लेखक परिचय

मनोज नौटियाल

मनोज नौटियाल

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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agitationकभी गुलामी के दंशों ने , कभी मुसलमानी वंशों ने

मुझे रुलाया कदम कदम पर भोग विलासीरत कंसो ने

जागो फिर से मेरे बच्चों शंख नाद फिर से कर डालो

फिर कौरव सेना सम्मुख है एक महाभारत रच डालो||

 

मनमोहन धृष्टराष्ट बन गया कलयुग की पहचान यही है

गांधारी पश्चिम से आकर जन गण मन को ताड़ रही है

भरो गर्जना लाल मेरे तुम माँ का सब संकट हर डालो

फिर कौरव सेना सम्मुख है एक महाभारत रच डालो ||

 

टू जी आवंटन का रेला ओलम्पिक में चौसर खेला

खाद्यानो में घोल रहे हैं महंगाई का जहर विषैला

विषधर ना बन पायें कल ये सभी सपोले दफना डालो

फिर कौरव सेना सम्मुख है एक महाभारत रच डालो ||

 

पन्ने बीते कल के खोलो मैंने कितने वीर जने हैं

तिलक मेरी मिटटी का करके लाल मेरे रणवीर बने हैं

कालिख पोते इन दुष्टों के काट मुंड गर्जन भर डालो

फिर कौरव सेना सम्मुख है एक महाभारत रच डालो ||

 

फिर मेरे गौरव को सोने की चिड़िया का ताज लगा दो

इन दुष्टों के काले धन को चौराहे पर आग लगा दो

नहीं चाहिए मुझको जूठन भूखे शेरों घात लगा लो

फिर कौरव सेना सम्मुख है एक महाभारत रच डालो ||……….मनोज

 

One Response to “फिर कौरव सेना सम्मुख है एक महाभारत रच डालो”

  1. Manoj Sharma

    वाह जी वाह ..इन पंक्तियों में कितना जोश भरा है ,
    कृष्ण कहा से लाये, और अर्जुन कहा खड़ा है ,
    अनशन और धरनों में तो लगता ,वो ही पांडव वीर खड़ा है ,
    समय वोट का आते ही कहे हर कोई ,
    बटन वो नहीं ये दबाना , ये मेरा भैया बड़ा है ,

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