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मन की शक्ति द्वारा ही संभव है चिर युवा बने रहना

सीताराम गुप्ता

     भारत-रत्न से सम्मानित प्रसिद्ध इंजीनियर डॉ. मोक्षगुण्डम विश्वेश्वरैया ने सौ वर्ष से अधिक की आयु पाई और अंत तक अत्यंत सक्रिय जीवन व्यतीत किया। एक बार एक व्यक्ति ने उनसे पूछा कि आपके चिर यौवन का रहस्य क्या है? डॉ. विश्वेश्वरैया ने उत्तर दिया, ‘‘जब बुढ़ापा मेरा दरवाज़ा खटखटाता है तो मैं भीतर से जवाब देता हूँ कि विश्वेश्वरैया घर पर नहीं है और वह निराश होकर लौट जाता है। बुढ़ापे से मेरी मुलाक़ात ही नहीं हो पाती तो वह मुझ पर हावी कैसे हो सकता है?’’ इस उत्तर में न केवल विनोदप्रियता झलकती है अपितु जीवन में स्वास्थ्य, सक्रियता व उत्साह के लिए पूर्ण आत्मविश्वास व सकारात्मक दृष्टिकोण भी नज़र आता है।

     कहा गया है जैसा मन वैसा तन। जब कोई बूढ़ा न होने की ठान लेता है तो वह चिर युवा बना रहता है और अंत तक सक्रिय व सक्षम भी। वस्तुतः मनुष्य उतना ही बूढ़ा या जवान है जितना वह स्वयं के विषय में अनुभव करता है। बुढ़ापा तन का नहीं मन का होता है। मन जवाँ तो तन जवाँ। हमारी सोच इस दिशा में सबसे महत्त्वपूर्ण है अतः हमें चाहिए कि हम अपनी सोच को सदैव सकारात्मक रखें और यदि ऐसा नहीं है तो सोच में सकारात्मक परिवर्तन करें व सदैव युवा बने रहें और सक्रिय जीवन व्यतीत करें। वैसे भी यदि हम सक्रिय जीवन व्यतीत करते हैं तो बुढ़ापा पास नहीं फटकता। निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखकर आप भी बढ़ती उम्र के अहसास से मुक्त होकर अत्यंत सक्रिय जीवन व्यतीत कर सकते हैं:

1.   अपनी दिनचर्या को नियमित रखें तथा समय पर सब काम पूरे करें।

2.   पर्याप्त नींद लें। अधिक सोना ओर कम सोना दोनों ही अच्छे स्वास्थ्य के शत्रु हैं।

3.  पर्याप्त आराम करें। थक जाने पर आराम ज़रूरी है लेकिन थकान भी ज़रूरी है ताकि आराम किया जा सके। थकान के बिना आराम का कोई मतलब नहीं इसलिए शारीरिक श्रम ज़रूरी है।

4.  शारीरिक श्रम अथवा क्रियाशीलता के लिए निम्नलिखित उपायों पर  ध्यान देंः

क-  नियमित रूप से व्यायाम तथा सैर करें।

ख-  घर की साफ-सफाई और अपने काम ख़ुद करें।

ग-  पेड़-पौधे लगाएँ और उनकी देखभाल ख़ुद करें। बागबानी स्वयं में एक उपचार पद्धति ही है।

घ-  पालतू जानवरों का स्पर्श और साहचर्य भी उपचारक होता है क्योंकि वे व्यक्ति को न केवल सक्रिय रखते हैं अपितु तनावमुक्त करने में भी सहायक होते हैं इसलिए इस बारे में भी सोचा जा सकता है।

5.  नज़दीक आने-जाने के लिए वाहन का प्रयोग करने के बजाए पैदल आएँ-जाएँ।

6.  अपना छोटा-मोटा सामान ख़ुद उठाएँ और पैदल चलकर घर आएँ। चढ़ने-उतरने के लिए लिफ़्ट की बजाय सीढ़ियों का प्रयोग करें। ज़ीनों पर बार-बार चढ़ने-उतरने और इधर-उधर आने-जाने को परेशानी का कारण न मानें अपितु इसे व्यायाम के रूप में लें।

7.  हँसना न केवल एक अच्छा व्यायाम और उपचारक क्रिया है अपितु तनावमुक्ति का साधन भी है। ख़ूब ठहाके लगाइए।

8.  मन को सकारात्मक विचारों से ओतप्रोत रखें। इसके लिए नियमित रूप से प्रेरणास्पद साहित्य पढ़ें।

9.  आत्मविश्वास से भरपूर रहें। विषम परिस्थितियों में अपने मनोबल को ऊँचा बनाए रखें।

10. भावनात्मक संतुलन बनाए रखें। छोटी-छोटी बातों पर भावुक न हों।

11. मानसिक रूप से चुस्त-दुरुस्त बने रहने के लिए दिमाग़ी कसरत करते रहें। वर्ग-पहेली भरने अथवा गणित के सवाल निकालने से व्यक्ति दिमाग़ी तौर पर अधिक सक्रिय रहता है।

12. कुछ न कुछ नया सीखते रहने का प्रयास करें इससे व्यक्ति की रचनात्मकता के स्तर में वृद्धि होती है जिससे व्यक्ति जल्दी बूढ़ा नहीं होता और बुढ़ापे में भी चुस्त-दुरुस्त बना रहता है।

13. बुढ़ापे को दूर रखना है तो अकेलेपन से बचें। सामाजिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लें। हर उम्र के व्यक्तियों से विशेष रूप से बच्चों से संवाद स्थापित करने का प्रयास करें।

14. भोजन के संबंध में विशेष रूप से सतर्क रहें। फास्ट फूड व जंक फूड की बजाए सादा व प्राकृतिक भोजन ही लें। भोजन में ताज़ा फल-सब्ज़ियों की मात्रा अधिक होनी चाहिए ताकि पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट्स मिल सकें।

     हम केवल विषाक्त मनोभावों तथा आदतों से छुटकारा पाकर, जीवन में सक्रियता अथवा क्रियाशीलता बनाए रखकर, जीवन में लचीला होने की विधि सीखकर तथा अपने जीवन में प्रेम को अत्यधिक महत्वपूर्ण तत्त्व बनाकर व बढ़ती उम्र के अहसास को अच्छे स्वास्थ्य, सक्रियता व उत्साह के अहसास में परिवर्तित करके ही सदैव युवा बने रह सकते हैं। इसके लिए मन को पूरी तरह से प्रशिक्षित व तैयार करना बहुत ज़रूरी है अतः बुढ़ापे से बचने तथा चिर युवा बने रहने के लिए मन में नियमित रूप से निम्नलिखित स्वीकारोक्तियाँ करें:

·        मैं एकदम युवा हूँऔर मेरा स्वास्थ्य बहुत अच्छा है।

·        प्रतिदिन हर तरह से मैं अधिकाधिक स्वस्थ हो रहा हूँ।

·        निर्भय होकर मैं अत्यंत सक्रिय, साहसी तथा अनुशासित जीवन व्यतीत कर रहा हूँ।

·        मेरी प्रकृति में लचीलापन है तथा मैं जीवन में परिवर्तनों तथा चुनौतियों को स्वीकार करता हूँ।मैं आत्म विश्वास तथा उत्साह से परिपूर्णहूँ।

·        मेरे ऊपर केवल सकारात्मक विचारों तथा सकारात्मक सुझावों का प्रभाव ही पड़ता है।

·        प्रेम, करुणा तथा देखभाल मेरे जीवन के महत्वपूर्ण तत्त्व हैं।

·        जीवन मेरे लिए एक अमूल्य उपहार है तथा मैं पूर्ण सचेतनता के साथ जीवन का आनंद उठाता हूँ।

सीताराम गुप्ता