रोहिंग्या मुसलमानो की घुसपैठ —

भारत में मानवाधिकार के नाम पर रोहिंग्या मुसलमानों को बसाने का प्रयास किया जा रहा है। आतंकी याकूब मेमन के अधिवक्ता रहें प्रशांत भूषण इन रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठियों की वकालत करके इनको यहां मानवता के नाम पर  बसाना चाहते है।
परंतु क्या यह कोई सुनिश्चित कर सकता है कि रोहिंग्या मुसलमान भारत में घुसपैठ करके बंग्लादेशी घुसपैठियों के समान जिहाद के अंतर्गत आतंक व अपराध को बढ़ावा नही देंगें ? जबकि हम पहले ही करोड़ों बंग्लादेशी घुसपैठियों के आतंक को झेल रहे है जिसके कारण हमारी न्यायायिक व्यवस्था बार बार सरकार से इन घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने के लिये भी परामर्श देती आ रही है। फिर भी हम इन रोहिंग्या घुसपैठियों को स्वीकार करके मानवता के नाम पर आतंक व अपराध की समस्याओं को ही बढ़ावा दें तो यह भूल नही आत्मघाती होगा।
जरा सोचो ये मुस्लिम म्यंमार से क्यों भाग रहें है ? इन्होने वहां के बौद्ध व अन्य धर्म के नागरिकों को अपनी जिहादी सोच के कारण वर्षो से आतंकित कर रखा है। वहां के एक बौद्ध भिक्षु विराथू ने जब इनकी मानसिकता को समझा तो उन्होने शांतिप्रिय होते हुए भी अपने राष्ट्र व नागरिकों के अस्तित्व की रक्षा के लिये इन आतंकियों के विरुद्ध  संघर्ष करने के लिये सभी को प्रेरित किया।अभी भी वहां ये मुस्लिम आतंकी रक्षाबलों के ठिकानों पर व सामान्य क्षेत्रों में भी आक्रमण करने से पीछे नही हट रहें है।अनेक आतंकी संगठन वहां के स्थानीय मुसलमानों का सहयोग करके जिहाद के लिये सक्रिय है।
ऐसी जिहादी मानसिकता वाले रोहिंग्या मुसलमानों को हम अपने यहां शरण दें तो हम भविष्य में इनके द्वारा और अधिक जिहादी संकट को कैसे रोक पायेंगे ? जबकि हम अपने ही लाखों कश्मीरी हिंदुओं को कश्मीर में उनके ही नगरों में उन्ही की संपत्तियों में पुनः स्थापित करने में  जिहादियों के कारण ही असमर्थ हो रहें है।
क्या मानवतावादियों को उदार व सहिष्णु हिंदुओं की पीड़ा द्रवित नही करती ? क्या सभी मानवतावादियों को मानवता का सर्वनाश करने वाले इन आतंकियों के ही मानवाधिकार की चिंता होती है ? अतः अवैध रुप से रह रहें रोहिंग्या घुसपैठियों को देश से बाहर निकालना और भविष्य में म्यंमार से भाग कर आने वालों का प्रवेश वर्जित करना सरकार व हम सब का दायित्व है। इसके लिये सरकार को कठोर निश्चय लेने के लिये विवश करना होगा।
आपको स्मरण होगा कि पिछले 3-4 वर्षों से सीरिया-ईराक़ आदि के इस्लामिक स्टेट के आतंकियों से भयभीत होकर वहां से भागे लाखों शरणार्थियों को यूरोप आदि के विभिन्न देशों ने शरण दी थी । परंतु इन शरणार्थियों के साथ साथ अनेक कट्टरपंथी जिहादी भी उन देशों में घुस गए थे जिससे वहां भी इन आतंकियों ने अपना जिहाद नही छोड़ा । जिससे दुखी होकर शरणार्थियों के प्रवेश को कई देशों ने प्रतिबंधित कर दिया। एक और दुखद व समझने वाला विषय यह है कि इन शरणार्थियों/घुसपैठियों को अरब आदि मुस्लिम देश सामर्थ होने पर भी कभी शरण नही देते।
अतः हमको यह सुनिश्चित करना होगा व सरकार को भी चेताना होगा कि किसी भी प्रकार मानवता के नाम पर भी इन मुस्लिम शरणार्थियों/घुसपैठियों को शरण न दी जाय।

भवदीय
विनोद कुमार सर्वोदय

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