हास्य व्यंग्य कविताएं : शिष्टाचार, भाईचारा, मौज

bhaicharaमिलन  सिन्हा                            

शिष्टाचार

माल सब

साफ़ किया

विकास के नाम पर

विनाश किया

भ्रष्टाचार ही

शिष्टाचार है

कहो न प्यार है.

 

भाईचारा

‘भाईचारा’ का

शानदार नमूना देखिये

घर का चारा खानेवाला

खा रहा अब

‘भाई’ का ‘चारा’ देखिये.

 

मौज

मिल बाँट कर खाते हैं

रोज मौज  मनाते हैं

नीति हमारी है

बस खाने की

और राजनीति

बहाने के बदौलत

शासन  चलाने  की.

Leave a Reply

23 queries in 0.394
%d bloggers like this: