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-सूर्य प्रकाश अग्रवाल

राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व सिमी के बारे में बयान देकर अपने नाना पं. जवाहर लाल नेहरु व राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के द्वारा स्थापित कांग्रेसी परंपरा का ही निर्वाह किया है। राहुल गांधी ने 6 अक्टूबर, 2010 दिन बुध्दवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा मुस्लिम आतंकवादी संगठन सिमी (स्टूडेण्ट इस्लामी मूवमेंट ऑफ इंडिया) को एक जैसा बताते हुए कट्टरपंथी की संज्ञा दी। राहुल गांधी को अपनी शिक्षा में उन्नति करते हुए इतिहास में रा. स्वं. सं. तथा सिमी के बारे में अभी और पढ़ना चाहिए। इस प्रकार के अल्पज्ञान के साथ तो उन्हें कोई बैंक में लिपिक भी नहीं नियुक्त कर सकेगा। कांग्रेस फिर किस प्रकार उन्हें देश का प्रधानमंत्री बनाने का सपना संजो रही है।?

एक बार छद्म वेश में क्रांतिकारी दल के सदस्य चंद्रशेखर आजाद कुछ आर्थिक मदद की आशा में इलाहाबाद में आनंद भवन में पं. नेहरु जी से मिले थे तथा अपना असली नाम बताते हुए क्रांतिकारी दल की कुछ आर्थिक मदद करने का आग्रह किया था। उस समय नेहरु जी के मूंह से निकला – यू पीपुल आर टेररिस्ट। इतना सुनते ही आजाद का चेहरा गुस्से में भर गया और एकदम से कमरे से बाहर आ गये और बाहर आकर गुस्से में अपने साथियों से कहा कि नेहरु हमको ‘टेररिस्ट’ कहता है। उस समय नेहरु भी राहुल गांधी की तरह आम जनता में युवा हृदय सम्राट माने जाते थे। यह सभी जानते हैं कि कांग्र्रेस में नेहरु परंपरा में आजाद, भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव जैसे देशभक्तों को टेररिस्ट (आतंकवादी) कहने की व मानने की बात होती रहती है। इसी परंपरा में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने एक बार महराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी और गुरु गोविंद सिंह को ‘पथभ्रष्ट देशभक्त’ कहा था। गांधी जी भी वायसराय लॉर्ड इरविन से समझौता करते समय भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को फांसी न देने की बात पर स्थिर नहीं रह सके थे तथा अगर वे निर्धारित तिथि से तीन दिन पहले ही फांसी दे देने की सलाह वायसराय को न देते तो तीनों देशभक्तों को कभी भी फांसी नहीं दी जा सकती थी, क्योंकि स्वयं गांधी जी को अंदेशा था कि वायसराय लॉर्ड इरविन से समझौता की घोषणा होते ही सुभाषचंद्र बोस देश भर में प्रबल आंदोलन खड़ा कर देगें और फिर भगत सिंह व उनके साथियों को फांसी देना अंग्रेज सरकार के लिए बहुत मुश्किल हो जाता।

अब भी कांग्रेस संसद पर आक्रमण करने वाले मूल योजनाकार मोहम्मद अफजल को फांसी नहीं दे पा रही है। मुंबई में 26/11 के आंतकवादी हमले के दौरान पकड़े गये आंतकवादी अजमल कसाब की खतिरदारी करते हुए जेल में रखा जा रहा है। अब्दुल्लाओं (शेख अब्दुल्ला, फारुख अब्दुल्ला व उमर अब्दुल्ला) ने कश्मीर की हालत खराब करके रख दी है। उस पर उमर अब्दुल्ला का यह कहना कि कश्मीर का भारत में विलय अस्थाई है, घोर आपत्ति योग्य है। इस देशद्रोही बयान पर कांग्रेस चुप है, देश के दुश्मन पाकिस्तानियों की जब्त जायदाद वापस क्यों की जा रही है? क्या पाकिस्तान में भी जब्त की गई हिन्दुस्थानियों की जायदाद वापस की गई? ऊपर से कांग्रेस इस बात का गुणगान करती रहती है कि देश में हुए आतंकवादी मामलों को मुस्लिम आंतकवाद न कहा जाय, क्योंकि इस्लाम तो मानवतावादी, शांति, भाईचारेवाला मजहब है फिर क्यों स्थान-स्थान पर बम फूट रहे है? क्यों आंतकवादी घटनाओं में मुसलमान ही अधिकतर पकड़े जा रहे हैं? कांग्रेस ने 1947 में देश को एक बार (हिन्दु व मुसलमान) धर्म के आाधार पर बंटवा कर पाकिस्तान व हिन्दुस्थान बनवा दिया था अब फिर अपने खिसके वोट बैंक को वापस लाने के लिए मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति व रीति कांग्रेस में चरम पर पहुंच गयी है। राहुल गांधी भी उसी राजनीतिक आचार, विचार व संस्कार के युवा नेता है जिनके पास अपना कहलाने के लिए कुछ भी नहीं है। वे भारत की गरीब, दलित व पिछडी बस्तियों में जाने, वहां खाने-पीने का ड्रामा तो करते है परंतु कभी गांवों में रह कर वहां के लोगों की पीड़ा को नहीं समझ सके । नेहरु जी का घेवता (पुत्री का पोता) होने का बिल्ला (तमगा) उनके पास होना ही देश के अगले प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यता होगी क्या? कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को राष्ट्र, राष्ट्रीयता, राष्ट्रवादी व भारत को समझना चाहिए। राहुल गांधी को कभी भी रा. स्वं. संघ के लगातार होते रहने वाले कार्यक्रमों में (निमंत्रण अथवा अचानक बगैर निमंत्रण के) जाकर स्वंय जरुर देखना चाहिए कि वहां क्या हो रहा है? और यदि कुछ राष्ट्र विरोधी हो रहा है तो तत्काल ही संघ पर कानूनी कार्यवाही करने के आदेश अपनी मां को देना चाहिए न कि केवल कुछ चापलूसों व मुस्लिम तुष्टीकरण करने वाले कांग्रेसी स्वार्थी राजनेताओं के बहकावे में आकर गलत-सलत बयान दे देना उनको राजनेता नहीं बनाता है।

सत्तालोलुप राजनेता इतने भ्रष्ट हो चुके है कि वे अपने नेता (राहुल गांधी) के अबोध, निष्कपट व बाल मन में भी देशघाती सोच व चिंतन का जहर घोलने से भी नही चूकते है। अब ऐसे ही कांग्रेसी राजनेता ‘इस्लामी आंतकवाद’ से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ‘भगवा आंतकवाद’ का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।

* लेखक सनातन धर्म महाविद्यालय, मुजफ्फरनगर के वाणिज्य संकाय में रीडर तथा स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।

5 Responses to “राहुल गांधी का बयान-नेहरु व गांधी की परंपरा का अंग”

  1. sunil patel

    धन्यवाद अग्रवाल जी. बिलकुल सही कहा है. आज जरुरत है देश को सच्चा इतिहास बताने की. वर्तमान तो सभी जानते है, इतिहास से समाज सबक लेता है, सजग रहता है.

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  2. दिवस दिनेश गौड़

    Er. Diwas Dinesh Gaur

    अग्रवाल जी को बेहतरीन लेख के लिए बधाई|
    आप को [अध् कर संन्तोष के साथ हर्ष भी हुआ| चिंता न करें जल्दी ही कांग्रेस का विनाश हम और आप अपनी आँखों से देखेंगे| अब स्वामी रामदेव एक उम्मीद की किरण बन कर आ रहे हैं, इस बार हमें कोई भूल नहीं करनी है| एकमत होकर स्वामी जी के साथ खड़े रहना है|

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  3. Awadhesh

    सार्थक लेख. धन्यवाद.
    आज़ादी के पहले की परिस्थितियां अब नहीं हैं. स्थिति बदल गयी है. बिस्मिल को मरते दम तक इस बात का अफ़सोस था की देश की स्थिति क्रांति के लायक नहीं. लेकिन आज नेहरु जैसे राजनेताओं को जबाब देने के लिए करोडो लोग है. देश में सफलतापूर्वक कई क्रांतियाँ हो चुकी हैं. राहुल को मुहतोड़ जवाब दिया जा चूका है और आगे भी दिया जाएगा.

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