लेखक परिचय

सावित्री तिवारी 'आजमी'

सावित्री तिवारी 'आजमी'

सहयोग स्वयंसेवी संस्था की संचालिका सावित्री पिछले कई वर्षों से उन दीन-हीन गरीब बच्चों के स्वास्थ्य व शिक्षा के बारे में प्रयासरत है जो खानाबदोश जीवन जी रहे हैं। वे 18 लड़के-लड़कियों को रोजाना 2 घंटे पढ़ाती हैं जो पहले दिन भर शहर में कूडा बीनते थे। अपने प्रकाशन 'आजमी प्रकाशन' के माध्यम से वे उन कवियों और लेखकों को प्रकाशित करतीं हैं जिन्हें आर्थिक तंगी के कारण सुविधा नहीं मिल पाती। अभी तक दस पुस्तकों का सफल प्रकाशन किया है जिसमें 'अशेष बाल कथायें' पुस्तक को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

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-सावित्री तिवारी ‘आजमी’

पुरूषों की इस दुनिया में, भगवान बनाई क्यों औरत।

कोमल अंगों-सुन्दरता से, भगवान सजाई क्यों औरत॥

दी अग्नि परीक्षा सीता बन, द्रौपदी की गई अर्ध नग्न।

अस्मिता हनन करने को ही, भगवान बनाई क्यों औरत॥

क्यों कोख में ही मारी जाती, बच जाय तो दुत्कारी जाती।

केवल जिल्लत ही सहने को, भगवान बनाई क्यों औरत॥

क्यों पाणिग्रहण जरूरी है, मां बनना क्यों मजबूरी है।

पालन-पोषन ही करने को, भगवान बनाई क्यों औरत॥

जब औरत दुख की साथी है, सुख का अमृत बरसाती है ।

तब दुख ही सहने की खातिर, भगवान बनाई क्यों औरत॥

सब कहते हैं- है देर नहीं, तेरे घर में अंधेर नहीं।

फिर ऍधियारी रातों में ही, भगवान बनाई क्यों औरत॥

जब औरत जग की जननी है, मॉ बहन सुता और घरनी है।

फिर पुरूषों का माध्यम बनकर, भगवान सताई क्यों औरत॥

क्या जतन, आजमी, करे बता, होगया बहुत ना और सता।

जब दया नहीं आती है फिर, भगवान बनाई क्यों औरत॥

14 Responses to “कविता/औरत”

  1. लक्ष्मी नारायण लहरे कोसीर पत्रकार

    laxmi narayan lahare

    आदरणीया ….तिवारी जी …आप तो हमारे माँ के उम्र के हैं आपको सप्रेम चरण स्पर्श मेरा ………
    आज इस समाज में अनेक बुराई पनप रही है जिसका विरोध होता है पर पहल नही होती
    जिस तरह से एक गर्भ से राम तो दुसरे से रावन ……
    अपने …बच्चे तुझको प्यारे रावण ….हो या राम ………………………………………………………
    लक्ष्मी नारायण लहरे
    पत्रकार
    कोसीर ….छत्तीसगढ़ ………………….

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    • सावित्री तिवारी 'आजमी'

      Savitri Tewari ' Azmi'

      धन्यवाद अशेष जी – आप जैसे महान साहित्यकार के एक -एक शब्द हमारे लिए मूल्यवान हैं l

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  2. Oshiya

    Wo ek niyaamat hai
    Wo ek kayaamat hai

    Wo sabse badi hasrat
    Wo sabse badi daulat

    Wo hai to khuda bhi hai
    Mit kar hai bani Aurat

    Reply
  3. आर. सिंह

    R.Singh

    Muje to lagta hai ki Bhagwan ne Insaan banaa kar hi bhool ki.Maine likha hai:
    Bhagwan kyon banaayaa mujhko aadami?
    Kya kiya maine ban kar aadami?
    Kya kya swapan dekhe the tumne mere shaishaw kaal mein?
    Shrishti ka niyamat tha main.
    Shrashtaa ka garva tha main.
    Kitne prashan the tum mujhe banaa kar?
    Sochaa tha tumne,
    Tumhaara hi swarup banunga main.
    Prashshta karungaa path nirwaan ka.
    Bojh halkaa hogaa bhagwan ka.
    BHaar uthaungaa shristi ka.
    Kalyaan karungaa sansaar kaa .
    Bahegi dharti par karunaa ki dhaaraa,
    Bahegaa waayu pyaar kaa.
    Chaahate the tum,
    Pyaar kaa saagar banu main,
    Jyoti kaa punj banu main.
    Saath doon main tumhaaraa shristi ke vikaas mein.
    Par kya kar paaya yah sab?
    Aaj main yah poochhtaa hun apne aap se.
    Kyon nahi ootaar payaa swarga ko dharaa par?
    Kyon na banaa paayaa mahi ko swarg?
    Karan bana kyon main binaash kaa?
    Rone lagaa dewatva,hasne lagaa shaitaan,
    Aachran ho gayaa kyon meraa aisa?
    Aaj lagtaa hai aisa,
    Bhool ki bhagwaan ne jo mujhe banaayaa .
    Nahi itnaa uthal puthal machta shristi mein,
    Aataa agar nahi main ashtitva mein.

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    • सावित्री तिवारी 'आजमी'

      Savitri Tewari

      सिंह साहेब बहुत सुंदर रचा है आप ने बधाई – आप ने अच्छा प्रश्न किया है रचैता से – मनुष्य जाति सचमुच भूल गई है अपने मूल को . प्रतिक्रिया के लिए आभार

      Reply
  4. Pawan Bakhshi

    औरत कविता नहीं बल्कि मेरी दृष्टी में हिंदी ग़ज़ल का बेहतरीन प्रयोग है. औरत को पढ़कर एक बहुत पुराना गीत aa याद गया. औरत ने जन्म दिया मर्दों को. मर्दों ने उसे बाज़ार दिया. जब जी चाहा मसला कुचला जब जी चाहा
    stree ki vayrha ko lekhika ne itne marmik dang se parstut kiya hai ki, stree ko hi nahi, balki stree ki dayneeyta pr purush ko bhi sochne pr vivas kar deti hai.
    bahut hi marmik rachna hai.
    Lekhika se nivedan hai is rachna ko print media ke madhyam se un logo tak bhi pahunchayen jinki pahunch internet tak nahi hai.
    vastav me bahut hi marmik rachna hai.
    Pawan Bakhshi

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    • सावित्री तिवारी 'आजमी'

      Savitri Tewari ' Azmi'

      धन्यवाद पवन जी , आप की सुंदर प्रतिक्रिया के लिए साधुबाद . आप के सुझाव को अमल मैं लाने के लिए प्रयास करेंगे

      Reply
  5. Rashmi K. Shah

    यदि हम भारत के सन्दर्भ में देखें तो ब्राह्मणों द्वारा रचित और राजाओं के माध्यम से ब्राह्मणों द्वारा जबरदस्ती देश के लोगों पर लागू करवाये गये भेदभावपूर्ण हिन्दू धर्मग्रन्थ ही नारी की वेदना और दुर्दशा के लिये १०० प्रतिशत जिम्मेदार हैं। इन सभी धर्मग्रन्थों के प्रकाशन, विक्रय और पढने, पर पाबन्दी लगनी चाहिये। आज स्त्री के साथ जो कुछ होता दिख रहा है, वह तो उक्त काले इतिहास का साइड इफैक्ट है।

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    • सावित्री तिवारी 'आजमी'

      Savitri Tewari ' Azmi'

      Pratikriya ke liye dhanyabad Rashmi ji , aap ki baat main arth hai , asha karti hoon ki aisa samaj ubhare.

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  6. Anil Sehgal

    ‘माता-प्रधान समाज’
    May I suggest to writer of poem Madam Savitri Tiwari ‘Azmi’ to compose a poem titled ‘माता-प्रधान समाज’ – ‘Matriarchal society’ invoking establishment of this system of society.
    Tradition of matriarchal society is in vogue in certain areas of north-east of the country and the system has recognition in law and is well-established.
    There are no complaints from the male in matriarchal society; menfolk eat, drink and be merry; and the female is in command in all matters. She brings the groom to her home to stay for the rest of his life with her in her home. Running the home is completely her burden while the men idle away their time.
    Any objections to the idea ?

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    • सावित्री तिवारी 'आजमी'

      Savitri Tewari ' Azmi'

      Pratikriya va sujhaav ke liye dhanyabad, aap ke sujhav par jaroor prayash karoongi . Shayad north- east ke us chhetra ki mahilayen adhik shaubhayashali hongi jahan ka aap ne jikra kiya hai , waise to Maa mahan hai lekin Mata Pradhan Samaj ka nirman karna kathin avashya hai.

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    • सावित्री तिवारी 'आजमी'

      Savitri Tewari ' Azmi'

      Dhanyabad Vijay ji , aap longon ki pratikriya hee hamara sambal hai

      Reply

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