विनय

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ईश्वर ! तुमने हमे दिया है
सुंदर सा एक शरीर
स्वस्थ सभी अंग दिए है
ये अपनी जागीर
हमको दो आँखे दी तुमने
देख-भाल कर बढ़े चले
कान दिए हैं सुने मधुर हम
अच्छाई को सुने-गुने
दो है हाथ दिए हमको हम,
काम हजारो कर लेंगे
दो पैरो के बल चलकर हम
नए-नए पथ खोलेगे
वाणी का वरदान दिया है,
हे ईश्वर ! हम मीठा बोले,
अब हमको दो ज्ञान-बुधि प्रभु |
हम अच्छे मानव हो ले |
करे प्रतिगा ,नये वर्ष में ,
द्वन्द-फंद का नाम न ले ,
मात्रभूमि के हित में हो जो
प्रभु ! हम ऐसे काम करे ||

सुनीति रावत

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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