हास्य व्यंग्य कविता: गांधीवादी परम्परा

मिलन सिन्हा

हमारे  नेता जी काफी चर्चित थे .

जनता से

जो काम करने को कहते थे

उसे पहले

खुद करते थे .

इस  मामले वे अपने को

पक्के सिद्धान्तवादी-गांधीवादी कहते थे .

एक बार उन्होंने कहा,

हम गरीबी हटाकर रहेंगे

अब गरीबी रहेगी या

हम रहेंगे .

सिद्धान्त के मुताबिक  उन्होंने पहले

अपनी गरीबी हटाने का प्रयास किया

और जल्दी ही

कई गाड़ियां खरीद लीं,

चार-पांच मकान  बनवा लिया

और भी न जाने

क्या-क्या जोड़ लिया .

इस तरह उन्होंने

एक नयी परम्परा को जन्म दिया

जिसका अनुसरण करते हुए

अधिकांश नेता गांधीवादी (?) बन गए

और पहले

अपनी-अपनी गरीबी हटाने में जुट गए !

1 thought on “हास्य व्यंग्य कविता: गांधीवादी परम्परा

  1. पिछले वर्षो से नेताओं की यही चाल
    ?मंच से बोलते कुछ करते है बेहाल
    अब टूटने लगा लगातार सब्र जाल
    हाल बेहाल होता टूटेगा नेता जंजाल?

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