गरीब भारत की रईस राजमाता

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एल. आर गाँधी

जब बाबा राम देव ने स्विस बैंकों में देश के काले धन को उजागर करने का अभियान छेड़ा तो राज माता ने अपने चार वरिष्ठ मंत्री बाबा को शीशे में उतारने भेजे …बाबा नहीं माने तो पूरे खेल की परिणति ‘रामलीला मैदान- रात्रि काण्ड’ केरूप में सामने आई … हमारे दिग्गी मियां तो स्वामी जी को ‘ठग’ पुकारने लगे.

अब अमेरीकी वेबसाईट्स ‘बिजनेस इन्सायिटर’ पर विश्व के २३ धन कुबेरों के नाम प्रकाशित हुए हैं. कांग्रेसियों की राजमाता ‘सोनिया जी’ का स्थान चौथा है और पाक के आसिफ अली ज़रदारी का उनिस्वां…. सोनिया जी को २से १९ अरब डालर अर्थात १० से ४५ हज़ार करोड़ की मालिक माना गया है. .. सबसे पहले जर्मन अखबार ‘दी वेल्ट ‘ ने २३ रईसों की सूची छापी थी जिसमें सोनिया जी को रईसों में चौथे पायदान पर रखा गया था. इस खबर का स्त्रोत वर्ल्ड लग्ज़री गाईड को माना गया.

अब दिग्गी मिया अमेरिकी वेबसाईट्स को झूठ का पुलिंदा बताएंगे या फिरजर्मन अखबार ‘डी वेल्ट ‘ में पहले ही छप चुकी खबर पर चुप्पी की भांति ‘चुप’ रहना ही बेहतर समझेंगे. या फिर राजमाता के निजी जीवन में ताँक झाँक करने और उनकी सुरक्षा में सेंध लगाने के घोर पाप के दोष पर अमेरिकी साईट्स और ज़र्मन अखबार पर मान हानि का मुकदमा ठोकेंगे.

विश्व के सबसे बड़े और विशाल लोकतंत्र का ढोल पीटने वाली हमारी सरकार और कानून व्यवस्था से तो पाक सर्वोच्च नयायालय ही अधिक सतर्क निकला. पाक प्रधान मंत्री को ज़रदारी के स्विस बैंक खातो पर कार्यवाही न करने के दोष में अभियुक्त करार दे दिया. यहाँ हमारे चोरों के सरदार और फिर भी ईमानदार … राजमाता के हर राज़ पर पर्दा डालने में व्यस्त हैं और हमारे बंगालीबाबु ने तो स्विस सरकार से समझौता ही कर लिया की पुराने स्विस खातों को ‘राज’ ही रहने दिया जाए … जिस प्रकार सोनिया जी ने , अपनी आय कर रिटर्न को सार्वजानिक न करने के पीछे अपनी निजता और सुरक्षा को ढाल बनाया , उससे तो दाल में कुछ काला नहीं बल्कि सारी दाल ही काली की कहावत चरितार्थ होती है.

 

 

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एल. आर गान्धी
अर्से से पत्रकारिता से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में जुड़ा रहा हूँ … हिंदी व् पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है । सरकारी सेवा से अवकाश के बाद अनेक वेबसाईट्स के लिए विभिन्न विषयों पर ब्लॉग लेखन … मुख्यत व्यंग ,राजनीतिक ,समाजिक , धार्मिक व् पौराणिक . बेबाक ! … जो है सो है … सत्य -तथ्य से इतर कुछ भी नहीं .... अंतर्मन की आवाज़ को निर्भीक अभिव्यक्ति सत्य पर निजी विचारों और पारम्परिक सामाजिक कुंठाओं के लिए कोई स्थान नहीं .... उस सुदूर आकाश में उड़ रहे … बाज़ … की मानिंद जो एक निश्चित ऊंचाई पर बिना पंख हिलाए … उस बुलंदी पर है …स्थितप्रज्ञ … उतिष्ठकौन्तेय

5 COMMENTS

  1. सोचने की बात तो ये है कि एक विदेशी पत्रकार सोनिया की अकूत दौलत का खुलासा करता है, लेकिन देशी मुख्यधारा का सेकुलर मीडिया खामोश है!
    फिर भी आप कहेंगे कि सेकुलर मीडिया निष्पक्ष है!!
    राजदीप, बुर्का दत्ता, विनोद दुआ, प्रणव जेम्स रॉय जैसे लोगो की औकात सिर्फ सोनिया के टूकड़ो पे पालना ही है?
    धाँसू लेख के लिए असली गांधी (लेखक) को आभार और नकली गांदी (सोनिया एंड कंपनी) को धिकार!

  2. कांग्रेस / सोनिया गांधी में इतनी हिम्मत भी नहीं है कि सुब्रह्मण्यम स्वामी के खिलाफ मानहानि का दावा करें ! वज़ह यही है! अभी तो विशेषाधिकार के कवच-कुंडल पहने बैठी हैं, उनके खिलाफ जांच-पड़ताल करने के लिये, मुकद्दमे करने के लिये प्रधानमंत्री से अनुमति चाहिये पर अगर वह खुद किसी के खिलाफ मानहानि का दावा करेंगी तब तो बचाव पक्ष को अदालत में सारे सबूत रखने का रास्ता खुल जाता है। इतना बड़ा खतरा सोनिया गांधी उठाने की स्थिति में नहीं है। यही वज़ह है कि ऐसे समस्त आरोपों को “चुपचाप” झेलते चले जाने की रणनीति अपनाई हुई है। वास्तव में सोनिया गांधी और उनके बच्चों / दामाद / बहन / मां – बाप की रुचि राजनीति में कभी भी नहीं रही, उनकी मुख्य रुचि तो अथाह पैसे कमाने में है। यदि राजनीति में घुस कर अकूत संपत्ति सरलता से अर्जित की जा सकती है तो राजनीति ही सही ! कहने वाले तो कहते हैं कि बोफोर्स में दलाली राजीव गांधी ने नहीं बल्कि सोनिया गांधी ने खाई थी पर राजीव गांधी अपने ऊपर आरोप झेलते चले गये पर अपनी पत्नी की सच्चाई देश के सामने रखना गवारा नहीं किया !

  3. सोनिया गांधी का जब राजीव गांधी से विवाह हुआ था, उस समय सोनिया गांधी व उनके परिवार की आर्थिक स्थिति क्या थी? कक्षा पांच तक पढ़ी हुई एक युवती नेहरू-गांधी परिवार की बहू बनने के बाद जिस प्रकार अमीर होती चली गई, वह वाकई एक अजूबा ही है। मायावती के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति एकत्र करने के लिये मुकद्दमा चलाया जा सकता है, पर सोनिया गांधी के विरुद्ध मुकद्दमा चलाना संभव नहीं है। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने पर्याप्त सबूत देते हुए हमारे मौनी बाबा, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिख कर सोनिया गांधी के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा चलाने हेतु अनुमति मांगी थी पर पहले तो मनमोहन सिंह उस प्रार्थना पत्र पर सांप की तरह कुंडली मार कर बैठ गये और अनुस्मारक भेजे गये तो मुकद्दमा चलाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया। कारण ? राजमाता की दया के आधार पर प्रधानमंत्री पद हासिल हुआ है, क्या कोई नौकर अपनी मालकिन को मुसीबत में डाल सकता है? सी.बी.आई. भी केन्द्र सरकार के आधीन कार्य करती है? फिर किससे उम्मीद की जाये कि सोनिया गांधी और उनके दामाद और इटली स्थित मां -बाप और बहन के अरबपति बनने चले जाने के कारणों की जांच पड़ताल करेगा ? सुब्रह्मण्यम स्वामी ने तो खुले आम आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी ने भारत के मंदिरों से मूर्तियों की तस्करी कराई और प्रधानमंत्री परिवार से संबंधित होने का फायदा उठाते हुए सारे सुरक्षा प्रबंधों को धता बताते हुए अनेकानेक गैर कानूनी कार्य किये ! अपनी शिक्षा के बारे में भी गलत शपथपत्र दिया !

  4. राज माता के सारे सस्ते कुत्ते भोंकना प्रारम्भ करेंगे, तो आपका ऐरावत भयभित हो कर पूंछ दबाकर भाग जाएगा|
    पर पता नहीं आज कल कुत्तोंका भोंकना कुछ कम सुनाई देता है|
    हाँ शायद उत्तर प्रदेश में हार के कारण?
    लेखक गांधी को धन्यवाद|

  5. यह सब फालतू की बातें है जो की आर आर एस के द्वारा की जा रही है .भारतीय मीडिया मे यह बाते हम नहीं छपने देते है तो संघ द्वारा विदेशों मे इस प्रकार की सूचियाँ बनवाकर गाँधी परिवार को बदनाम किया जा रहा है.हमारी राजमाता तथा राजपरिवार ने कितना त्याग और कितना बलिदान किया है इस पर ध्यान न देकर बोफोर्स से प्राप्त commission के इस धन पर नज़र लगा रहे है.यह बहुत ही गलत बात है.राजमाता और कांग्रेस चाहे तो इन पर मुकदमा कर सकते है पर नहीं करेंगे नहीं.

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