लेखक परिचय

मिलन सिन्हा

मिलन सिन्हा

स्वतंत्र लेखन अब तक धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, नवनीत, कहानीकार, समग्रता, जीवन साहित्य, अवकाश, हिंदी एक्सप्रेस, राष्ट्रधर्म, सरिता, मुक्त, स्वतंत्र भारत सुमन, अक्षर पर्व, योजना, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, आज, प्रदीप, राष्ट्रदूत, नंदन सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित ।

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netaji  मिलन सिन्हा

मजाक

मंत्री जी ने कहा,

“पांच वर्ष के बाद देश में

कोई भी अनपढ़ नहीं रहेगा।”

अगर सचमुच ऐसा हो पाया

तो सारा देश

उनका आभारी रहेगा।

पर, फिलहाल तो

हमारे अनेक नेताओं /शिक्षकों को

फिर से पढ़ना पड़ेगा,

‘ कुपढ़ ‘ नहीं,

वाकई शिक्षित होना पड़ेगा।

क्यों कि,

शिक्षा को उन्होंने ही

मजाक  बनाया है,

देश में  कुपढ़ों की संख्या को

बहुत  बढ़ाया  है।

सच मानिए,

‘ कुपढ़ ‘ होने से तो अच्छा  है

अनपढ़ रह जाना,

सिर्फ भाषण देकर नहीं

खुद कमाकर दो रोटी खाना,

दूसरों का हक़ मार कर नहीं,

अपने हक़ का इज्जत पाना,

सही मायने में

आदमी बन पाना ! 

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