लेखक परिचय

सुमीत श्रीवास्तव

सुमीत श्रीवास्तव

प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य संवाद प्रकोष्ट, भाजपा, दिल्ली प्रदेश

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सुमीत श्रीवास्तव

भारतीय उप-महाद्वीप का विभाजन और दो नए राज्यों/राष्ट्रों का निर्माण सन 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान(मुस्लिम राष्ट्र) एवं सन 15 अगस्त 1947 को भारत (रिपब्लिक आफ इंडिया) में दोनों राज्यों/राष्ट्रों के विभाजन था अलग-अलग होने की घोसना लोर्ड माउन्टबेटेन ने की| इस विभाजन में न की भारतीय उप-महाद्वीप के दो टुकड़े किये गये बल्कि बंगाल का भी विभाजन किया गया और बंगाल के पूर्वी हिस्से को भारत से अलग कर पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बंगलादेश) बना दिया गया| वहीँ पंजाब का विभाजन कर पाकिस्तान का निर्माण हुआ इस विभाजन में रेलवे, आर्मी, ऐतिहासिक धरोहर, केंद्रीय राजस्व, सबका बराबरी से बंटवारा किया गया| भारतीय महाद्वीप के इस विभाजन में जिस संस्था ने मुख्य रूप से भाग लिया उसका नाम था मुस्लिम लीग एवं इंडियन नेशनल कांग्रेस, तथा जिन मुख्य लोगों ने हिस्सा लिया वो थे मो. अली जिन्नाह, लोर्ड माउन्टबेटेन, क्रेयल रैडक्लिफ, जवाहर लाल नेहरु, महत्मा गाँधी एवं दोनों संगठनो के कुछ मुख्य कार्यकर्तागण| इन सब में से सबसे अहम् व्यक्ति थे क्रेयल रैड्क्लिफ जिन्हें ब्रिटिश हुकूमत ने भारत पाकिस्तान के विभाजन की जिम्मेदारी सौंपी थी| इस विभाजन का जो मुख्य कारण दिया जा रहा था वो था की हिंदू बहुसंख्यक है और आजादी के बाद यहाँ बहुसंख्यक लोग ही सरकार बनायेंगे तब मो. अली जिन्नाह को यह ख्याल आया की बहुसंख्यक के राज्य में रहने से अल्पसंख्यक के साथ नाइंसाफ़ी या उन्हें नज़रंदाज़ किया जा सकता तो उन्होंने अलग से मुस्लिम राष्ट्र की मांग शुरू की| भारत के विभाजन की मांग वर्ष डर वर्ष तेज होती गई| भारत से अलग मुस्लिम राष्ट्र के विभाजन की मांग सन 1920 में पहली बार उठाई और 1947 में उसे प्राप्त किया| 15 अगस्त 1947 के दिन भारत को हिंदू सिख बहुसंख्यक एवं मुस्लिम अल्पसंख्यक राष्ट्र घोषित कर दिया गया| 1920 से 1932 में भारत पाकिस्तान विभाजन की नीव राखी गई| प्रथम बार मुस्लिम राष्ट्र की मांग अलामा इकबाल ने 1930 में मुस्लिम लीग के अध्यक्षीय भाषण में किया था| 1930 में ही मो. जिन्नाह ने सारे अखंड भारत के अल्पसंख्यक समुदाय को भरोसे में ले लिया और कहा की भारत के मुख्यधारा की पार्टी कांग्रेस मुस्लिम हितों की अनदेखी कर रही है|

इसके बाद 1932 से 1942 तक में विभाजन की बात बहुत आगे तक निकल गई थी, हालाँकि हिंदूवादी संगठन हिंदू महासभा देश का विभाजन नही चाहते थे परन्तु वह हिंदू और मुस्लिम के बिच के फर्क को बनाये रखना चाहते थे| सन 1937 में हिंदू महासभा के 19वें अधिवेसन में वीर सावरकर ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा की भारत के साजातीय एवं एकजुट राष्ट्र हो सकता है अपितु दो अलग-अलग हिंदू एवं मुस्लिम राष्ट्र के| इन सब कोशिशों के बावजूद भी 1940 में मुस्लिम लीग के लाहोरे अधिवेशन में जिनाह ने स्पष्ट कर दिया की उन्हें मुस्लिम राष्ट्र चाहिए और इस मुद्दे पर लीग ने बिना किसी हीचकीचाहट के बोला की हिंदू और मुस्लिम दो अलग-अलग धर्म है, अलग रीती-रिवाज, अलग संस्कृति है और ऐसे में दो अलग राष्ट्रों को एकजुट रखना खासकर तब जब एक धर्म अल्पसंख्यक हो और दूसरा धर्म बहुसंख्यक, यह सब कारण अल्पसंख्यक समाज में असंतोष पैदा करेगा और राष्ट्र में और सकारों के कार्य में अवरोध पैदा करेगा|

सन 1942 से 1946 विभाजन की बात चरमसीमा पर थी और विभाजन की तयारी आखिरी दौर में| 1946 में मुस्लिम लीग द्वारा “Direct Action Day” बुलाएजाने पर जो हुआ उस घटना से सारे राजनितिक एवं दोनों समुदाय के नेता घबरा गये थे| इस घटना के कारण उत्तर भारत और खास कर बंगाल ,में आक्रोश बढ़ गया और राजनितिक पार्टियों पर दोनों राष्ट्र के विभाजन का खतरा बढ़ गया| 16 अगस्त 1946 के “Direct Action Day” को “Great kolkata Riot” के नाम से भी जाना जाता है| 16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग ने आम हड़ताल बुलाई थी जिसमे मुख्य मुददा था था कांग्रेस के कैबिनेट का बहिष्कार और अपनी अलग राष्ट्र की मांग की दावेदारी को और मजबूत करना| “Direct Action Day” के हड़ताल के दौरान कलकत्ता में दंगा भड़क गया जिसमे मुस्लिम लीग समर्थकों ने हिन्दुओं एवं सिखों को निशाना बनाया जिसके प्रतिरोध में कांग्रेस समर्थकों ने भी मुस्लिम लीग कर्यकर्तों के ऊपर हमला बोल दिया| उसके बाद यह हिंसा बंगाल से बहार निकल बिहार तक में फ़ैल गई| केवल कलकत्ता के अन्दर में 72 घंटे के अन्दर में 4000 लोग मारे गए ओर करीब 1 ,00 ,000 लोग बेघर हो गए| इन सब के बाद बहुत से कांग्रेसी नेता भी धर्म के नाम पर भारत विभाजन के विरोध में थे| महात्मा गाँधी ने विभाजन का विरोध करते हुए कहा मुझे विश्वास है कि दोनों धर्म के लोग (हिंदू और मुस्लमान) शांति और सोहार्द बना कर एक साथ तेरा सकते हैं| मेरी आत्मा इस बात को अस्वीकार करती है कि हिंदू धर्म और इस्लाम धर्म दोनों अलग संस्कृति और सिधान्तों का प्रतिनिधित्व करते हैं| मुझे इस तरह के सिधांत अपनाने के लिए मेरा भगवन अनुमति नही देता| पर अबतक अंग्रेज अपने मकसद में कामयाब हो चुके थे| “Direct Action Day” के हादसे के बाद सबको लगने लगा था कि अब अखंड भारत का विभाजन कर देना चाहिए| दो नए राज्यों/राष्ट्रों का विभाजन माउन्टबेटेन प्लान के अनुसार किया गया| जुलाई 18, 1947 को ब्रिटिश संसद द्वारा “Indian Independence Act” पास किया गया जिसमे विभाजन कि रूप रेखा तैयार कि गई थी, और अंत 1947 में इस ACT को ब्रिटिश संसद अधिकारिक तौर पर पारित किया गया और भारत एवं पाकिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया गया|

One Response to “भारत विभाजन और हकीकत”

  1. dr dhanakar thakur

    सुमीत का लेख अच्छा है
    पर “भारतीय उप-महाद्वीप,: का प्रोग वे करते हैं जो यह मानते हैं की भारत में अनेक देश है अतेव इसका प्रयो एक राष्ट्रवादी को नहीं करना चाहिए.

    विभाजन से बने दो नए राज्यों/राष्ट्रों का निर्माण एक मिथक है दोनों शब्द पर्यायवाची नहीं हैं. दो सार्व भौम राज्य मात्र कहें.
    इस विभाजन में रेलवे, आर्मी, ऐतिहासिक धरोहर, केंद्रीय राजस्व, सबका २: १ के अनुपात में बंटवारा किया गया|
    इस विभाजन को स्वीकार करने वाले थे पटेल( जी हाँ पहला नाम पटेल का) जवाहरलाल नेहरु करवाने थे मो. अली जिन्नाह, कूटनीति थी लोर्ड माउन्टबेटेन,की , महत्मा गाँधी के विरोध के बाबजूद.
    रैड्क्लिफ जिन्हें ब्रिटिश हुकूमत ने भारत पाकिस्तान के विभाजन की जिम्मेदारी सौंपी थी जो उसने ईमानदारी से किया और पठानकोट को भारत में बछा जम्मू का रास्ता बचा दिया
    | अली जिन्नाह को गांधी जी की सुप्रई मैसी भाई नहीं और वह उदारवादी लिबरल डेमोक्रेटिक से फुन्दमेंतालिस्ट बन गया ( जैसे मुझे कोई -कोई मिथिला प्रान्त का मांग करने पर कहते हैं जबकी १९९० के दशक तक मैं बड़ा राष्ट्रवादी -मेरे कनीय मित्र डॉ. अनिल जैन या डॉ. तोगडिया बता सकते हैं मेरे बारे में)
    जिन्ना के बारे में अद्वानीजी की टिप्पणियाँ बिलकुल सही थीं- पर वह पहले और अंत में उदारवादी था बीच में फुन्दमेंतालिस्ट की पकिस्तान बना छोड़ा – अस्वथामा हटो नरो व– के इतरह पकिस्तान में वे केवल एक ही बात बोले और उसके मजार पर जा बोलते भी क्या?)

    हिन्दू और मुस्लिम दो अलग रास्त्र हैं यह तो सही है पर राज्य अलग उनके हों ? यह तर्क पर बैठता नहीं – १६ प्रतिशत मुस्लिम ने ३३ प्रतिशत जमीन लिया और केवल ९ प्रतिहत उधर रहे?
    यह त्रासदी है बिन्हाजन की आ उर हिन्दू अधिक मरे अ उर लुटे गए दोनों तरफ.

    १९२०-47 में प्राप्त कर लिया- केवल २७ वर्ष में उतना भाग जितना कभी हभी शायद ही मुगलों के पास रहा हो.(बिना प्रतिरोध के कभी नहीं?

    हिंदू- सिख बोलना गलत है( सिख हिन्दू है जिजका गुरुग्रंथ का हर प्पेज ॐ राम ओमकारा से शुरू होता है)
    यह सही है की ” हिंदू और मुस्लिम दो अलग-अलग धर्म है, अलग रीती-रिवाज, अलग संस्कृति है और ऐसे में दो अलग राष्ट्रों को एकजुट रखना खासकर तब जब एक धर्म अल्पसंख्यक हो और दूसरा धर्म बहुसंख्यक, यह सब कारण अल्पसंख्यक समाज में असंतोष पैदा करेगा और राष्ट्र में और सकारों के कार्य में अवरोध पैदा करेगा,” पर विभाजन नहीं उनके बीच अलग- अलग प्रतिनिधियों का चुनाव होना उचित रहता – इतनी बड़ी आबादी का अदला-बदली भी संभव नहीं था

    गांधी का विभाजन का विरोध बौद्धिक था वे इसके विरोध में अनशन पर क्यों नहीं बैठे?
    व् एरोक सकते थे पर हिम्मत नहीं जुटा पाए.
    भारत एवं पाकिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया गया दोनों लड़ रहे हैं- हथियार खरेद रहे है तिहाई पैसा उसमे लगता है पर इस्लाम के भीतर कोई बात है के एवाह साथ किसी के रह नहीं सकता? जड़ वहां है ? हिन्दू घटा, देश बता. तुम्हे बच्ची नहीं चाहिए( मुझे भी नाहे एही!) फिर देश बटेगा. हिन्दू घटेगा वह जगह हिन्दुस्तान (यानी भारत नहीं रह पायेगा)- कश्मीर की समस्या केवल यहे यही है.

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