धर्म का स्वरूप: सेवा या स्वार्थ?

धर्म-अध्यात्म

धर्म का स्वरूप: सेवा या स्वार्थ?

- प्रियंका सौरभ

आज का यथार्थ यह है कि धार्मिक परंपराओं का एक बड़ा हिस्सा अपने मूल उद्देश्य से भटक चुका है। जिन कर्मकांडों का उद्देश्य मनुष्य को आत्मिक संतुलन देना था, वे…

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