हमारी मातृ भाषा


हिन्दी हमारी मातृ भाषा है,
इसको तुमसे बहुत आशा है।
अगर इसको नही अपनाओगे,
इसका प्रसार कैसे कर पाओगे ?

मातृ भाषा अगर तुम अपनाओगे,
अपनी बात सबसे तुम कह पाओगे।
तभी होगा इसका प्रचार व प्रसार,
और एक सूत्र में सब बंध जाओगे

मातृ भाषा है सबसे प्यारी भाषा,
यह न देती किसी को भी निराशा।
इसका जो सदा उपयोग करता है,
वह जीवन में खुश सदा रहता है।।

मातृ भाषा को बोलना बुरा न समझो,
इसको बोलने में अपनापन ही समझो।
अपनापन का है ये सर्वोउत्तम माध्यम,
हिन्दी भाषा को बनाओ तुम माध्यम।

मातृ भाषा हमारी सर्व सम्पन्न है,
जैसा बोलो वैसा लिखने में संपन्न है।
ऐसा गुण मिलेगा न किसी भाषा में,
इसलिए अन्य भाषाओं से संपन्न है।।

मातृ भाषा सब भाषाओं का उदगम है,
अन्य भाषाओं का भी ये ही संगम है।
सबको ये प्यार से अपना लेती है,
उसको अपने में ये मिला लेती है।

आर के रस्तोगी

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