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    Homeराजनीतिजाति-धर्म के नाम पर बढ़ता उन्माद देश व समाज के लिए घातक

    जाति-धर्म के नाम पर बढ़ता उन्माद देश व समाज के लिए घातक

    दीपक कुमार त्यागी
    आजकल देश में हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सभी के त्यौहारों का सीजन चल रहा है, कायदे में तो अधिकांश लोगों को कम से कम इस दौर में पूजापाठ इबादत में व्यस्त होना चाहिए था, लोगों के लिए गलत कार्य करने पूर्ण रूप से वर्जित होने चाहिए थे। लेकिन इस वक्त देश की राजधानी दिल्ली से लेकर के देश के अलग-अलग शहरों में रामनवमी व हनुमान जन्मोत्सव के धार्मिक जुलूसों पर पथराव के चलते जबरदस्त ढंग से हंगामा बरपा हुआ है, देश में धर्म पर आधारित राजनीति चंद दिनों में ही अपने अधर्म के चरम पर पहुंच गयी है। हालांकि इन हंगामा बरपाने वाले देशद्रोही लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही भी शासन-प्रशासन के द्वारा लगातार चल रही है, कहीं पर दंगा फसाद में शामिल लोगों के घरों पर सिस्टम बुलडोजर चलवा रहा है, कहीं इन देशद्रोही लोगों पर  एनएसए तक लगाई जा रही है। वैसे देखा जाये तो दिलोदिमाग को बुरी तरह से झकझोर देने वाली दंगा फसाद की स्थिति देश में ना जाने क्यों अब आयेदिन बनने लग गयी है, यह स्थिति देश के नियम कायदे, कानून व तरक्की पसंद देशभक्त देशवासियों को बहुत ज्यादा चिंतित करने का कार्य कर रही है। क्योंकि यह देशभक्त लोग तो दिन-रात मेहनत करके देश के विकास को एक नयी तेज रफ्तार देने का कार्य करते हैं, वहीं देश के अंदर छिपे हुए बैठे चंद देशद्रोही अराजक तत्व कभी जाति, कभी धर्म, कभी अमीर, कभी गरीब, कभी शहर, कभी गांव, कभी मोहल्ले, कभी भाषा, कभी वेशभूषा, कभी पहाड़, कभी मैदान, कभी प्रदेश आदि के नाम पर लोगों की बीच मतभेद पैदा करके उनको आपस में लड़वा कर उन्माद फ़ैलाने का कार्य करते हैं। लेकिन सबसे बड़े अफसोस की बात तब होती है जब देश व समाज के हित में आयेदिन मंचों से सार्वजनिक रूप से बड़ी-बड़ी बातें करने वाले पक्ष विपक्ष के चंद राजनेता भी अपने एक क्षणिक राजनीतिक स्वार्थ के लिए इन देशद्रोही अराजक तत्वों को पूरा संरक्षण देने का कार्य करते हैं। आज के समय में सभ्य समाज के लोगों के सामने विचारणीय प्रश्न यह है कि देश में जिस तरह से दिन-प्रतिदिन तेजी के साथ ऐसे हालात बनते जा रहे हैं कि बिना सिर पैर की बातों को लेकर भी एक ही पल में दंगा फसाद शुरू हो जाता है, वह स्थिति देश व समाज हित के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है और उस पर तत्काल लगाम लगाने की आवश्यकता है। आज समय की मांग है कि देश के विकास की तेज गति को अनवरत बरकरार रखने के लिए देशहित में तत्काल जाति-धर्म के नाम पर होने वाले आयेदिनों के हंगामे, दंगा-फसाद, उन्माद, तुष्टिकरण व धार्मिक कट्टरवाद पर शासन व प्रशासन का सख्ती से नियंत्रण करना बेहद आवश्यक है‌। 
    *”हाल के कुछ दिनों में घटित या फिर पूर्व में घटित घटनाओं के समय उत्पन्न हालात का निष्पक्ष रूप से आंकलन करें, तो देश में अब वह समय आ गया है कि जब केन्द्र व प्रत्येक राज्यों की सरकारों को अपने वोट बैंक की राजनीति को तत्काल त्याग कर लोगों को देश व समाज के हित में नियम कायदे व कानून का सख्ती से पालन करने के लिए बाध्य करना ही होगा, उनको देश में पूर्ण अनुशासित ढंग से रहना सिखाना ही होगा। वैसे भी देश में अब वह समय आ गया है जब सरकार व सिस्टम को लोगों को प्यार से व पूर्ण सख्ती के साथ जो व्यक्ति जिस भाषा में समझें उसे समझना होगा कि हमारा प्यारा देश संविधान से चलता है ना कि किसी भी  जाति या धर्म के धार्मिक ग्रंथ से चलता है, इसलिए जिस व्यक्ति को भी भारत देश में रहना है उसके लिए संविधान के द्वारा तय नियम कायदे कानून व व्यवस्था सर्वोपरि है।”*
    देश में आज भी बहुत सारे ऐसे लोग जीवित हैं जिन्होंने देश की आज़ादी के बाद का वह कठिन दौर भी देखा था, जब देश में एक छोटी सूई से लेकर के पानी के विशाल जहाज़ तक के लिए हम लोगों को विदेशी देशों पर पूरी तरह से निर्भर रहना पड़ता था।  लेकिन गर्व की बात यह है कि आज हम लोग अपने पूर्वजों के ज्ञान, आविष्कार व मेहनत की बदौलत देश में अनगिनत छोटे बड़े प्रोडक्ट का उत्पादन करके देश का नाम दुनिया में रोशन करके अधिकांश में आत्मनिर्भर बन गये हैं। वैसे भी हम लोगों को यह समझना होगा कि देश अपने नीतिनिर्माताओं की बेहद कुशल कारगर रणनीति और दुनिया भर में अपार संभावनाओं से परिपूर्ण विभिन्न अवसरों को हासिल करने के चलते मेहनत के दम पर बहुत तेजी के साथ विकास के पथ पर अग्रसित हो रहा है, इसलिए इस विकास के पथ पर किसी भी प्रकार का कोई व्यवधान उत्पन्न नहीं होना चाहिए, लेकिन कुछ लोग हैं जो कि दंगा फसाद व अनुशासनहीनता करके विकास के पथ पर व्यवधान उत्पन्न करके सबकी मेहनत पर पानी फेरना चाहते हैं, सरकार व सिस्टम को ऐसे देशद्रोहियों के मंसूबे को कामयाब होने से रोकना होगा, हम लोगों को भी उनके झांसे में आने से खुद को बचना होगा और देश को भी बचाना होगा। 
    हम लोगों को अपने इतिहास से सबक लेना होगा कि आजादी के बाद से लेकर आज तक ना जाने कितनी बार देश में चंद लोगों के द्वारा ओछी राजनीति व क्षणिक स्वार्थ के चलते छोटी-छोटी बातों का बतंगड़ बनाकर दंगा फसाद करवाने का कार्य किया है, उनके उकसावे में आकर के चंद लोगों ने अपने ही हाथों एक दूसरे के घरों को जलाने व एक दूसरे की हत्या तक करने का दुस्साहस किया है। वास्तव में देखा जाये तो यह लोग हमारे देश व समाज के सबसे बड़े दुश्मन हैं, क्योंकि इनके द्वारा दंगा फसाद को अंजाम देकर ना सिर्फ इंसान व इंसानियत की हत्या कराने का जघन्य अपराध किया जाता हैं, बल्कि इन लोगों की दंगा-फसाद की घटनाओं ने देश के विकास में बार-बार अवरोध उत्पन्न करने का कार्य किया है, इन चंद गलत लोगों की हरकतों की वजह से पूरी दुनिया में देश की छवि खराब होने का कार्य होता है।
    *”वैसे देखा जाये तो देश में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक में जाति-धर्म की आड़ में होने वाले आयेदिन के इन दंगा फसादों ने भारत की बहुत ही शानदार और गौरवशाली बहुलतावादी संस्कृति को बेहद गहरे जख्म देने का कार्य किया है, इन हालातों ने लोगों के बीच एक दूरी बनाकर दीवार खड़ी करने का कार्य किया है, समाज  में लोगों के बीच प्यार-मोहब्बत आपसी भाईचारे व विश्वास को बुरी तरह से छिन्न-भिन्न करने का कार्य किया है। देश में बहुत तेजी से बढ़ते धार्मिक उन्माद, धार्मिक कट्टरवाद ने आपसी प्यार-भाईचारे को कम करके लोगों के बीच एक गहरी खाई खोदने का कार्य कर दिया है, जिसको देश व समाज हित में अधिक गहरी होने से तत्काल रोकना होगा, हालात को ठीक रखने के लिए सरकार को जल्द  से जल्द जाति धर्म व वोट बैंक को देखें बिना देश में सभी लोगों को अनुशासन में रहना सिखाने के लिए तत्काल ही ठोस प्रभावी कदम धरातल पर उठाने होंगे।”*
    वैसे भी हम सभी देशवासियों को समय रहते यह समझना होगा कि देश में अमीर-गरीब, जाति-धर्म, भाषा-क्षेत्र आदि जैसे बेहद संकीर्ण आधारों पर आम लोगों को बांटकर उनके बीच विवाद पैदा करने का कार्य कुछ स्वार्थी लोगों के द्वारा अपनी क्षणिक स्वार्थपूर्ति के लिए बेहद चतुराई के साथ किया जा रहा है, इसलिए देश व समाज हित में अब हम लोगों को ऐसे धूर्त लोगों के झांसे में आने से बचना होगा। वैसे देश में जाति-धर्म के नाम पर आयेदिन बहकावे में आकर दंगा फसाद करने वाले लोगों के लिए कम से कम यह जानना बेहद जरूरी है कि भारत दुनिया का एक मात्र ऐसा देश है जहां पर सभी जाति व सभी धर्मों को एक समान पूर्ण स्वतंत्रता मिली हुई है, लेकिन फिर भी धर्म की आड़ लेकर के कुछ संगठन व कुछ लोग आयेदिन लोगों को बरगला कर माहौल खराब करने का कार्य करते रहते हैं, जो कि सरासर ओछी राजनीति से प्रेरित है। मुझे बेहद अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि देश में जिस तरह से अपने-अपने धर्म की आड़ में एक-दूसरे के धर्म के लोगों को चिढ़ाने का कार्य पिछले कुछ वर्षों से किया जा रहा है, वह देश की एकता अखंडता के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। समाज को तोड़ने वाली ऐसी हरकत करने लोगों को यह समझना होगा कि उनकी इस हरकत के चलते धर्म के नाम पर अपनी दुकानदारी चलाने वाले तथाकथित ठेकेदार व चंद स्वार्थी राजनेता देश के आम जनमानस के बीच एक बेहद जहरीली विद्धेषपूर्ण मानसिकता का विकास करने का कार्य कर रहे हैं, जो कि देश व सभ्य समाज दोनों के लिए बेहद घातक है। वैसे भी हम लोगों को समय रहते यह समझना होगा कि सच्चा धर्म हमें अनुशासन में रहकर जीवन जीना सिखाता है, ना कि धर्म के नाम पर दंगा फसाद, अनुशासनहीनता करना सिखाता है। लेकिन फिर भी ना जाने क्यों धर्म के नाम पर आयेदिन देश में अधर्म होने लगा है दंगा-फसाद, लूटखसोट व निर्दोष लोगों की हत्याएं तक होने लगी हैं। जो धर्म सभी लोगों को जीवन देना सिखातें है, अफसोस आयेदिन उस धर्म की आड़़ लेकर ही धर्म के तथाकथित ठेकेदार व उनके अंधभक्त लोगों की उन्मादी भीड़ के द्वारा अज्ञानी लोगों को उकसा कर मानव व मानवता की हत्याएं बैखौफ होकर करवाने का अपराध किया जा रहा है।
    वैसे देखा जाये तो पूरी दुनिया में धार्मिक उन्माद व कट्टरवाद अपने पूर्ण चरम पर है, धर्म की ओट लेकर के आयेदिन अधर्म के कार्य हो रहे हैं, तथाकथित स्वघोषित धर्म के ठेकेदार व चंद लोग इंसान व इंसानियत के दुश्मन बने हुए हैं, ऐसे लोगों की वजह से आज पूरी दुनिया के बहुत सारे देशों में जबरदस्त हंगामा बरपा हुआ है, उस हालात से अब हमारा देश भारत भी अछूता नहीं रहा है। एक तरफ तो हमारा देश भयावह कोरोना महामारी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ मंदी का भयंकर प्रकोप है, देश में तेजी से बढ़ती मंहगाई व बेरोजगारी की समस्या की जबरदस्त मार वाला दौर चल रहा है। लेकिन अफसोस कुछ राजनेताओं व धर्म के तथाकथित ठेकेदारों के इशारों पर कुछ नादन लोगों की भीड़ को अपनी गंभीर समस्याओं, रोजीरोटी-रोजगार व बच्चों के उज्जवल भविष्य की योजनाओं पर काम करने की कोई चिंता नहीं है, इन चंद लोगों को ऐसे मुश्किल समय में भी देश में दंगा फसाद करके समस्याओं को और गंभीर करने में आनंद आ रहा है। मेरा ऐसे राजनेताओं व धर्म के तथाकथित ठेकेदारों से केवल एक सवाल है कि क्या वो भी इस नफ़रती हिंसक भीड़ का हिस्सा कभी खुद व अपने बच्चों को बनाना चाहेंगे, मुझे पूरा विश्वास है कि सभी का जवाब नहीं में होगा, तो फिर यह चंद लोग देश में दूसरों के बच्चों के लिए नफ़रत के बीज क्यों बोने का कार्य कर रहे हैं।

    आज हम लोगों को शांत मन से विचार करना चाहिए कि धर्म का मूल आधार अनुशासित जीवन, प्रेम व सद्भाव होता है, लेकिन आज के दौर में देखने वाली बात यह है कि इन बातों पर आखिर अमल कितने लोग व धर्म के कितने तथाकथित ठेकेदार करते हैं। हम लोगों को यह भी ध्यान रखना होगा कि सत्ता हासिल करने के लालच में देश के चंद राजनेताओं के द्वारा धर्म के कुछ तथाकथित ठेकेदारों के सहयोग से आम लोगों को बरगला कर धर्म के नाम पर नफ़रत की कभी ना टूटने वाली मजबूत दीवार खड़ी करने का कार्य किया जा रहा है, इस साजिश को हम लोगों को समय रहते समझकर देश व समाज के हित में हर हाल में नाकाम करना होगा। वैसे भी देखा जाये तो धर्म की आड़ लेकर हंगामा बरपाने वाले लोगों को क्या कभी यह महसूस होता है कि वह और उनका परिवार अब पूर्ण रूप से सुरक्षित है तो इसका जबाव भी नहीं में ही होगा, तो फिर धर्म की आड़ में बार-बार अधर्म क्यों। आज हम लोगों के सामने चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि देश में तेजी से बढ़ते हुए धार्मिक उन्माद व कट्टरवाद से किस प्रकार से जल्द निपटा जाये। किस तरह से धर्म की आड़ में अधर्म को अंजाम देकर देशद्रोही बनने पर उतारू चंद लोगों को यह बात समझाई जाये कि बेशक अपने-अपने धर्म के अनुसार सभी धर्मों में पूजा अर्चना करने का तरीका व स्थलों की बनावट अलग-अलग हैं, धार्मिक तरीकें अलग है, लेकिन जहां तक दुनिया के प्रत्येक सच्चे धर्म की बात है तो धर्म तो केवल इंसान व इंसानियत की रक्षा करते हुए अनुशासित जीवन जीने का संदेश ही देते है, लेकिन फिर भी धर्म के नाम आयेदिन इंसान व इंसानियत की जघन्य हत्याएं चंद स्वार्थी व धूर्त लोगों के चलते हो रही हैं।इसलिए समय रहते देश के सभी राजनेताओं, नीतिनिर्माताओं व सिस्टम में बैठे लोगों को अब यह समझना होगा कि अब देश व समाज हित में वह समय आ गया है, जब बिना किसी जाति-धर्म के भेदभाव के आधार के उन्मादियों व कट्टरपंथियों की भीड़ से सख्ती के साथ निपटने का कार्य करना होगा, तब ही भविष्य में हमारे प्यारे देश में अमनचैन, प्यार, मोहब्बत व आपसी भाईचारे के साथ शांति कायम रह सकती है और देश विश्व गुरु बनने के मार्ग पर तेजी के साथ अग्रसर रह सकता है।।

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