रामस्वरूप रावतसरे की पांच लघु कविताएं

1-नीम

नीम

खुद

ही

हकीम

2-हिम्मत

फटे

को सीना

और

सिले को फाडना

हिम्मत का

काम

है

3-घर

आदमी

को

पता है,

घर जाते ही

समस्याओं से

जुझना पडेगा

फिर भी

वह

खूंटे के बैल

की तरह

गर्दन नीची किए

हर शाम

चला जाता है

घर

4-मूल्यांकन

हम उच्च व्यवस्था

का

दम्भ

भरते है

पर

हमारे यहां

हंसों की विद्वता

का

मूल्यांकन

कौवे करते है

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