निंदा की प्रशंसा

पंडित सुरेश नीरव

निंदा जिंदा मनुष्य की ऐसी आनंददायक क्रीड़ा है जिस का लुत्फ वो मरते दम तक पूरे उत्साह से उठाना चाहता है। अफसोस है कि मरे लोग इसका आनंद नहीं उठ

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