण ही बीज की ताकत है | संघ ऐसे लोगों से चलता है जो होते तो है लेकिन दिखते नहीं हैं | चाहे संगठन ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया हो, लेकिन बाहर होने के बावजूद भी वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से संगठन और संगठन की विचारधारा को अभी भी मजबूती दे रहे हैं, जैसे पहले देते थे l उन्होंने कभी भी अपने संगठन को नुकसान पहुंचाने की नहीं सोंची | हमेशा संगठन कैसे मजबूत हो बस इसी प्रयास में लगे रहे हैं l लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, गोविंदाचार्य जी, संजय जोशी, जैसे अनेकों निष्ठावान कार्यकर्ता हैं, जो आज भी दिन-रात केवल संगठन के बारे में ही सोचते हैं l संगठन के मजबूत होने से इन्ही लोगों को सबसे ज्यादा खुशी होती है | क्योंकि इन्होंने अपना सब कुछ न्योछावर करके पूरी मेहनत और ईमानदारी से संगठन को मजबूत किया है, और आज जब कार्यकर्ता की अनदेखी कर दूसरे दलों से आने वाले छूट भैया नेताओं का सत्कार और सम्मान होता है, तो निष्ठावान कार्यकर्ता को बड़ा कष्ट होता है l इसलिए संगठन को चाहिए कि बाहर से आने वाले लोगों का जितना सत्कार और सम्मान हो रहा है उतना सम्मान कार्यकर्ता का हो तो संगठन अधिक मजबूत होगा l क्योंकि बाहर के संगठन से आए नेता आज हैं, कल चले जाएंगे | जिसके कई उदाहरण संगठन में देखने को मिल रहे हैं l लेकिन एक सच्चा कार्यकर्ता कभी भी अपने संगठन को कमजोर नहीं होने देता क्योंकि उसने अपने खून पसीने की मेहनत से संगठन को खड़ा किया है l जिस प्रकार जो व्यक्ति पेड़ लगाता है वह कभी पेड़ को काटने के बारे में सोंच भी नहीं सकता, चाहे फल कोई भी खाएं | बस यही चाहता है कि पेड़ सुरक्षित रहे l वह यही देखकर खुश होता है कि, उसके द्वारा लगाए गए पेड़ से आज फल प्राप्त हो रहे हैं l
लेखक
बालकृष्ण उपाध्याय

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