लेखक परिचय

बी.आर.कौंडल

बी.आर.कौंडल

प्रशासनिकअधिकारी (से.नि.) (निःशुल्क क़ानूनी सलाहकार) कार्यलय: श्री राज माधव राव भवन, ज़िला न्यायालय परिसर के नजदीक, मंडी, ज़िला मंडी (हि.प्र.)

Posted On by &filed under पर्यावरण, विविधा.


four laneमुख्यमंत्री हि.प्र. ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान कहा था कि वृक्ष काटना न केवल एक कानूनन अपराध है बल्कि मानवता के खिलाफ़ कुठाराघात भी है |  किरतपुर से मनाली तक बन रहे फोरलेन उच्चमार्ग के निर्माण के दौरान हजारों पेड़ों की बलि देकर मानवता के साथ कुठाराघात किया जा रहा है | डा. राजेन्द्र प्रसाद ने सही कहा है कि तकनीकी विकास, विनाश को निमन्त्रण देता है और वही विनाशलीला आज हि.प्र. के लोगों को देखने को मिल रही है | जब से किरतपुर से मनाली फोरलेन सड़क का निर्माण शुरू हुआ है तब से विनाश का यह निमन्त्रण स्थानीय लोगों के घरों व खलियानों तथा हरे-भरे खेतों, बगीचों पर दस्तक दे रहा है |

जे.सी.बी. व बुलडोजरों से पहाड़ों के पहाड़ मैदानों में परिवर्तित हो रहे है | उन पहाड़ों पर उपजे लाखों पेड़-पौधे जमीन में समा रहे हैं | पेड़ों की चीख-पुकार सुनने वाला कोई नही है | हरे-भरे पेड़ जिनमें सालों पुराने आम, पीपल, शीशम, अलीची आदि के पेड़ शामिल हैं, मूली की तरह उखाड़ कर टुकड़े-टुकड़े किये जा रहे हैं | कोई भी सभ्य व्यक्ति इस विनाश की लीला को देख कर दंग रह जाता है | क्या यह विकास, विनाश को निमन्त्रण तो नही ?

फोरलेन सड़क निर्माण से बिलासपुर में 46 गाँव व मंडी में 19 गाँव प्रथम चरण में प्रभावित हुए हैं जिनमें सैंकड़ों किसान अपने घर व खेत गवां बैठे हैं | स्वारघाट से मंडी तक यदि नजर डालें तो जगह-जगह प्रकृति के सिने पर प्रहार हो रहा है | फोरलेन के निर्माण के लिए जहाँ कहीं पहाड़ों का सीना चिर कर सुरंगें बनाई जा रही है वहीं सड़कमार्ग की ऊँचाई बढ़ाने के लिए मिट्टी लेने हेतु पहाड़ों के पहाड़, जे. सी. बी. व बुलडोजर चला कर छलनी किये जा रहे हैं |

प्रकृति ने पहाड़ी प्रदेश हिमाचल को अनेक नेमतों से बख्शा है, जिसकी बदौलत यह दुनियाभर में पहचान बना चुका है | कल-कल बहती नदियाँ, बर्फ से लदे पहाड़ व घने जंगलों से प्रकृति ने इसे संवारा है | लेकिन अवैध खनन कर नदियों का सीना छलनी किया जा रहा है | वहीं पेड़ों का कटान कर प्रदेश के प्राकृतिक सौन्दर्य को प्रभावित करने में कोई कसर नही छोड़ी जा रही है | जंगलों को कंक्रीट के रूप में तबदील किया जा रहा है | परन्तु लोग मूकदर्शक बने हैं, प्रकृति ख़ामोश है और रो रही है परन्तु कोई उसकी आवाज नही सुन पा रहा है | क्योंकि लोगों के पास इस निर्माण के बाद की भयावह तस्वीर देखने की दूरदृष्टि नही है | जगह-जगह नदी-नालों में मलबा फैंका जा रहा है जिससे पानी के स्त्रोत व पानी का बहाव प्रभावित हो रहा है | हाल ही में उच्च न्यायलय के ग्रीन बैंच ने प्रकृति की इस तबाही को दौरा करके अपनी आँखों से देखा है लेकिन वे इस में कितना कुछ कर सकते हैं यह आने वाला समय बताएगा |

फोरलेन के लिए भूमि व मकान तथा पेड़ अधिग्रहण किये जा रहे हैं जिसमें लोगों के हितों का हनन हो रहा है | मुआवजा राशि मनमाने तरीके से आंकी जा रही है तथा हाल में पास हुए भूमि अधिग्रहण अधिनियम को लागू न करते हुए राष्ट्रीय उच्चमार्ग अधिनियम 1956 के अंतर्गत मुआवजा राशि निर्धारित की जा रही है जो बहुत कम है | फोरलेन के बनने से स्थानीय लोगों को होने वाली दिक्कतों का ध्यान नही रखा गया है | लोगों की पुकार सुनने वाला कोई नही है | प्रोजेक्ट डायरेक्टर एक ऐसा व्यक्तित्व लगा रखा है जिसे जनता से रूबरू होना अपनी तौहीन समझता है | जनता से तो क्या वह जिले के डी.सी. व एस.डी.एम. से मिलना भी अपनी गरिमा के विपरीत मानता है | यह तथ्य किसी भी डी.सी. व एस.डी.एम. से पता किया जा सकता है | यही कारण है कि कोई भी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी प्रभावित लोगों की किसी भी रूप में मदद नही कर पा रहा हैं |

प्रोजेक्ट डायरेक्टर द्वारा बयान ज़ारी करके बताया जा रहा है कि फोरलेन बनने से प्रभावित गांव का काया-कलप हो जायेगा लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है | फोरलेन के बनने के बाद आसपास की बची जगह की कीमत एकदम कम हो जाएगी क्योंकि फोरलेन के आसपास कोई व्यापर सम्बन्धी गतिविधि नही चलती तथा लोगों को, जानवरों को व वन्य प्राणियों को सड़क के आर-पार जाना मुश्किल हो जायेगा | पानी का बहाव जोकि पहाड़ से सुकेती खड्ड की तरफ जाता है सड़क की ऊँचाई बढ़ाने से रुक जायेगा क्योंकि उसके निकासी के लिए बहुत कम प्रावधान रखा गया है जिससे बची भूमि पर बरसात में पानी रुक जायेगा व उपजाऊ भूमि बेकार हो जाएगी | लोगों के अधिकतर शमशान घात सुकेती खड्ड के किनारे हैं जहाँ ऊपर वाले क्षेत्र के लोगों को मुर्दे ले जाना कठिन होगा | लोगों को जो कुछ मुआवजा मिल रहा है उसको सही जगह पर लगाने के लिए लोगों को कोई विमर्श नही दिया जा रहा है जिससे वे लोग इस राशि से या तो गाड़ियाँ खरीद रहे हैं या शराब पी रहे हैं जिससे उनके बच्चे बर्बाद हो रहे हैं |  अत: फोरलेन उच्चमार्ग स्थानीय जनता के लिए अभिशाप बन कर आ रहा है |

भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में अधिकतर स्टाफ़ सेवानिवृत कर्मचारी है जो मनमाने ढंग से कार्य कर रहे हैं तथा प्राइवेट कंपनी ने उनके साथ अपना स्टाफ़ लगाकर अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया को हाईजैक कर रखा है | ऐसा लगता है यह सरकारी फोरलेन नही बल्कि धन्नासेठों की जागीर है | एन.एच्.आई. का प्रोजेक्ट डायरेक्टर ठेकेदार कंस्ट्रक्शन कंपनियों पर क्यों इतना मेहरबान है यह भी एक सोचनीय विषय है | मकानों का आंकलन प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी कर रहे हैं जिस पर सरकारी सार्वजनिक विभाग का कार्य केवल मोहर लगाने तक सिमित रह गया है | निर्माण कार्य बाहर की कम्पनियों द्वारा किया जा रहा है जो अपने लाभ को बढ़ाने के लिए कई किस्म के हथकंडे यहाँ के साधरण लोगों के साथ अपना रही हैं | लोगो को पहले मुआवजा राशि अदा की जा रही है व बाद में उनके खिलाफ़ फौजदारी मुकद्दमे दर्ज़ करने के पत्र ज़ारी किये जा रहे हैं | बल्ह क्षेत्र के आधा दर्ज़न लोगों को ऐसे पत्र प्राप्त हुए हैं जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि लोगों ने मुआवजा राशि खर्च कर ली है जबकि भू-अर्जन अधिकारी मुआवजा राशि में से लाखों रूपए वापिस जमा करने के आदेश कर रहा है |

वर्तमान उच्चमार्ग-21 इस पहाड़ी क्षेत्र के लिए काफी था परन्तु क्योंकि कई मंत्रियों, अधिकारियों व उद्योगपतियों के होटल जो कुल्लू-मनाली में है को फ़ायदा पहुँचाने के लिए पर्यटकों का आगमन बढ़ाना था जिस कारण यह फोरलेन प्रोजेक्ट बना, अन्यथा भू-गौलिक स्थिति को देखते हुए इसकी कोई आवश्यकता नही थी | इससे उचित होता कि यदि उच्चमार्ग-21 को ही सुरक्षा की दृष्टि से मजबूत करते जिससे न तो उपजाऊ भूमि का नुकसान होता और न ही स्थानीय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता |

किरतपुर–मंडी तक तो फिर भी प्रक्रति यह बोझ झेल लेगी लेकिन मंडी से आगे तो संकरी गहरी ब्यास नदी घाटी संवेदनशीलता को और बढ़ा देती है जहाँ अभी तक राष्ट्रीय उच्चमार्ग भी ठीक ढंग से नही बन पाया है | यदि फोरलेन सुरंगों के माध्यमों से गुजरता है तो उस सूरत में पर्यटक प्राकृतिक सुन्दरता के दृश्य से वंचित रहेंगें | पहाड़ सुरंगों से छलनी होंगे जिससे भू-गर्भिक संतुलन बिगड़ जायेगा | वन्य जीवन के लिए भी जरूरत से ज्यादा सड़क निर्माण खतरा है | भूकंम्प की दृष्टि से भी यह चुनौती भरा होगा | अत: फोरलेन सड़क निर्माण पहाड़ी क्षेत्रों में उचित नही है तथा इनका निर्माण प्रकृति से खिलवाड़ है |

बी. आर. कौंडल

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *