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    Homeसाहित्‍यव्यंग्यसाथी हाथ छुड़ाना रे।

    साथी हाथ छुड़ाना रे।

    अमित शर्मा (CA)


    हर कार्यालय की लय,वहाँ कार्य से फ़र्ज़ी एनकाउंटर करने वाले कर्मचारियों की कुशलता में लीन रहकर अंततोगत्वा अपने प्रारब्ध में ही विलीन हो जाती है। कार्यालय में कार्य करने वाले आपके सहकर्मी, कार्यस्थल को घटनास्थल बनाने के लिए दिल और जान को उचित मात्रा में मिलाकर मास्टरशेफ के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। ऑफिस में प्रदर्शित किए अच्छे स्टंट्स किसी भी व्यक्ति को अच्छे सहकर्मी मिलने का गारंटी कार्ड नही दिलवा सकते है। अगर गलती से अच्छे सहकर्मी बरामद भी कर लिए जाए तो उनकी मेंटेंटेन्स भी बहुत मँहगी पड़ती है। सहकर्मी अपनी अच्छाई को पूरी कुशलता से जकड़े रहे इसके लिए आवश्यक है कि आप समय समय अपनी जेबें ढीली छोड़कर उन्हें “चाय-पानी” से नहलाते रहे।

    उन लोगो को अच्छा सहकर्मी मानना, “सहकर्मी धर्म” मे ईश निंदा के समान माना जाता है जो आपको केवल ऑफिस के कार्य मे मदद करके अपना पल्ला झाड़ लेते है। ऑफिस में ऐसे व्यक्तियों से सुरक्षित दूरी बनाकर चलनी चाहिए जो कार्य और कार्यालय के प्रति गंभीर रुख से पीड़ित होते है।  ऐसे लोगो से स्वयं सावधान रहने और दूसरो को जागरूक करना ही समय औऱ हर एम्प्लोयी यूनियन की माँग है। आप उनकी चपेट में ना आए इसीलिए गंभीरता, ईमानदारी और कार्य के प्रति समर्पण जैसे ज़्वलनशील पदार्थो को लेकर ऑफिस की सवारी ना करे।

    अच्छे सहकर्मी के पद पर केवल वही महात्मा तुल्य इंसान, आसीन होने योग्य है जो ना केवल स्वयं ऑफिस के कार्य से बेइंतहा नफरत करे बल्कि आपको भी इसके लिए समय समय पर नेट प्रैक्टिस करवाए। कार्य और कार्यस्थल से जो रोज़ जल्दी पीछा छुड़वाए, वे सहकर्मी ही आपके हितो के सच्चे ट्रस्टी होते है। आपके हितैषी सहकर्मी  काम के लिए “साथी हाथ बढ़ाना रे” के बदले हमेशा “साथी हाथ छुड़ाना रे” का कोरस गान करते रहते है। स्वभाव में नरमी और थोड़ी बेशर्मी लाकर कोई भी कर्मचारी एक योग्य सहकर्मी बनने की अर्हता प्राप्त कर लेता है।

    कई सहकर्मी बहुत नाज़ुक प्रकृति के होते है,तो कई सहकर्मी “ना झुक” स्वभाव के होते है। नाज़ुक सहकर्मी कार्य के प्रति काफ़ी संवेदनशील होने से कार्य के करीब आने से बचते है ताकि कार्य के हानिकारक विकिरण उन्हें नुकसान या उलाहना ना पहुँच सके। “ना झुक” स्वभाव के सहकर्मी ,कार्य से घबराते नही है बल्कि ताल ठोककर कार्य को अपने पास आने के लिए ललकारते है, इनकी गर्जना सुनकर कार्य इनके निकट आने के बदले दूर से ही कट लेता है। दोनो तरह के सहकर्मी अपने स्वभाव पर अड़िग रहकर, वर्कोहोलिक कर्मचारियों के दबाव में ना आकर हमेशा अपना स्वाभाविक प्रदर्शन करते है ताकि बाकि लोगो का उन पर से भरोसा ना उठ पाए।

    बॉस द्वारा नामज़द सहकर्मी हमेशा गर्मजोशी से मुठभेड़ करते है और बिना मुट्ठी गर्म किए कभी कोई काम स्वाहा नही करते है। ऐसे सहकर्मी सभी से गर्मजोशी बनाए रखते है ताकि वाजिब- गैरवाजिब शिकायतों को ठंडे बस्ते में रखा जा सके।

    एक कुशल सहकर्मी की निशानी होती है कि वो अपने सारो अवगुणों को पूरे ऑफिस में महामारी की तरह फैला दे ताकि पूरा ऑफिस इसकी चपेट में आ जाए। इस तरह से ऑफिस में एक ही तरह का वायरस डिटेक्ट होने से ना केवल सभी कर्मचारियों में  ऊँच-नीच का भेद मिटेगा और टीम भावना का विकास होगा बल्कि ऑफिस के सर्वर में एंटी वायरस सॉफ्टवेयर को भी ज़्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    एक उत्तम सहकर्मी हमेशा अपने मुखमंडल पर स्थाई असंतुष्टि का भाव लिए रहता है और अपने साथियों को भी इसी भाव से मेकअप कर बॉस को आकर्षित करने के लिए  उकसाता है।

    सरकार को एक अधिसूचना ज़ारी कर कामकाजी व्यक्ति के लिए धर्मनिरपेक्ष होना प्रतिबंधित किया जाना चाहिए क्योंकि उसके लिए सहकर्मी धर्म का पालन करना अनिवार्य होता है। सहकर्मी धर्म का अच्छी तरह से अनुकरण करने पर इंसान बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के ही सभी कार्यालयीन कार्यो का श्राद्ध करने में समर्थ हो जाता है। नास्तिक लोगो से बचते हुए ,सहकर्मी धर्म का दृढ़ता से पालन करके ही  इंसान ऑफिस में मोक्षगति को प्राप्त हो सकता है जो कि कार्यकारी जीवन की सदगति के लिए परम आवश्यक है।

    अमित शर्मा (CA)
    अमित शर्मा (CA)
    पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी। वर्तमान में एक जर्मन एमएनसी में कार्यरत। व्यंग लिखने का शौक.....

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